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Mon, Oct 5, 2026Updated 10:20 PM IST
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मुंगेर: बंधक बनाकर पैर काटने के मामले में नेशनल हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन रद्द, एक माह में सेवाएं बंद करने का आदेश

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बिहार के मुंगेर जिले से चिकित्सा क्षेत्र में लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसके बाद जिला प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए शहर के प्रमुख निजी अस्पतालों में शुमार नेशनल हॉस्पिटल का औपबंधिक निबंधन (रजिस्ट्रेशन) रद्द कर दिया है। यह कार्रवाई अस्पताल में हुई चिकित्सकीय लापरवाही और मरीज को बंधक बनाकर उसका पैर काटे जाने के संगीन आरोपों के मद्देनजर की गई है। जिला प्रशासन ने अस्पताल संचालन को स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि वे एक माह के भीतर अस्पताल की सभी चिकित्सा सेवाओं को पूरी तरह बंद करें। इस फैसले के बाद जिले के निजी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और अन्य अस्पतालों के संचालकों में भी प्रशासन की इस सख्ती को लेकर चर्चा का माहौल बना हुआ है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुंगेर शहर के छोटी केलाबाड़ी इलाके में स्थित नेशनल हॉस्पिटल पर बेहद गंभीर आरोप लगे थे। आरोपों के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती एक मरीज को बंधक बना लिया गया था और इसके बाद उसका पैर काट दिया गया। यह घटना चिकित्सकीय लापरवाही (मेडिकल नेग्लिजेंस) का एक बेहद संवेदनशील और गंभीर उदाहरण मानी जा रही है। मरीज के साथ हुई इस कथित ज्यादती और अस्पताल प्रबंधन की मनमानी की खबर जैसे ही बाहर आई, पूरे जिले में लोगों के बीच भारी आक्रोश व्याप्त हो गया। आम जनता और मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाया था।

इस मामले में संज्ञान लेते हुए मुंगेर जिला प्रशासन ने त्वरित और ठोस कदम उठाए। प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच की गई और अस्पताल द्वारा अपनाई गई कार्यप्रणाली को स्वास्थ्य मानकों और नियमों के सर्वथा विपरीत पाया गया। इसके बाद जिलाधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए नेशनल हॉस्पिटल का औपबंधिक निबंधन रद्द करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया। औपबंधिक निबंधन रद्द होने का सीधा अर्थ यह है कि अब यह अस्पताल कानूनी रूप से किसी भी प्रकार की चिकित्सा सुविधा या उपचार देने के लिए अधिकृत नहीं रहा है।

प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन को एक माह यानी तीस दिनों की समय सीमा दी है। इस अवधि के भीतर अस्पताल को अपनी सभी चिकित्सा और गैर-चिकित्सा सेवाओं को पूर्ण रूप से बंद करना होगा। वर्तमान में यदि कोई मरीज अस्पताल में भर्ती है या उसका इलाज चल रहा है, तो उन्हें सुरक्षित रूप से अन्य सरकारी या मान्यता प्राप्त अस्पतालों में रेफर करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का दायित्व भी अस्पताल प्रबंधन का ही होगा। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि एक माह की इस अवधि के बाद यदि अस्पताल किसी भी रूप में संचालित पाया गया, तो उसके खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत और भी सख्त आपराधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

छोटी केलाबाड़ी जैसे व्यस्त और मुख्य इलाके में स्थित इस अस्पताल का रजिस्ट्रेशन रद्द होना जिले के स्वास्थ्य ढांचे के लिए एक बड़ा प्रशासनिक संदेश है। बिहार सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने हाल के वर्षों में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के नियमन को लेकर ‘बिहार क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट’ और अन्य संबंधित नियमों के तहत सख्ती बढ़ाई है। इन नियमों के तहत हर निजी अस्पताल के पास उचित पंजीकरण, योग्य चिकित्सकों की उपलब्धता, पर्याप्त बुनियादी ढांचा और मरीजों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होना अनिवार्य है। जो अस्पताल इन मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं या जहां मरीजों के साथ दुर्व्यवहार और लापरवाही के मामले सामने आते हैं, उनके खिलाफ निबंधन रद्द करने तक की कार्रवाई का प्रावधान है।

मुंगेर के नेशनल हॉस्पिटल के मामले में बंधक बनाने और बिना उचित चिकित्सीय कारणों या सहमति के अंग भंग करने का आरोप इतना गंभीर है कि प्रशासन के पास निबंधन रद्द करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी मरीज का अंग काटने से पहले उनकी विस्तृत जांच, सही निदान और मरीज या उसके परिजनों की लिखित सहमति (इनफॉर्म्ड कंसेंट) अनिवार्य होती है। यदि इन प्रक्रियाओं का पालन किए बिना या मरीज को बंधक बनाकर ऐसा किया जाता है, तो यह सीधे तौर पर अपराध की श्रेणी में आता है।

इस कार्रवाई से जिले के अन्य निजी अस्पतालों और क्लीनिक संचालकों में भी खलबली मची हुई है। प्रशासन की इस सख्ती ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि मरीजों के जीवन और स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में जिले के अन्य निजी अस्पतालों का भी नियमित निरीक्षण किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे सभी निर्धारित मानकों और गाइडलाइंस का पालन कर रहे हैं या नहीं।

वहीं, पीड़ित मरीज के मामले में पुलिस और प्रशासनिक जांच का दायरा अभी और भी विस्तृत हो सकता है। बंधक बनाने और चिकित्सकीय लापरवाही से जुड़े धाराओं के तहत अस्पताल के संचालकों और शामिल चिकित्सकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना बनी हुई है। मुंगेर जिला प्रशासन की इस तत्परता और कड़ी कार्रवाई को आम जनता और सामाजिक संगठनों द्वारा सराहा जा रहा है। लोगों का मानना है कि ऐसे कदमों से ही स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता आएगी और मरीजों को निजी अस्पतालों में सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सकेगा। फिलहाल, पूरे मुंगेर जिले में नेशनल हॉस्पिटल के बंद होने और उसके रजिस्ट्रेशन रद्द होने की खबर प्रमुखता से चर्चा का विषय बनी हुई है।