छत्तीसगढ़ कोल लेवी घोटाला: EOW आज पेश करेगा अंतिम चार्जशीट, नेताओं को 65 और अफसरों को 36 करोड़ से ज्यादा मिलने का दावा, 170 करोड़ की बेनामी संपत्ति जब्त

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सुर्खियों में रहे 570 करोड़ रुपए के कथित कोल लेवी घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) सोमवार को विशेष न्यायालय में अपना अंतिम आरोप पत्र यानी चार्जशीट पेश करने जा रहा है। यह मामला राज्य की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में भारी हलचल पैदा कर चुका है। ईओडब्ल्यू द्वारा तैयार किए गए इस अंतिम चार्जशीट में कई चौंकाने वाले खुलासे होने की बात कही जा रही है, जिसमें कांग्रेस नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस बहुचर्चित मामले में विशेष कोर्ट ने पहले ही आरोपी बनाए गए कांग्रेस नेताओं और संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में पेश होने के लिए समन जारी कर दिया है।
वानदे भारत न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आए विवरणों के मुताबिक इस कथित कोल लेवी घोटाले में राजनेताओं और अधिकारियों को मोटी रकम पहुंचाई गई थी। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि नेताओं को 65 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध राशि दी गई, जबकि प्रशासनिक अधिकारियों को 36 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम मिली। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि किस तरह से कोयला परिवहन और उत्खनन से जुड़ी लेवी के नाम पर एक व्यवस्थित तरीके से वसूली का जाल बिछाया गया था। ईओडब्ल्यू ने अपनी जांच के दौरान इन सभी लेन-देन के सबूत जुटाए हैं, जिन्हें सोमवार को अदालत के समक्ष पेश किए जाने वाले अंतिम आरोप पत्र का हिस्सा बनाया गया है।
इस पूरे घोटाले की जड़ें छत्तीसगढ़ के कोयला खनन और उसके परिवहन से जुड़ी लेवी प्रणाली में पाई गई हैं। राज्य में कोयले का बड़े पैमाने पर उत्पादन और परिवहन होता है। आरोपों के अनुसार, कोयला ढुलाई करने वाले वाहनों से अवैध रूप से लेवी वसूली जाती थी। यह वसूली की गई रकम सीधे तौर पर राजनेताओं और उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों तक पहुंचाई जाती थी। ईओडब्ल्यू ने अपनी विस्तृत जांच में इस बात के प्रमाण जुटाए हैं कि कैसे कोयला कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों, बिचौलियों, नेताओं और अधिकारियों की एक पूरी श्रृंखला इस कथित घोटाले में शामिल थी। 570 करोड़ रुपए का यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि यह कोई छोटा-मोटा मामला नहीं, बल्कि एक संगठित आर्थिक अपराध था जिसमें सरकारी तंत्र और राजनीतिक प्रभाव दोनों का दुरुपयोग किया गया।
जांच एजेंसी ने इस मामले में केवल आरोप पत्र ही तैयार नहीं किया है, बल्कि अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्तियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की है। ईओडब्ल्यू ने अपनी जांच के दौरान 170 करोड़ रुपए मूल्य की बेनामी संपत्तियां जब्त की हैं। ये बेनामी संपत्तियां उन लोगों से जोड़ी गई हैं जो इस कथित घोटाले में संलिप्त पाए गए हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि कोल लेवी के जरिए वसूली गई अवैध रकम को सफेद करने और उसे सुरक्षित रखने के लिए बेनामी संपत्तियों में निवेश किया गया था। 170 करोड़ की इस जब्ती ने इस घोटाले की भयावहता को और अधिक स्पष्ट कर दिया है।
इस मामले में दो प्रमुख नाम चंद्रदेव और विनोद तिवारी भी सामने आए हैं, जो सोमवार को कोर्ट में पेश हुए। इनकी उपस्थिति इस बात का संकेत है कि न्यायिक प्रक्रिया अब अपने निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुकी है। विशेष न्यायालय द्वारा जारी किए गए समन के बाद आरोपी नेताओं और अधिकारियों की कोर्ट में पेशी इस मामले की सुनवाई का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव है। ईओडब्ल्यू द्वारा पेश की जाने वाली अंतिम चार्जशीट में इन सभी आरोपियों की भूमिका, उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्य और उन पर लगाए गए विशिष्ट आरोपों का विस्तृत ब्योरा होगा।
छत्तीसगढ़ के राजनीतिक परिदृश्य में यह कोल लेवी घोटाला एक बेहद संवेदनशील मुद्दा रहा है। कांग्रेस नेताओं के नाम सामने आने से इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया था। हालांकि, ईओडब्ल्यू का कहना है कि उसकी जांच पूरी तरह से तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित है। जांच एजेंसी ने लंबे समय तक चली अपनी पड़ताल में दस्तावेजों, बैंक लेन-देन, गवाहों के बयानों और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण करके यह चार्जशीट तैयार की है। 570 करोड़ के इस घोटाले में 65 करोड़ नेताओं को और 36 करोड़ अफसरों को देने का दावा इस बात को रेखांकित करता है कि अवैध वसूली का पैसा किस तरह से ऊपर तक बांटा जा रहा था।
अब सभी की निगाहें विशेष न्यायालय पर टिकी हुई हैं, जहां सोमवार को ईओडब्ल्यू अपनी अंतिम चार्जशीट पेश करेगा। चार्जशीट पेश होने के बाद अदालत इस बात पर विचार करेगी कि किन-किन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। समन प्राप्त कर चुके आरोपी नेताओं और अधिकारियों को अब कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा। 170 करोड़ की जब्त बेनामी संपत्ति और 570 करोड़ के कथित घोटाले का यह मामला छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक अपराधों में से एक के रूप में दर्ज हो चुका है। ईओडब्ल्यू की यह अंतिम चार्जशीट इस लंबी जांच का निष्कर्ष है, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी शुरू होने जा रही है।

