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धार में बारिश थमने और तेज धूप से रबी फसल पर संकट: जलस्रोत खाली, गेहूं-चना की सिंचाई को लेकर किसान चिंतित

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मध्य प्रदेश के धार जिले में मानसून की विदाई के बाद मौसम का मिजाज तेजी से बदला है और अब बारिश का दौर पूरी तरह थम गया है। पिछले कई दिनों से आसमान साफ बना हुआ है और तेज धूप निकलने के साथ ही दिन के तापमान में वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिससे गर्मी का असर फिर से बढ़ने लगा है। शुक्रवार सुबह मौसम में हल्की ठंडक जरूर महसूस हुई, जिससे दिन के मौसम में कुछ बदलाव के संकेत मिले, लेकिन इससे बारिश की कोई उम्मीद नहीं जगी है। अक्टूबर माह की शुरुआत हो चुकी है, फिर भी जिले में कहीं भी वर्षा होने के आसार नजर नहीं आए हैं। इस स्थिति ने किसानों की चिंताओं को और अधिक बढ़ा दिया है, क्योंकि खरीफ सीजन की समाप्ति के तुरंत बाद रबी सीजन की तैयारियों का समय आ गया है और पानी की कमी अब एक गंभीर समस्या बनकर सामने आ रही है।

मौसम विभाग और स्थानीय अवलोकनों के अनुसार, इस वर्ष धार जिले में पिछले साल की तुलना में बारिश काफी कम हुई है। वर्षा की इस कमी का प्रत्यक्ष असर अब जिले के जलस्रोतों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई तालाब, कुएं और अन्य पारंपरिक जलस्रोत पर्याप्त पानी के अभाव में या तो पूरी तरह सूख गए हैं या उनमें जल स्तर खतरनाक रूप से नीचे चला गया है। जो जलस्रोत बचे हुए हैं, उनमें भी इतना पानी नहीं है कि रबी सीजन की फसलों की सिंचाई की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। भूजल स्तर में आई गिरावट के कारण बोरिंग और ट्यूबवेल भी अब पर्याप्त पानी देने में सक्षम नहीं हैं, जिससे सिंचाई के वैकल्पिक साधन भी प्रभावित हुए हैं।

वर्तमान में खेतों में सोयाबीन की कटाई का कार्य जारी है और अधिकांश क्षेत्रों में यह फसल अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। हालांकि, खरीफ फसल की कटाई पूरी होते ही किसानों के सामने अगली फसल की बुवाई और सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है। किसानों का कहना है कि कम बारिश का सीधा और नकारात्मक असर आगामी रबी सीजन की प्रमुख फसलों, विशेषकर गेहूं और चने पर पड़ने वाला है। इन फसलों की सफल खेती के लिए बुवाई के समय खेतों में पर्याप्त नमी (रवन्नी) का होना अत्यंत आवश्यक होता है, लेकिन मौजूदा हालात में खेत सूखे पड़े हैं और ऊपर से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं है।

धार जिले के किसानों ने बताया कि जलस्रोतों में पानी की भारी कमी के कारण वे अपनी जमीनों में गेहूं और चने की बुवाई करने को लेकर दुविधा में हैं। जिन किसानों के पास निजी बोरिंग हैं, वे भी पानी की कमी को लेकर चिंतित हैं क्योंकि भूजल स्तर गिरने से बोरिंग का डिस्चार्ज कम हो गया है। ऐसे में यदि बुवाई कर भी दी जाती है, तो फसल की सिंचाई कैसे होगी, यह सबसे बड़ा प्रश्न है। किसानों को आशंका है कि पानी की अनुपलब्धता के कारण न केवल बुवाई क्षेत्र कम होगा, बल्कि जहां बुवाई होगी वहां भी फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है। बारिश की कमी का असर पहले खरीफ सीजन पर देखा गया था और अब उसका असर रबी की तैयारियों पर भी दिखाई देने लगा है।

स्थानीय कृषि समुदाय में इस बात को लेकर चर्चा है कि यदि अक्टूबर के मध्य तक भी किसी प्रकार की पश्चिमी विक्षोभ या अन्य मौसमी प्रणाली से बारिश नहीं होती है, तो रबी सीजन की खेती पर गहरा संकट मंडराएगा। किसान आसमान की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं, लेकिन मौसम के वर्तमान रुख को देखते हुए उनकी चिंताएं बढ़ती ही जा रही हैं। तेज धूप और बढ़ती गर्मी ने मिट्टी की नमी को और तेजी से वाष्पित कर दिया है, जिससे खेतों की दशा और खराब हुई है।

प्रशासनिक और कृषि विभाग के स्तर पर भी इस स्थिति पर नजर रखी जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर जलस्रोतों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष वर्षा ऋतु में हुई कमी ने जल संग्रहण की व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। किसानों का मानना है कि यदि समय रहते सिंचाई के वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए गए या प्राकृतिक रूप से बारिश नहीं हुई, तो जिले की खाद्यान्न उत्पादन क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल, धार जिले का किसान समुदाय प्रकृति की अनिश्चितता के बीच अपनी जीविका और अगली फसल को लेकर गहरे संकट और चिंता के दौर से गुजर रहा है। मौसम की यह बेरुखी और जलस्रोतों का खाली होना रबी सीजन की सफलता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।