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सतना: भरहुत नगर में 40 साल बाद लीज निरस्त करने पर रहवासियों का विरोध, कलेक्टर से मिलकर दस्तावेजों की जांच और फ्रीहोल्ड की मांग

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मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित भरहुत नगर कॉलोनी के रहवासियों ने मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड द्वारा चालीस वर्षों बाद अचानक लीज निरस्त करने की कार्रवाई का तीव्र विरोध किया है। इस संबंध में गुरुवार शाम को कॉलोनी के प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय विधायकों के साथ जिला कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई और उचित दस्तावेजी जांच के बाद ही कोई निर्णय लेने की मांग की। रहवासियों का कहना है कि वे पिछले चार दशकों से इस कॉलोनी में निवास कर रहे हैं और अब इतने लंबे समय बाद लीज रद्द करने का नोटिस मिलना न्यायोचित नहीं है। उन्होंने प्रशासन से कॉलोनी को फ्रीहोल्ड करने और भूमि उपयोग से जुड़े सभी तथ्यों की पड़ताल करने की गुहार लगाई है।

गुरुवार शाम को हुए इस महत्वपूर्ण प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात में भरहुत नगर के रहवासी विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा और शंभूचरण दुबे के साथ जिला कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस से मिले। इस दौरान रहवासियों ने कलेक्टर के समक्ष विस्तार से अपनी बात रखी और बताया कि कैसे बिना पूर्व सूचना और ठोस आधार के लीज निरस्तीकरण की कार्रवाई उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित कर रही है। विधायकों ने भी रहवासियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर से इस मामले में हस्तक्षेप करने और निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया। जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में हुई इस वार्ता ने प्रशासनिक स्तर पर मामले की संवेदनशीलता को रेखांकित किया।

रहवासियों ने अपनी मांगों को लेकर तर्क दिया कि भरहुत नगर में मिश्रित भूमि उपयोग (मिक्स्ड लैंड यूज) की व्यवस्था वर्षों से चली आ रही है। कॉलोनी में आवासीय के साथ-साथ कई प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियां भी लंबे समय से संचालित हो रही हैं, जिसकी जानकारी प्रशासन को पहले से थी। ऐसे में अब अचानक व्यावसायिक इस्तेमाल का हवाला देकर लीज रद्द करने का नोटिस जारी करना तार्किक नहीं प्रतीत होता। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि यदि भूमि उपयोग या दस्तावेजों में कोई विसंगति है, तो उसकी विस्तृत जांच होनी चाहिए, न कि सीधे लीज निरस्त करने की दंडात्मक कार्रवाई। उनका कहना था कि चालीस साल के निवास के बाद उन्हें बेघर होने का भय सता रहा है, इसलिए प्रशासन को मानवीय और कानूनी दोनों पहलुओं पर विचार करना होगा।

इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहवासियों ने प्रशासन से कॉलोनी से संबंधित सभी अभिलेखों और दस्तावेजों की समीक्षा करने की विशेष मांग की। उनका तर्क था कि जब तक भूमि के स्वामित्व, पट्टे की शर्तों और ऐतिहासिक भूमि उपयोग के दस्तावेजों की पूरी तरह जांच नहीं हो जाती, तब तक कोई एकतरफा कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। इस मांग पर संज्ञान लेते हुए जिला कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने तत्काल प्रभाव से संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। कलेक्टर ने नगर निगम कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर और मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड की प्रभारी कार्यपालन यंत्री अनुष्का जैन से भरहुत नगर के सभी प्रासंगिक दस्तावेज तलब किए हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अभिलेखों का बारीकी से अध्ययन करें और रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने रहवासियों को आश्वस्त किया कि दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रशासन किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं दिखाएगा और तथ्यों के आधार पर ही निर्णय लिया जाएगा। कलेक्टर ने कहा कि यदि जांच में रहवासियों की बात सही पाई जाती है, तो उनके हितों की रक्षा की जाएगी, वहीं यदि नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो कानून सम्मत प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। यह आश्वासन रहवासियों के लिए कुछ राहत लेकर आया है, क्योंकि वे लगातार यह मांग कर रहे थे कि बिना जांच के उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कदम न उठाया जाए।

गुरुवार शाम को कलेक्टर से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिष्ठित नागरिक शामिल थे। इनमें सुहास त्रिपाठी, डॉ. राकेश अग्रवाल, सीए शैलेष जैन, हेमंत सिंह, डॉ. अखिलेश सिंह, साधना कपूर, डॉ. रेखा पांडेय, डॉ. अनुज पांडेय और कैलाश आयलानी प्रमुख रूप से मौजूद रहे। इन सभी ने मिलकर कलेक्टर के समक्ष कॉलोनी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान समस्याओं को रखा। प्रतिनिधिमंडल की इस पहल ने यह स्पष्ट कर दिया कि भरहुत नगर के रहवासी अपने अधिकारों के लिए एकजुट हैं और वे प्रशासनिक स्तर पर समाधान चाहते हैं।

यह मामला सतना शहर की शहरी योजना और हाउसिंग बोर्ड की नीतियों पर भी सवाल खड़े करता है। चालीस वर्षों से स्थापित कॉलोनी में अचानक लीज निरस्तीकरण की कार्रवाई से अन्य पुरानी कॉलोनियों के रहवासियों में भी चिंता का माहौल है। रहवासियों का कहना है कि यदि मिश्रित भूमि उपयोग को लेकर आपत्ति थी, तो इसे दशकों पहले स्पष्ट किया जाना चाहिए था। अब जबकि पीढ़ियां बदल चुकी हैं और लोग यहां स्थायी रूप से बस गए हैं, तब लीज रद्द करना व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा करता है। फ्रीहोल्ड की मांग भी इसी संदर्भ में उठी है, ताकि रहवासियों को भूमि पर पूर्ण स्वामित्व मिल सके और भविष्य में इस प्रकार के विवादों की पुनरावृत्ति न हो।

अब सभी की निगाहें नगर निगम और हाउसिंग बोर्ड द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं। कलेक्टर द्वारा मांगे गए दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद ही यह तय हो पाएगा कि भरहुत नगर के रहवासियों की लीज बहाल होगी या फिर प्रशासन अपनी कार्रवाई को सही ठहराएगा। फिलहाल, रहवासियों ने प्रशासन के जांच के भरोसे को स्वीकार किया है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे न्याय मिलने तक अपना संघर्ष जारी रखेंगे। यह मामला सतना प्रशासन के लिए एक चुनौती है कि वह कैसे पुरानी नीतियों और वर्तमान मानवीय आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाता है।