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Mon, Oct 5, 2026Updated 9:27 PM IST
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व्हाइट हाउस की गेस्ट लिस्ट से उजागर हुई शी जिनपिंग के बॉडीगार्ड की पहचान, मोदी-जिनपिंग बैठक में भी रहे थे मौजूद

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वाशिंगटन/बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सुरक्षा व्यवस्था और उनके बेहद करीबी दस्ते को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। कई वर्षों से शी जिनपिंग के विदेश दौरों और अंतरराष्ट्रीय स्तर की बड़ी बैठकों में उनके साथ नियमित रूप से नजर आने वाले एक अधिकारी की पहचान अब सार्वजनिक हो गई है। यह खुलासा अमेरिका के व्हाइट हाउस की आधिकारिक गेस्ट लिस्ट के माध्यम से हुआ है, जिसमें इस अधिकारी का नाम और उनका पद स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है। विशेष बात यह है कि यह अधिकारी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई ऐतिहासिक बैठक के दौरान भी उपस्थित थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह अधिकारी पिछले कई सालों से चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की हर अहम विदेश यात्रा का हिस्सा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जारी तस्वीरों और वीडियो फुटेज में इन्हें बार-बार देखा गया है। कभी यह अधिकारी शी जिनपिंग के ठीक पीछे खड़े होकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करते नजर आए, तो कभी किसी बड़ी द्विपक्षीय या बहुपक्षीय बैठक में वे राष्ट्रपति के साथ ही बैठे हुए दिखाई दिए। हालांकि, इनकी लगातार मौजूदगी के बावजूद लंबे समय तक इनकी सटीक पहचान और आधिकारिक पदनाम सार्वजनिक नहीं हो सका था। चीनी नेतृत्व की सुरक्षा व्यवस्था को दुनिया की सबसे गोपनीय सुरक्षा प्रणालियों में से एक माना जाता है, ऐसे में किसी सुरक्षा अधिकारी का नाम और पद सार्वजनिक होना एक असामान्य घटना मानी जा रही है।

इस अधिकारी की पहचान का राज तब खुला जब अमेरिका के व्हाइट हाउस की आधिकारिक गेस्ट लिस्ट सार्वजनिक हुई। इस लिस्ट में चीनी प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों के साथ-साथ इस अधिकारी का भी नाम और उनका आधिकारिक पद दर्ज किया गया था। व्हाइट हाउस की गेस्ट लिस्ट में नाम आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा विश्लेषकों और कूटनीतिक हलकों में इसको लेकर चर्चा तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि किसी देश के सर्वोच्च नेता के निजी सुरक्षाकर्मी की पहचान इस तरह से किसी दूसरे देश की आधिकारिक सूची में सामने आना कूटनीतिक और सुरक्षा दोनों दृष्टिकोणों से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

भारतीय परिप्रेक्ष्य में इस खबर की प्रासंगिकता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि यह अधिकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात के दौरान भी मौजूद थे। दोनों नेताओं के बीच जब उच्च स्तरीय वार्ता हुई, तब यह अधिकारी शी जिनपिंग के साथ बैठक में उपस्थित थे। मोदी-जिनपिंग की बैठकें हमेशा से वैश्विक राजनीति और एशियाई भूगोल के लिए अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण मानी जाती रही हैं। ऐसे में, दोनों नेताओं की आमने-सामने की वार्ता के दौरान कमरे में मौजूद हर व्यक्ति की भूमिका और पहचान कूटनीतिक दृष्टि से खासी मायने रखती है। इस अधिकारी की उस बैठक में मौजूदगी यह स्पष्ट करती है कि वे शी जिनपिंग के सिर्फ एक साधारण सुरक्षाकर्मी नहीं हैं, बल्कि उनके सबसे भरोसेमंद दस्ते का अहम हिस्सा हैं, जिन्हें अत्यंत गोपनीय और संवेदनशील बैठकों में भी राष्ट्रपति के साथ रहने की अनुमति होती है।

चीन के राष्ट्रपति की सुरक्षा का जिम्मा मुख्य रूप से सेंट्रल गार्ड ब्यूरो के पास होता है, जो सीधे तौर पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के अधीन काम करता है। यह संगठन अपनी अत्यधिक गोपनीयता के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। शी जिनपिंग जब से चीन के सर्वोच्च पद पर हैं, तब से उनकी सुरक्षा व्यवस्था को और भी ज्यादा कड़ा कर दिया गया है। विदेश दौरों के दौरान उनके साथ जो दस्ता चलता है, उसमें शामिल अधिकारियों की पृष्ठभूमि और वफादारी की गहन जांच की जाती है। व्हाइट हाउस की गेस्ट लिस्ट में जिस अधिकारी का नाम और पद सामने आया है, वह इसी कड़ी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा माने जा रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में किसी भी देश के राष्ट्राध्यक्ष की विदेश यात्राओं के दौरान उनके साथ चलने वाले प्रतिनिधिमंडल की सूची को काफी गोपनीय रखा जाता है, विशेषकर उन सदस्यों की जानकारी को जो सीधे तौर पर सुरक्षा से जुड़े होते हैं। हालांकि, मेजबान देशों द्वारा जारी की जाने वाली आधिकारिक गेस्ट लिस्ट या प्रोटोकॉल दस्तावेजों में कभी-कभी ऐसी जानकारियां सार्वजनिक हो जाती हैं, जो आम तौर पर पर्दे के पीछे रहती हैं। व्हाइट हाउस की सूची में सामने आए इस नाम ने चीनी सुरक्षा तंत्र की उस परत को उजागर कर दिया है जिसे बीजिंग हमेशा छिपाकर रखने का प्रयास करता रहा है।

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि शी जिनपिंग के इस अधिकारी की पहचान उजागर होने से उनके सुरक्षा प्रोटोकॉल में कोई बदलाव होगा या नहीं, इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान चीन की तरफ से नहीं आया है। वहीं, व्हाइट हाउस की ओर से भी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस गेस्ट लिस्ट को किस संदर्भ में या किस प्रक्रिया के तहत सार्वजनिक किया गया। लेकिन, मोदी-जिनपिंग बैठक सहित कई अहम अंतरराष्ट्रीय अवसरों पर इस अधिकारी की निरंतर उपस्थिति यह संकेत जरूर देती है कि वे चीनी राष्ट्रपति के सबसे करीबी और विश्वसनीय सुरक्षा अधिकारियों में से एक हैं। आने वाले समय में इस खुलासे के बाद चीन की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अपने प्रोटोकॉल में क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर वैश्विक स्तर पर नजर बनी हुई है।