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Mon, Oct 5, 2026Updated 9:25 PM IST
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बालाघाट: शराब बिक्री के विरोध में 50 से अधिक महिलाएं पहुंचीं कलेक्ट्रेट, अवैध शराब भट्टी हटाने और पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

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बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में अवैध शराब की बिक्री को लेकर ग्रामीण महिलाओं का गुस्सा सोमवार को उस समय सड़कों पर आ गया, जब लालबर्रा क्षेत्र के खमरिया गांव से 50 से ज्यादा महिलाएं कलेक्ट्रेट पहुंच गईं। इन महिलाओं ने अपने गांव में चल रही अवैध शराब भट्टी को तत्काल हटाने और शराब की खुली बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग की है। महिलाओं ने प्रशासन के सामने अपनी व्यथा रखते हुए कहा कि उनके बच्चों का भविष्य शराब की वजह से बर्बाद हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

सोमवार को बालाघाट कलेक्ट्रेट परिसर में अचानक उस समय हलचल बढ़ गई, जब लालबर्रा जनपद के अंतर्गत आने वाले खमरिया गांव से दर्जनों महिलाएं एकजुट होकर जिला मुख्यालय पहुंचीं। इन महिलाओं की संख्या 50 से अधिक बताई जा रही है। महिलाओं के हाथों में कोई बैनर या तख्तियां नहीं थीं, लेकिन उनके चेहरों पर साफ तौर पर नाराजगी और चिंता झलक रही थी। वे सीधे कलेक्ट्रेट पहुंचीं ताकि जिला प्रशासन के आला अधिकारियों तक अपनी बात रख सकें और उन्हें गांव की वास्तविक स्थिति से अवगत करा सकें। महिलाओं का कहना था कि वे कई दिनों से इस समस्या से जूझ रही हैं, लेकिन अब उनकी सहनशक्ति जवाब दे चुकी है, जिसके कारण उन्हें कलेक्ट्रेट का रुख करना पड़ा।

महिलाओं ने प्रशासन को बताया कि खमरिया गांव में अवैध रूप से शराब भट्टी संचालित की जा रही है। इस शराब भट्टी के कारण पूरे गांव का माहौल बिगड़ता जा रहा है। गांव के युवा और अन्य लोग इस अवैध शराब के सेवन की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, जिससे घर-परिवार की शांति भंग हो रही है। महिलाओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शराब की इस खुली बिक्री ने उनके बच्चों के भविष्य को दांव पर लगा दिया है। जो पैसा परिवार के पोषण, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च होना चाहिए, वह शराब की भेंट चढ़ रहा है। महिलाओं ने यह भी चिंता जताई कि अगर समय रहते इस अवैध कारोबार पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो आने वाले समय में गांव की स्थिति और भी बदतर हो सकती है।

इस प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने केवल अवैध शराब भट्टी हटाने की मांग ही नहीं की, बल्कि उन्होंने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सीधे तौर पर सवाल खड़े किए। महिलाओं का आरोप था कि पुलिस द्वारा इस मामले में ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। उनका कहना था कि गांव में अवैध शराब का धंधा खुलेआम चल रहा है, जिसकी जानकारी स्थानीय पुलिस को भी है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस प्रशासन की ओर से कोई सख्त कदम नहीं उठाया जा रहा है। पुलिस की इस ढील के कारण ही अवैध शराब बेचने वालों के हौसले बुलंद हैं और वे बिना किसी डर के अपना कारोबार जारी रखे हुए हैं। महिलाओं ने मांग की कि पुलिस को तत्काल प्रभाव से ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए जो इस अवैध धंधे में लिप्त हैं।

बालाघाट जिले के लालबर्रा क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री कोई नई समस्या नहीं है। ग्रामीण इलाकों में अक्सर ऐसी खबरें सामने आती रहती हैं जहां अवैध शराब के निर्माण और बिक्री को लेकर ग्रामीण, विशेषकर महिलाएं, विरोध प्रदर्शन करती हैं। खमरिया गांव की महिलाओं का कलेक्ट्रेट पहुंचना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि स्थानीय स्तर पर समस्या का समाधान न होने पर आम जनता को जिला मुख्यालय का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। महिलाओं का यह कदम उनके भीतर व्याप्त असुरक्षा और परिवारों को बचाने की तड़प को दर्शाता है।

कलेक्ट्रेट पहुंची महिलाओं ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि खमरिया गांव में चल रही शराब भट्टी को तत्काल बंद किया जाए और अवैध शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन इस मामले में स्वयं संज्ञान ले और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे। महिलाओं ने यह भी कहा कि वे अपने बच्चों के भविष्य को बर्बाद होते हुए नहीं देख सकतीं, इसलिए वे इस लड़ाई को तब तक जारी रखेंगी जब तक गांव से अवैध शराब का कारोबार पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता।

सोमवार को हुए इस विरोध प्रदर्शन के बाद अब जिला प्रशासन और पुलिस महकमे पर दबाव बढ़ गया है। 50 से अधिक महिलाओं का एक साथ कलेक्ट्रेट पहुंचकर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाना प्रशासन के लिए एक गंभीर विषय है। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में क्या ठोस कदम उठाए गए हैं या महिलाओं को क्या आश्वासन दिया गया है, इस बारे में स्रोत में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि पुलिस विभाग ने महिलाओं द्वारा लगाए गए आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया दी है या नहीं। फिलहाल, खमरिया गांव की महिलाओं की इस पहल ने जिले में अवैध शराब के कारोबार और पुलिस की भूमिका पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। देखना यह होगा कि प्रशासन महिलाओं की इस जायज मांग पर कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी कार्रवाई करता है।