दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ICCC बना एकीकृत प्लेटफॉर्म, AI कैमरों और GPS से होगी 24×7 निगरानी

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटने और पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए अब एक नई तकनीकी पहल की गई है। दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति पर लगातार और सटीक नजर रखने के साथ ही प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी कार्रवाइयों को पूरी तरह से समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) को एक एकीकृत प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है। इस अत्याधुनिक केंद्र के माध्यम से प्रदूषण से जुड़े विभिन्न स्रोतों और उनसे संबंधित गतिविधियों की चौबीसों घंटे यानी 24×7 निगरानी की जा रही है। यह व्यवस्था दिल्ली सरकार और प्रशासनिक एजेंसियों को प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों पर त्वरित कार्रवाई करने में सक्षम बनाएगी।
वानदे भारत न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, इस नए एकीकृत प्लेटफॉर्म को कई आधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कैमरे, डेटा एनालिसिस सिस्टम और ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) शामिल हैं। इन सभी तकनीकों का समन्वित उपयोग करके शहर में प्रदूषण के स्तर और उसके कारणों की वास्तविक समय में जानकारी जुटाई जा रही है। विशेष रूप से, शहर की सड़कों की सफाई के लिए तैनात मैकेनिकल स्वीपर्स की निगरानी अब सीधे GPS तकनीक के जरिए की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सफाई का कार्य निर्धारित समय और निर्धारित मार्गों पर ही हो रहा है या नहीं। पूर्व में कई बार यह देखने को मिलता था कि मैकेनिकल स्वीपर्स को तैनात तो कर दिया जाता था, लेकिन उनकी वास्तविक कार्यप्रणाली और ट्रैकिंग का कोई पुख्ता तरीका नहीं होता था। अब GPS ट्रैकिंग के माध्यम से कमांड सेंटर में बैठे अधिकारी हर एक मैकेनिकल स्वीपर की लोकेशन और उसके द्वारा किए जा रहे काम की लाइव मॉनिटरिंग कर सकेंगे।
इसके अलावा, AI कैमरों का इस्तेमाल प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों की पहचान करने के लिए किया जा रहा है। ये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से युक्त कैमरे खुले में कचरा जलाने, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण मानकों के उल्लंघन और अन्य ऐसे कार्यों को स्वचालित रूप से पकड़ने में सक्षम हैं, जो वायु गुणवत्ता को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। जब भी कोई AI कैमरा किसी उल्लंघन को रिकॉर्ड करता है, तो उसका डेटा तुरंत इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) में भेजा जाता है। इसके बाद डेटा एनालिसिस की मदद से इस बात का विश्लेषण किया जाता है कि किस क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर अधिक है और वहां किस प्रकार की कार्रवाई की आवश्यकता है।
इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) को एक एकीकृत प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करने का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि अब अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय की कमी नहीं रहेगी। प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े सभी विभागों का डेटा एक ही जगह उपलब्ध होगा, जिससे नीतिगत निर्णय लेने और मौके पर कार्रवाई करने में तेजी आएगी। स्रोत के मुताबिक, इस पूरे सिस्टम का लक्ष्य प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी कार्रवाइयों को समयबद्ध बनाना है, ताकि सर्दियों के मौसम में जब दिल्ली में वायु गुणवत्ता अपने सबसे खराब स्तर पर पहुंच जाती है, तब प्रशासन पहले से ही पूरी तरह सतर्क और तैयार रहे।
दिल्ली में हर साल सर्दियों के दौरान पराली के धुएं, वाहनों के उत्सर्जन, औद्योगिक गतिविधियों और धूल के कारण प्रदूषण का स्तर खतरनाक श्रेणी में चला जाता है। ऐसे में AI कैमरों, डेटा एनालिसिस और GPS तकनीक पर आधारित यह नई निगरानी प्रणाली एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हालांकि, यह देखा जाना बाकी है कि इस तकनीकी ढांचे का जमीनी स्तर पर प्रदूषण कम करने में कितना ठोस योगदान रहता है। फिलहाल, ICCC के माध्यम से 24×7 मॉनिटरिंग की यह व्यवस्था दिल्ली के प्रदूषण प्रबंधन तंत्र को अधिक मजबूत, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
अधिकारियों का मानना है कि डेटा एनालिसिस से प्राप्त होने वाली जानकारी के आधार पर प्रदूषण के हॉटस्पॉट्स की सटीक पहचान की जा सकेगी। इससे संसाधनों का बेहतर आवंटन हो सकेगा और जिन इलाकों में प्रदूषण का स्तर अधिक है, वहां मैकेनिकल स्वीपर्स और अन्य सफाई दस्तों को प्राथमिकता के आधार पर भेजा जा सकेगा। कुल मिलाकर, इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर ने दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति को एक नई तकनीकी दिशा प्रदान की है, जिसके परिणाम आने वाले समय में स्पष्ट रूप से देखे जा सकेंगे।

