मराठा आरक्षण: मनोज जरांगे ने 20 दिन बाद भूख हड़ताल खत्म की, महाराष्ट्र सरकार को कार्रवाई के लिए दिए तीन महीने

मुंबई। वंदे भारत न्यूज। महाराष्ट्र में मराठा समुदाय को आरक्षण देने की मांग को लेकर पिछले 20 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे प्रमुख मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने अपना उपवास समाप्त कर दिया है। उन्होंने अपनी भूख हड़ताल खत्म करने के साथ ही महाराष्ट्र सरकार को मराठा आरक्षण की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और ठोस कार्रवाई करने के लिए तीन महीने का समय दिया है। यह जानकारी सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर मराठा आरक्षण का मुद्दा केंद्र बिंदु पर आ गया है।
मनोज जरांगे ने लगातार 20 दिनों तक चली अपनी इस भूख हड़ताल के दौरान मराठा समुदाय को आरक्षण दिलाने की मांग पर अड़े रहे। उनके स्वास्थ्य को लेकर लगातार चिंताएं व्यक्त की जा रही थीं। लंबे समय तक बिना अन्न-जल के रहने के कारण उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर हो गई थी। ऐसे में उनके समर्थकों, चिकित्सकों और सामाजिक संगठनों द्वारा उनसे उपवास तोड़ने की अपील की जा रही थी। अंततः 20 दिन पुरानी भूख हड़ताल को समाप्त करते हुए उन्होंने सरकार के सामने एक स्पष्ट समयसीमा रख दी है।
मनोज जरांगे ने महाराष्ट्र सरकार को जो तीन महीने का समय दिया है, उसका सीधा अर्थ यह है कि राज्य सरकार को आगामी तीन महीनों के भीतर मराठा समुदाय की आरक्षण संबंधी मांगों पर कोई ठोस कदम उठाना होगा। यदि इस निर्धारित समयसीमा के भीतर सरकार की ओर से कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है या मांगों को पूरा नहीं किया जाता है, तो यह माना जा रहा है कि आंदोलन को एक बार फिर तेज किया जा सकता है। हालांकि, जरांगे ने फिलहाल सरकार पर भरोसा जताते हुए उन्हें विचार और कार्रवाई का अवसर प्रदान किया है।
बता दें कि महाराष्ट्र में मराठा समुदाय को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण की मांग काफी पुरानी है। इस मांग को लेकर समय-समय पर बड़े स्तर पर आंदोलन होते रहे हैं। मनोज जरांगे पिछले काफी समय से इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा बने हुए हैं। वे मराठा समुदाय को कुणबी प्रमाणपत्र जारी करने और उसके आधार पर आरक्षण का लाभ देने की मांग को लेकर मुखर रहे हैं। उनकी इसी मांग को लेकर राज्य में कई बार तनावपूर्ण स्थिति भी उत्पन्न हुई है।
महाराष्ट्र की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में मराठा आरक्षण एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। राज्य में चुनावी राजनीति और सत्ता के समीकरणों पर मराठा समुदाय के आरक्षण की मांग का गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में मनोज जरांगे द्वारा 20 दिन की लंबी भूख हड़ताल के बाद तीन महीने का समय देना राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। सरकार को अब कानूनी और संवैधानिक दायरे में रहते हुए ऐसा रास्ता निकालना होगा जिससे मराठा समुदाय की मांगों का समाधान हो सके और अन्य वर्गों में भी असंतोष न फैले।
भूख हड़ताल समाप्त होने की खबर मिलते ही जरांगे के समर्थकों ने राहत की सांस ली है। उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे चिकित्सकों की टीम ने भी उपवास समाप्त करने के बाद उनके स्वास्थ्य की देखभाल के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। लंबे समय तक भूख हड़ताल पर रहने के कारण शरीर को पोषण की आवश्यकता होती है, जिसे ध्यान में रखते हुए उन्हें नियंत्रित तरीके से आहार दिया जा रहा है।
मराठा आरक्षण का मामला अदालतों में भी विचाराधीन रहा है। पहले भी मराठा समुदाय को आरक्षण देने के कुछ प्रावधानों को उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी, जिसके बाद आरक्षण पर रोक लग चुकी है। यही कारण है कि मनोज जरांगे और मराठा समाज के अन्य संगठन सरकार से ऐसे स्थायी और कानूनी रूप से मजबूत समाधान की मांग कर रहे हैं, जो न्यायालयों में भी टिक सके।
अब सभी की निगाहें महाराष्ट्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। देखना यह होगा कि सरकार मनोज जरांगे द्वारा दिए गए तीन महीने के समय का उपयोग किस प्रकार करती है और मराठा आरक्षण के इस जटिल मुद्दे पर क्या नीतिगत फैसला लेती है। वंदे भारत न्यूज इस मामले में होने वाले हर विकास पर नजर बनाए हुए है।

