Mon, 05 Oct 202610:19 PM
Mon, Oct 5, 2026Updated 10:19 PM IST
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झाबुआ के कवठु गांव में सड़क पर दिखा तेंदुआ: रात में वाहन की लाइट पड़ते ही सामने आया जंगली जानवर, वन विभाग ने शुरू की सर्चिंग

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मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले से जुड़े आलीराजपुर क्षेत्र के कवठु गांव में एक बार फिर तेंदुए की दस्तक ने ग्रामीणों और स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार को वन विभाग को इस बात की सूचना मिली कि कवठु गांव के पास सड़क पर एक तेंदुआ देखा गया है। यह घटना रात के समय की बताई जा रही है, जब एक गुजरते हुए वाहन की हेडलाइट की रोशनी सीधे उस जंगली जानवर पर पड़ी और वह सड़क पर स्पष्ट रूप से नजर आया। सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने कवठु गांव और उसके आसपास के इलाकों में तेंदुए की खोज के लिए सर्चिंग अभियान शुरू कर दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना रात के अंधेरे में घटी। कवठु गांव के समीप से गुजरने वाली सड़क पर जब एक वाहन आगे बढ़ रहा था, तो अचानक उसकी हेडलाइट की तेज रोशनी में एक तेंदुआ सड़क पर खड़ा या चलता हुआ दिखाई दिया। वाहन की लाइट पड़ते ही तेंदुए का मूवमेंट साफ तौर पर सामने आ गया। इस दृश्य को देखकर वाहन में मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। हालांकि, इस दौरान किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना या हमले की सूचना नहीं है, लेकिन सड़क पर खुलेआम तेंदुए के दिखने से क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा हो गया है।

इस घटना के संबंध में सोमवार को वन विभाग को आधिकारिक तौर पर सूचना दी गई। सूचना प्राप्त होते ही वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी तुरंत हरकत में आए। विभाग की एक विशेष टीम को कवठु गांव और उसके आसपास के संभावित क्षेत्रों में भेजा गया है। यह टीम तेंदुए की लोकेशन का पता लगाने और उसके मूवमेंट को ट्रैक करने के लिए सर्चिंग अभियान चला रही है। वन विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जंगली जानवर किसी भी आबादी वाले क्षेत्र में नुकसान न पहुंचाए और उसे सुरक्षित रूप से उसके प्राकृतिक आवास यानी जंगल की ओर वापस खदेड़ा जा सके।

उल्लेखनीय है कि रिपोर्ट में कहा गया है कि कवठु गांव में तेंदुए का मूवमेंट ‘फिर’ सामने आया है। इसका अर्थ यह है कि इस क्षेत्र में पहले भी तेंदुए की गतिविधियां देखी या दर्ज की जा चुकी हैं। बार-बार एक ही इलाके में तेंदुए के दिखने से यह संकेत मिलता है कि या तो जंगलों में उसके शिकार की कमी हो रही है, या फिर जंगली जानवरों के प्राकृतिक आवास सिकुड़ रहे हैं, जिसके कारण वे भोजन और पानी की तलाश में मानव बस्तियों और सड़कों के करीब आने को मजबूर हो रहे हैं। कवठु गांव और इसके आसपास के जंगली और पहाड़ी इलाकों में ऐसे जंगली जानवरों का आना-जाना रहता है, लेकिन सड़क पर सीधे तौर पर वाहन के सामने आ जाना ग्रामीणों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

वन विभाग की टीम सर्चिंग के दौरान आसपास के जंगलों, खेतों और संभावित छिपने के ठिकानों की बारीकी से जांच कर रही है। विभाग द्वारा तेंदुए के पैरों के निशान (पगमार्क) और अन्य संकेतों की तलाश की जा रही है ताकि उसकी सही दिशा और लोकेशन का अनुमान लगाया जा सके। इसके साथ ही, वन विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों से भी सतर्क रहने की अपील की है।

ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि वे रात के समय अकेले घर से बाहर न निकलें। खेतों, जंगल के किनारों या सुनसान सड़कों पर जाने से बचें। यदि किसी को तेंदुआ या कोई अन्य जंगली जानवर दिखाई दे, तो उसे तुरंत वन विभाग या स्थानीय पुलिस को सूचित करना चाहिए। किसी भी स्थिति में ग्रामीणों को स्वयं जंगली जानवर का पीछा करने, उसे डराने या मारने का प्रयास नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे जानवर हिंसक हो सकता है और जान-माल का नुकसान हो सकता है।

आलीराजपुर और झाबुआ जैसे आदिवासी बहुल और जंगलों से घिरे जिलों में वन्यजीवों और मानव बस्तियों के बीच टकराव की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं। इन क्षेत्रों में तेंदुए, भालू और अन्य वन्यजीवों का आवास है। जब ये जानवर गांवों की तरफ रुख करते हैं, तो वन विभाग के सामने उन्हें सुरक्षित वापस जंगल में भेजने की चुनौती होती है। वर्तमान में वन विभाग की टीम पूरी मुस्तैदी के साथ कवठु गांव और आसपास के क्षेत्रों में तेंदुए की तलाश में जुटी हुई है। जब तक तेंदुए को ट्रैक करके जंगल की तरफ नहीं खदेड़ दिया जाता, तब तक क्षेत्र में सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग की ओर से इस मामले में आगे की कार्रवाई जारी है और ग्रामीणों से सहयोग की अपील की गई है।