बागेश्वर धाम से 20 वर्षीय युवक 13 दिन से लापता: बहन ने एसपी कार्यालय पहुंचकर लगाई गुहार, पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक आस्था का केंद्र बागेश्वर धाम से एक 20 वर्षीय युवक के रहस्यमय तरीके से लापता होने का मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले का निवासी यह युवक अपने पिता के साथ बीमारी के इलाज की कामना लेकर धाम में अर्जी लगाने आया था, लेकिन बालाजी महाराज के दर्शन करने गया युवक पिछले 13 दिनों से लापता है। घटना को दो सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक युवक का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। इस देरी और पुलिस की कथित निष्क्रियता से आहत परिवार ने अब पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय का रुख किया है और न्याय की गुहार लगाई है।
लापता हुए युवक की पहचान नीरज उर्फ चिंटू के रूप में हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नीरज पिछले काफी समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहा था। उसकी बीमारी को लेकर पूरा परिवार चिंतित था। स्थानीय स्तर पर विभिन्न उपचार कराने के बाद भी जब उसके स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, तो परिवार ने धार्मिक आस्था के तहत बागेश्वर धाम में अर्जी लगाने का निर्णय लिया। इसी क्रम में नीरज अपने पिता कैलाश चंद्र के साथ 18 सितंबर को छतरपुर जिले के बागेश्वर धाम पहुंचा था। परिवार की मान्यता थी कि धाम में अर्जी लगाने और बालाजी महाराज के दर्शन करने से नीरज के स्वास्थ्य में लाभ होगा और उसे शीघ्र स्वस्थता प्राप्त होगी।
नीरज और उसके पिता कैलाश चंद्र ने 18 सितंबर को धाम पहुंचकर अर्जी लगाने की प्रक्रिया शुरू की। अगले दिन यानी 19 सितंबर को दोपहर करीब 12:30 बजे नीरज बालाजी महाराज के दर्शन करने के लिए मंदिर परिसर गया। उस समय उसके पिता कैलाश चंद्र भी उसके साथ थे या मंदिर परिसर में ही मौजूद थे। हालांकि, दर्शन के लिए जाने के बाद नीरज वापस नहीं लौटा। जब काफी देर तक वह नहीं दिखा, तो पिता कैलाश चंद्र ने उसे मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में ढूंढना शुरू किया। कई घंटों की तलाश के बाद भी जब नीरज का कोई पता नहीं चला, तो परिवार की चिंता बढ़ गई और उन्होंने इसकी सूचना स्थानीय लोगों और प्रशासन को दी।
नीरज की बहन प्रियंका बेदी ने पूरे मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि भाई के लापता होने की सूचना मिलते ही पूरा परिवार सक्रिय हो गया और उसकी तलाश में जुट गया। परिवार के सदस्यों ने सबसे पहले बागेश्वर धाम के पूरे परिसर को छान मारा। इसके बाद धाम के आसपास के इलाकों में भी व्यापक स्तर पर खोजबीन की गई। प्रियंका के अनुसार, परिवार ने सिर्फ छतरपुर में ही नहीं, बल्कि बुलंदशहर और अन्य जगहों पर मौजूद रिश्तेदारों के यहां भी संपर्क किया और नीरज के वहां पहुंचने की संभावना टटोली, लेकिन किसी भी रिश्तेदार के पास नीरज के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। परिवार के सदस्य लगातार छतरपुर जिले के विभिन्न हिस्सों में नीरज को ढूंढने में जुटे हुए हैं, लेकिन दिन-रात की जा रही इस तलाश के बावजूद 13 दिन बीत जाने के बाद भी कोई सफलता नहीं मिली है।
प्रियंका बेदी ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि भाई के लापता होने के बाद उन्होंने स्थानीय बमीठा थाने में कई बार जाकर गुमशुदगी की सूचना दी। उनका आरोप है कि थाने में शिकायत देने के बावजूद पुलिस ने इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। पुलिस की ओर से कोई सार्थक कदम न उठाए जाने से परिवार की परेशानी और मानसिक तनाव और भी बढ़ गया है। परिवार को यह समझ नहीं आ रहा है कि आखिर नीरज के साथ क्या हुआ होगा और वह किस हालत में कहां होगा। बमीठा थाने से निराश होने के बाद, नीरज की बहन प्रियंका बेदी ने अब पुलिस अधीक्षक कार्यालय का रुख किया है।
प्रियंका एसपी कार्यालय पहुंची और उन्होंने अधिकारियों के समक्ष अपने भाई की गुमशुदगी दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई है कि वे व्यक्तिगत रूप से इस मामले में हस्तक्षेप करें और नीरज को जल्द से जल्द खोजने के लिए विशेष टीम का गठन कर कार्रवाई सुनिश्चित करें। परिवार को उम्मीद है कि उच्च अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बाद अब पुलिस तेजी से काम करेगी और उनके लापता भाई को सकुशल खोज लिया जाएगा। फिलहाल, छतरपुर पुलिस के सामने इस गुमशुदगी के मामले को सुलझाने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की बड़ी चुनौती है। यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि बागेश्वर धाम में देश भर से श्रद्धालु आते हैं और ऐसे में किसी श्रद्धालु के लापता होने की घटना प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर प्रश्नचिह्न लगाती है।




