Tue, 06 Oct 202611:37 PM
Tue, Oct 6, 2026Updated 11:37 PM IST
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भोपाल के शाहपुरा तालाब पर NGT का सख्त रुख: 10 दिन में FTL और बफर जोन का सीमांकन पूरा करने के निर्देश, अधिकारियों को फटकार

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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित शाहपुरा तालाब के संरक्षण, सीमांकन और अतिक्रमण हटाने से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने प्रशासन के प्रति बेहद सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए हैं कि संबंधित विभागों के अधिकारी आपस में जिम्मेदारी तय करने के लिए पल्ला झाड़ना तुरंत बंद करें और निर्धारित समयसीमा के भीतर अपना कार्य पूरा करें। एनजीटी ने आदेश दिया है कि एसडीएम कोलार, जल संसाधन विभाग और भोपाल नगर निगम को आपस में समन्वय स्थापित करते हुए गठित समिति के साथ मिलकर काम करना होगा। इस समिति को अगले 10 दिन के भीतर शाहपुरा झील का वास्तविक एफटीएल (फुल टैंक लेवल) और बफर जोन का सीमांकन हर हाल में पूरा करने का सख्त निर्देश दिया गया है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा जारी किए गए इन निर्देशों के बाद भोपाल प्रशासन में हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है। ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया है कि शाहपुरा तालाब के संरक्षण और उसके क्षेत्र में हो रहे अतिक्रमण को लेकर अब किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने अधिकारियों की उस प्रवृत्ति पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर अपना पल्ला झाड़ने का प्रयास कर रहे थे। एनजीटी ने साफ तौर पर कहा कि इस तरह की कार्यप्रणाली से तालाब के संरक्षण का कार्य प्रभावित हो रहा है और अतिक्रमणकारी को इसका लाभ मिल रहा है। इसलिए सभी संबंधित अधिकारियों को एक साथ बैठकर समस्या का समाधान निकालना होगा।

ट्रिब्यूनल ने विशेष रूप से एसडीएम कोलार, जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और भोपाल नगर निगम के प्रतिनिधियों को निर्देशित किया है कि वे पहले से गठित की गई समिति के साथ पूर्ण सहयोग करें। इस समिति को आगामी 10 दिनों की कठोर समयसीमा के भीतर शाहपुरा तालाब का वास्तविक एफटीएल यानी फुल टैंक लेवल निर्धारित करने का काम पूरा करना है। इसके साथ ही तालाब के चारों ओर बफर जोन का सटीक सीमांकन भी अनिवार्य रूप से किया जाना है। एनजीटी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह कार्य हर हाल में तय समय के भीतर पूरा होना चाहिए और इसमें किसी भी प्रकार का बहाना या विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा।

ज्ञात हो कि एफटीएल (फुल टैंक लेवल) किसी भी जलाशय या तालाब की वह अधिकतम जल स्तर रेखा होती है, जब वह पूरी तरह से भर जाता है। पर्यावरणीय नियमों और जल संरक्षण कानूनों के अनुसार, इस रेखा के भीतर किसी भी प्रकार का निर्माण या अतिक्रमण अवैध माना जाता है। वहीं, बफर जोन वह सुरक्षा क्षेत्र होता है जो जलाशय के चारों ओर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, जल गुणवत्ता सुनिश्चित करने और प्राकृतिक जल संचयन को बाधित होने से बचाने के लिए छोड़ा जाता है। शाहपुरा तालाब के मामले में लंबे समय से यह मुद्दा उठ रहा था कि एफटीएल और बफर जोन का सही तरीके से सीमांकन नहीं होने के कारण तालाब की भूमि पर अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। इसी समस्या को संज्ञान में लेते हुए एनजीटी ने अब ठोस कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

भोपाल शहर को तालाबों की नगरी के रूप में जाना जाता है और शाहपुरा तालाब शहर के प्रमुख जलाशयों में से एक है। शहरीकरण के तेजी से बढ़ते दबाव के कारण पिछले कई वर्षों से इस तालाब की भूमि पर अतिक्रमण की लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाले संगठनों और सचेत नागरिकों द्वारा इस मामले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के समक्ष उठाया गया था। ट्रिब्यूनल ने मामले की गंभीरता को समझते हुए अब प्रशासन को स्पष्ट और कड़े निर्देश दिए हैं ताकि तालाब के अस्तित्व को बचाया जा सके और उसके मूल स्वरूप को पुनर्स्थापित किया जा सके।

एनजीटी के इन सख्त निर्देशों के बाद अब भोपाल प्रशासन, जल संसाधन विभाग और नगर निगम के लिए चुनौती बढ़ गई है। तीनों विभागों को अपनी पुरानी कार्यप्रणाली छोड़कर आपसी समन्वय से काम करना होगा। एसडीएम कोलार को इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभानी होगी और गठित समिति के साथ मिलकर सर्वेक्षण तथा सीमांकन का कार्य युद्धस्तर पर पूरा करना होगा। यदि 10 दिन की निर्धारित समयसीमा के भीतर एफटीएल और बफर जोन का सीमांकन पूरा नहीं होता है, तो ट्रिब्यूनल द्वारा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

शाहपुरा तालाब के संरक्षण और अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर एनजीटी का यह रुख भोपाल के अन्य जलाशयों के संरक्षण के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया है कि पर्यावरण संरक्षण और जलाशयों की सुरक्षा के मामलों में प्रशासनिक ढिलाई या विभागीय समन्वय की कमी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब देखना यह होगा कि भोपाल प्रशासन और संबंधित विभाग एनजीटी के इन सख्त निर्देशों का पालन करते हुए 10 दिन के भीतर शाहपुरा तालाब का सीमांकन कार्य कितनी सफलतापूर्वक पूरा कर पाते हैं। वंदे भारत न्यूज़ की रिपोर्ट।