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Mon, Oct 5, 2026Updated 10:19 PM IST
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मऊगंज: भूमिहीन दलित-आदिवासियों को कृषि भूमि आवंटन की मांग, महासभा ने निकाली रैली; अपर कलेक्टर ने दिया कार्रवाई का भरोसा

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मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में सोमवार को दलित, आदिवासी और पिछड़ा वर्ग के भूमिहीन परिवारों को कृषि योग्य भूमि उपलब्ध कराने की मांग को लेकर एक बड़ी रैली का आयोजन किया गया। दलित आदिवासी पिछड़ा वर्ग महासभा के बैनर तले निकाली गई इस रैली में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया और प्रशासन से अपनी मांगों पर त्वरित एवं ठोस कार्रवाई करने की अपील की। रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए भूमिहीनों के अधिकारों को सुनिश्चित करने की गुहार लगाई। इस मौके पर अपर कलेक्टर पीके पांडे ने प्रदर्शनकारियों का ज्ञापन स्वीकार किया और उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी मांगों पर नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।

सोमवार को आयोजित इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य उन गरीब और वंचित परिवारों की समस्याओं को प्रशासनिक स्तर तक पहुंचाना था, जो वर्षों से कृषि भूमि के अभाव में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। दलित आदिवासी पिछड़ा वर्ग महासभा ने स्पष्ट किया कि जिले में ऐसे कई पात्र हितग्राही हैं जिन्हें सरकारी योजनाओं के तहत भूमि का लाभ मिलना चाहिए, लेकिन अब तक उन्हें इससे वंचित रखा जा रहा है। संगठन का कहना है कि भूमिहीन दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोग आर्थिक रूप से इतने कमजोर हैं कि उनके पास खेती-बाड़ी के लिए अपनी निजी जमीन नहीं है और वे दूसरों के खेतों में मजदूरी कर अपना गुजारा करते हैं। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा संचालित भूमि वितरण योजनाओं का लाभ इन वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचना अत्यंत आवश्यक है।

रैली में शामिल प्रतिभागियों ने बताया कि उन्होंने पूर्व में भी कई बार स्थानीय प्रशासन को अपनी समस्याओं से अवगत कराया है, लेकिन उनकी मांगों पर अभी तक कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकला है। इसी कारणवश संगठन ने सोमवार को एक व्यापक जन-जागरूकता रैली निकालकर प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करने का निर्णय लिया। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंची, जहां संगठन के पदाधिकारियों और प्रतिनिधिमंडल ने अपर कलेक्टर पीके पांडे से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने अपर कलेक्टर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें भूमिहीनों को कृषि भूमि आवंटित करने संबंधी सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं और मांगों को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है।

ज्ञापन प्राप्त करने के बाद अपर कलेक्टर पीके पांडे ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया और उनकी समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुना। उन्होंने संगठन के प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया कि ज्ञापन में उठाई गई मांगों की गंभीरता से समीक्षा की जाएगी और नियमानुसार जो भी उचित कार्रवाई संभव होगी, वह की जाएगी। अपर कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि भूमि आवंटन एक संवेदनशील और वैधानिक प्रक्रिया है, जिसमें पात्रता की जांच और राजस्व अभिलेखों का सत्यापन अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि प्रशासन किसी भी पात्र व्यक्ति को उसके वैध अधिकार से वंचित नहीं रखेगा और साथ ही अपात्र व्यक्तियों को लाभ देने में भी कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। प्रशासन की ओर से दिए गए इस आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारी शांत हुए और रैली का समापन हुआ।

मऊगंज जिले में भूमिहीन वर्गों के लिए कृषि भूमि की मांग कोई नया मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक लंबे समय से चली आ रही सामाजिक और आर्थिक समस्या है। मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के भूमिहीन किसानों को कृषि भूमि उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न सरकारी योजनाएं समय-समय पर लागू की जाती रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले वंचित वर्गों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें स्थायी आजीविका का साधन प्रदान करना है। हालांकि, जमीनी स्तर पर कई बार पात्र हितग्राहियों की पहचान, भूमि की उपलब्धता और राजस्व रिकॉर्ड में विसंगतियों के कारण लाभार्थियों को समय पर भूमि नहीं मिल पाती है। दलित आदिवासी पिछड़ा वर्ग महासभा की यह रैली इन्हीं व्यवहारिक बाधाओं और देरी के खिलाफ एक संगठित प्रयास है।

संगठन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन द्वारा ज्ञापन में उठाई गई मांगों पर निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है, तो वे भविष्य में और भी उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव बनाना नहीं, बल्कि संविधान और कानून द्वारा प्रदत्त अधिकारों को प्राप्त करना है। रैली में शामिल महिलाओं और बुजुर्गों ने भी अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि भूमि के अभाव में उनके परिवारों की स्थिति अत्यंत दयनीय है और वे सम्मानजनक जीवन जीने में असमर्थ हैं।

इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि मऊगंज में भूमिहीन वर्गों के बीच असंतोष व्याप्त है और वे अब अपने अधिकारों के लिए मुखर होकर सामने आए हैं। अपर कलेक्टर पीके पांडे द्वारा दिए गए आश्वासन को एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, लेकिन संगठन और प्रभावित परिवारों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि प्रशासन वास्तव में कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ उनकी मांगों पर अमल करता है। भूमि सुधार और भूमि वितरण जैसे मुद्दे न केवल आर्थिक विकास से जुड़े हैं, बल्कि ये सामाजिक न्याय और समानता के मूल सिद्धांतों से भी सीधे तौर पर संबंधित हैं। इसलिए, मऊगंज प्रशासन के समक्ष यह चुनौती है कि वह नियमों का पालन करते हुए वास्तविक जरूरतमंदों तक सरकारी लाभों को प्राथमिकता के आधार पर पहुंचाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार के विरोध प्रदर्शनों की नौबत न आए और जिले में सामाजिक सद्भाव बना रहे।