एआईएसएफ का 22वां जिला सम्मेलन: राष्ट्रीय अध्यक्ष विराज देवांग ने कहा- एनईपी 2020 के जरिए थोपा जा रहा रोजगारविहीन शिक्षा मॉडल, पाठ्यक्रम का हो रहा सांप्रदायीकरण

बेगूसराय। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) के 22वें जिला सम्मेलन का आयोजन बेगूसराय में किया गया। इस सम्मेलन में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉमरेड विराज देवांग ने बतौर मुख्य वक्ता शिरकत की और मौजूदा शिक्षा नीतियों तथा छात्रों से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। सम्मेलन को संबोधित करते हुए कॉमरेड विराज देवांग ने केंद्र सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी) की तीखी आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार लगातार छात्र समुदाय पर हमलावर है और एनईपी 2020 के माध्यम से देश भर के गरीब तथा वंचित वर्ग के छात्रों पर एक ऐसे शिक्षा मॉडल को थोपा जा रहा है जो रोजगारविहीन है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत छात्रों के पाठ्यक्रम का सांप्रदायीकरण किया जा रहा है। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक बताते हुए कहा कि इस नीति का उद्देश्य वैज्ञानिक और धर्मनिरपेक्ष शिक्षा को कमजोर करना है। कॉमरेड देवांग ने बताया कि जिस प्रकार से शिक्षा के व्यावसायीकरण और निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है, उससे गरीब परिवारों के बच्चे उच्च शिक्षा से वंचित होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों का सीधा असर आम छात्रों की जेब और उनके भविष्य पर पड़ रहा है, क्योंकि शिक्षा अब एक अधिकार न रहकर बाजार की वस्तु बनती जा रही है।
सम्मेलन के दौरान एआईएसएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यह भी रेखांकित किया कि रोजगारविहीन शिक्षा मॉडल थोपने का परिणाम यह हो रहा है कि डिग्री हासिल करने के बाद भी युवाओं को बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी क्षेत्र में रिक्त पदों पर भर्ती नहीं हो रही है और निजी क्षेत्र में भी मनमाने वेतन पर काम करवाया जा रहा है। ऐसे में एनईपी 2020 जैसे प्रावधान छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार की गारंटी देने में पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं। कॉमरेड देवांग ने उपस्थित छात्रों और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे इन जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष को तेज करें और शिक्षा के अधिकार को बचाने के लिए एकजुट हों।
बेगूसराय में आयोजित इस 22वें जिला सम्मेलन का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर छात्र समस्याओं को चिह्नित करना और संगठन को मजबूत करना था। सम्मेलन में बिहार और बेगूसराय जिले की विशिष्ट समस्याओं पर भी चर्चा हुई। हालांकि, राष्ट्रीय अध्यक्ष के भाषण का केंद्र बिंदु राष्ट्रीय शिक्षा नीति और उसके छात्रों पर पड़ रहे प्रभाव ही रहे। उन्होंने कहा कि एआईएसएफ देश भर में छात्रों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी ऐसी नीति का विरोध जारी रखेगी जो शिक्षा को सांप्रदायिक रंग देती है या गरीब छात्रों को मुख्यधारा से बाहर करती है।
सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधियों और छात्र नेताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष की बातों पर सहमति जताई और कहा कि बेगूसराय जिले में भी शिक्षा व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, शिक्षकों के रिक्त पद और छात्रवृत्ति में हो रही देरी जैसे मुद्दे स्थानीय स्तर पर छात्रों को परेशान कर रहे हैं। एआईएसएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इन स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय नीतियों के संदर्भ में देखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जब तक राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा नीति में बदलाव नहीं होगा, तब तक स्थानीय स्तर पर सुधार की उम्मीद कम ही है।
कार्यक्रम में कॉमरेड विराज देवांग ने यह भी स्पष्ट किया कि एआईएसएफ का संघर्ष केवल शिक्षा नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का भी संघर्ष है। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम का सांप्रदायीकरण समाज में भाईचारे और वैज्ञानिक सोच को खत्म करने की साजिश है, जिसे हर हाल में रोका जाना चाहिए। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने छात्रों से आह्वान किया कि वे पुस्तकों और पाठ्यक्रमों में हो रहे बदलावों पर पैनी नजर रखें और तथ्यों के आधार पर प्रतिरोध करें।
इस 22वें जिला सम्मेलन ने बेगूसराय में छात्र राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों को एक नई दिशा देने का प्रयास किया है। एआईएसएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष की उपस्थिति और उनके स्पष्ट रुख ने स्थानीय कार्यकर्ताओं में उत्साह भरा है। सम्मेलन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि छात्र संगठन मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार है और गरीब-वंचित छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर आवाज उठाता रहेगा। कार्यक्रम का समापन संगठनात्मक निर्णयों और भविष्य की कार्ययोजना की घोषणा के साथ हुआ, जिसमें एनईपी 2020 के खिलाफ जारी अभियान को और तीव्र करने पर विशेष जोर दिया गया।

