Mon, 05 Oct 202610:20 PM
Mon, Oct 5, 2026Updated 10:20 PM IST
होम › देश

मेघालय में सड़क और परिवहन सुविधाओं के अभाव की दर्दनाक तस्वीर: बीमार शिशु को गोद में लेकर तीन घंटे पैदल चली मां, अस्पताल पहुंचने से पहले हुई मासूम की मौत

WhatsAppFacebookX

नई दिल्ली/शिलांग। मेघालय के वेस्ट खासी हिल्स जिले से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने राज्य की बुनियादी स्वास्थ्य और परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के डोमक्यरकोह गांव में शुक्रवार को एक बीमार शिशु की उसकी मां की गोद में ही मौत हो गई। बच्चे की जान बचाने के लिए उसकी मां ने हर संभव प्रयास किया और वह अपने बीमार बच्चे को गोद में लेकर करीब तीन घंटे तक पैदल चलती रही। लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही मासूम ने दम तोड़ दिया। यह पूरा मामला क्षेत्र में सड़क संपर्क और चिकित्सा परिवहन सुविधाओं के भारी अभाव का परिणाम बताया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना मेघालय के वेस्ट खासी हिल्स जिले के अंतर्गत आने वाले डोमक्यरकोह गांव की है। शुक्रवार को गांव में एक शिशु अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। बच्चे की हालत तेजी से बिगड़ती देख उसके परिजन उसे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल ले जाने के लिए तैयार हुए। हालांकि, गांव से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी तय करके अस्पताल तक पहुंचने के लिए उन्हें कोई भी वाहन उपलब्ध नहीं हो सका। इसका मुख्य कारण यह था कि उक्त क्षेत्र में सड़क संपर्क की स्थिति अत्यंत दयनीय है, जिसके चलते वहां वाहनों का आवागमन संभव नहीं हो पाता है।

जब बच्चे को अस्पताल ले जाने के लिए कोई गाड़ी नहीं मिली, तो उसकी मां ने अपने मासूम की जान बचाने का अंतिम विकल्प चुना। उसने अपने बीमार बच्चे को गोद में उठाया और अस्पताल की ओर पैदल ही निकल पड़ी। मां ने अपनी पूरी ताकत लगाकर करीब तीन घंटे तक अपने बच्चे को गोद में लिए पैदल यात्रा की। रास्ते की कठिनाइयों और सड़क न होने की वजह से यह सफर और भी अधिक मुश्किल भरा था। लेकिन इतनी मशक्कत और तीन घंटे की लंबी पैदल यात्रा के बावजूद, मां अपने बच्चे की जान नहीं बचा सकी। अस्पताल पहुंचने से पहले ही मासूम शिशु ने अपनी मां की गोद में ही दम तोड़ दिया।

यह घटना मेघालय के सुदूर ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे की कमी को स्पष्ट रूप से उजागर करती है। वेस्ट खासी हिल्स जैसे जिलों में कई गांव आज भी मुख्य सड़क मार्गों से कटे हुए हैं। सड़क संपर्क न होने के कारण इन क्षेत्रों में एम्बुलेंस या अन्य चिकित्सा वाहनों का पहुंचना लगभग असंभव हो जाता है। ऐसे में जब कोई आपातकालीन चिकित्सा स्थिति उत्पन्न होती है, तो ग्रामीणों को मरीजों को कंधे पर लादकर या गोद में लेकर कई-कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। कई बार इस देरी के कारण मरीजों की जान चली जाती है, जैसा कि डोमक्यरकोह गांव में शुक्रवार को हुआ।

10 किलोमीटर की दूरी जो सामान्य सड़क मार्ग पर वाहन द्वारा कुछ ही मिनटों में तय की जा सकती है, सड़क के अभाव में उसमें तीन घंटे का समय लग गया और वह भी पैदल। यह स्थिति केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्वोत्तर भारत के कई पहाड़ी और दुर्गम राज्यों में ऐसी समस्याएं आम हैं। स्वास्थ्य सेवाओं तक समय पर पहुंच ना हो पाना ग्रामीण जनता के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञ मानते हैं कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और गांवों के बीच सड़क संपर्क स्थापित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

इस घटना ने एक बार फिर से इस बात पर बहस छेड़ दी है कि क्या विकास योजनाओं का लाभ देश के सबसे पिछड़े और सुदूर इलाकों तक वास्तव में पहुंच रहा है या नहीं। डोमक्यरकोह गांव की इस मां का संघर्ष उन हजारों ग्रामीण महिलाओं का प्रतिनिधित्व करता है, जिन्हें बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अपने परिजनों की जान गंवानी पड़ती है। फिलहाल, इस मामले में स्थानीय प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि इस घटना के बाद क्षेत्र में सड़क निर्माण या चिकित्सा परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे या नहीं।

उल्लेखनीय है कि मेघालय सरकार और केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण सड़क संपर्क और स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जाती हैं। इसके बावजूद, वेस्ट खासी हिल्स जैसे जिलों में जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। शुक्रवार को हुई इस दुखद घटना ने साबित कर दिया है कि नीतियों और उनके क्रियान्वयन के बीच अभी भी बहुत बड़ा अंतर है। एक मां का अपने बीमार बच्चे को गोद में लेकर तीन घंटे तक पैदल चलना और फिर उसकी आंखों के सामने मासूम का दम तोड़ देना, किसी भी सभ्य समाज और प्रशासन के लिए शर्मसार करने वाली घटना है।