सागर जिले में मानसून सीजन खत्म: सामान्य से 11.6 इंच कम हुई बारिश, देवरी में सबसे ज्यादा और शाहगढ़ में सबसे कम वर्षा दर्ज

सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में एक जून से शुरू हुआ बारिश का मानसून सीजन 30 सितंबर को आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है। इस वर्ष जिले में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पूरे मानसून सीजन के दौरान जिले में 933.5 मिलीमीटर यानी 36.8 इंच औसत बारिश हुई है। जबकि सागर जिले में सामान्य वर्षा का आंकड़ा 1230.5 मिलीमीटर यानी 48.4 इंच निर्धारित है। इस प्रकार इस बार जिले में सामान्य बारिश की तुलना में 11.6 इंच कम पानी गिरा है। यह लगातार दूसरा साल है, जब सागर जिले में सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा नहीं हो पाया है। पिछले वर्ष जिले में औसतन 45.6 इंच बारिश दर्ज की गई थी। यदि इस वर्ष की तुलना पिछले वर्ष से की जाए तो इस बार 8.8 इंच कम वर्षा हुई है।
मानसून सीजन के दौरान जिले के विभिन्न विकासखंडों में बारिश के आंकड़ों में भारी अंतर देखने को मिला है। देवरी विकासखंड में इस सीजन में सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई। यहां कुल 1320.9 मिलीमीटर वर्षा हुई। इसके विपरीत, शाहगढ़ विकासखंड में सबसे कम बारिश हुई, जहां मात्र 536.2 मिलीमीटर पानी गिरा। अन्य विकासखंडों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सागर शहर में 835.5 मिलीमीटर, जैसीनगर में 943 मिलीमीटर, राहतगढ़ में 917.6 मिलीमीटर, बीना में 929.7 मिलीमीटर, खुरई में 1027.2 मिलीमीटर, मालथौन में 1129.3 मिलीमीटर, बंडा में 878.7 मिलीमीटर, गढ़ाकोटा में 929.6 मिलीमीटर, रहली में 1077.6 मिलीमीटर और केसली में 676.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जिले के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश हुई, जबकि कई क्षेत्रों में वर्षा का भारी अभाव रहा।
बारिश का सीजन खत्म होने के बाद अब सागर जिले में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। आसमान साफ होने लगा है और दिन के समय तेज धूप निकल रही है, जिससे लोगों को गर्मी का अहसास हो रहा है। हालांकि, शाम होते ही मौसम में ठंडक बढ़ जाती है। रात के समय चलने वाली हवाओं में भी अब ठंडक महसूस की जाने लगी है, जो सर्दियों के आगमन के संकेत दे रही है। फिलहाल सागर जिले में अधिकतम तापमान करीब 32.9 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21.2 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। दिन और रात के तापमान में इस अंतर ने लोगों के रहन-सहन और दिनचर्या को प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मानसून की वापसी रेखा वर्तमान में राजस्थान और पंजाब के कई जिलों से गुजर रही है और यह मध्य प्रदेश के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र तक पहुंच गई है। विभाग का अनुमान है कि 3 अक्टूबर के बाद प्रदेश में बारिश के बादल पूरी तरह छंटने लगेंगे। फिलहाल गरज-चमक के साथ बारिश होने की कोई संभावना नहीं है।
सागर जिले में लगातार दूसरे वर्ष सामान्य से कम बारिश होने से कृषि क्षेत्र और जल संसाधनों पर असर पड़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम बारिश से रबी फसलों की बुवाई और भूजल स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। किसानों को सिंचाई के वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। जिले के जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य वर्षों की तुलना में कम रहने की उम्मीद है, जिससे आने वाले महीनों में पेयजल और सिंचाई की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा किसानों को कम पानी में उगने वाली फसलों की ओर रुख करने की सलाह दी जा रही है। साथ ही, वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण के उपायों पर जोर दिया जा रहा है ताकि भविष्य में जल संकट की स्थिति से निपटा जा सके। सागर जिले में मानसून की इस अपर्याप्त बारिश ने एक बार फिर जलवायु परिवर्तन और अनियमित मौसम पैटर्न की चिंताओं को बल दिया है।




