Mon, 05 Oct 202611:07 PM
Mon, Oct 5, 2026Updated 11:07 PM IST
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मानसा: किसानों ने 13 सूत्रीय मांगों को लेकर डीसी कार्यालय का किया घेराव, लैंड पूलिंग नीति और कर्ज माफी पर जताया आक्रोश

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पंजाब के मानसा जिले में भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के आह्वान पर राज्यव्यापी प्रदर्शन के तहत बड़ी संख्या में किसान सड़कों पर उतरे। किसानों ने अपनी 13 सूत्रीय मांगों को लेकर डिप्टी कमिश्नर (डीसी) कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और पंजाब सरकार की विभिन्न नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों ने विशेष रूप से लैंड पूलिंग नीति और कर्ज माफी के मुद्दे पर अपना आक्रोश व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे प्रशासनिक कामकाज को पूरी तरह ठप कर देंगे।

भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) द्वारा बुलाए गए इस राज्यव्यापी प्रदर्शन के तहत मानसा में किसानों की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह से ही किसान विभिन्न क्षेत्रों से डीसी कार्यालय की ओर बढ़ने लगे। जब यह विशाल जनसैलाब डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के समक्ष पहुंचा, तो वहां का दृश्य पूरी तरह बदल गया। किसानों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लिए हुए थे, जिन पर सरकार विरोधी नारे और अपनी 13 सूत्रीय मांगें लिखी हुई थीं। प्रदर्शनकारी किसानों ने एक स्वर में केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों की कड़े शब्दों में निंदा की।

प्रदर्शन के दौरान किसानों के गुस्से का मुख्य केंद्र लैंड पूलिंग नीति रही। किसान संगठन का कहना है कि लैंड पूलिंग नीति के तहत किसानों की उपजाऊ जमीनों को अधिग्रहित करने या उनका उपयोग बदलने का प्रावधान है, जिससे किसानों की आजीविका पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। किसानों ने इस नीति को किसान विरोधी बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। उनका तर्क है कि भूमि ही किसान का एकमात्र सहारा है और ऐसी नीतियां उन्हें खेती से बेदखल करने का जरिया बन सकती हैं।

इसके अलावा, कर्ज माफी का मुद्दा भी इस प्रदर्शन में प्रमुखता से उठाया गया। किसानों ने स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार द्वारा किए गए वादों के बावजूद उन्हें कर्ज से राहत नहीं मिल पाई है। बढ़ती महंगाई, खाद-बीज की बढ़ती कीमतों और फसलों के उचित मूल्य न मिलने के कारण किसान पहले से ही गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे में कर्ज माफी उनके लिए जीवन और मृत्यु का सवाल बन चुकी है। किसानों ने मांग की कि बिना किसी शर्त के सभी वर्ग के किसानों का पूरा कर्ज माफ किया जाए ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।

भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कुल 13 सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन भी तैयार किया, जिसे डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के अधिकारियों को सौंपा गया। हालांकि, स्रोत जानकारी में इन 13 मांगों की पूरी सूची का विस्तृत उल्लेख नहीं है, लेकिन लैंड पूलिंग नीति की वापसी और कर्ज माफी इनमें सबसे प्रमुख मांगें बताई जा रही हैं। किसान नेताओं ने प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया कि ये मांगें केवल औपचारिकता नहीं हैं, बल्कि किसानों के अस्तित्व से जुड़ा मसला है।

प्रदर्शन के दौरान किसानों का मिजाज काफी आक्रामक देखा गया। नारेबाजी करते हुए किसानों ने प्रशासन को खुली चेतावनी दी कि अगर उनकी 13 सूत्रीय मांगों पर जल्द से जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। किसानों ने सीधे तौर पर कहा कि वे जिला प्रशासन के कामकाज को पूरी तरह से ठप कर देंगे। इस चेतावनी ने जिला प्रशासन के लिए चिंता का विषय खड़ा कर दिया है, क्योंकि किसान संगठन अपने पूर्व के आंदोलनों में दिखा चुका है कि वह अपने फैसलों पर अडिग रहता है।

यह प्रदर्शन केवल मानसा जिले तक सीमित नहीं था, बल्कि भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के आह्वान पर पूरे पंजाब में राज्यव्यापी स्तर पर आयोजित किया गया था। मानसा में किसानों की बड़ी संख्या यह दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर किसानों में सरकार की नीतियों को लेकर कितना असंतोष व्याप्त है। पिछले लंबे समय से किसान विभिन्न मुद्दों को लेकर संघर्षरत हैं और यह प्रदर्शन उसी श्रृंखला का एक हिस्सा है।

डीसी कार्यालय के घेराव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद रखी गई। पुलिस बल मौके पर तैनात था ताकि स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो। हालांकि, किसानों ने शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के कारण डीसी कार्यालय के आसपास कुछ समय के लिए यातायात और सामान्य गतिविधियां प्रभावित रहीं। किसानों ने सरकार से अपील की है कि वह किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझे और लैंड पूलिंग नीति तथा कर्ज माफी जैसे अहम मुद्दों पर तुरंत सकारात्मक कदम उठाए।

अंततः, मानसा में किसानों का यह घेराव प्रदर्शन केंद्र और पंजाब सरकार दोनों के लिए एक स्पष्ट संदेश है। भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) ने यह साफ कर दिया है कि जब तक उनकी 13 सूत्रीय मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका संघर्ष जारी रहेगा। प्रशासनिक कामकाज ठप करने की चेतावनी के बाद अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है और किसानों के आक्रोश को शांत करने के लिए क्या कदम उठाती है।