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Tue, Oct 6, 2026Updated 12:12 AM IST
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मानसा: सीएम भगवंत मान की ‘लोक मिलनी’ से पहले किसान हिरासत में, सरदूलगढ़ में पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोका

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मानसा। पंजाब के मानसा जिले के सरदूलगढ़ विधानसभा क्षेत्र के गांव फत्ता मालोका में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के प्रस्तावित ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम से ठीक पहले तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। कार्यक्रम में शामिल होने और अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री से सवाल करने जा रहे भारतीय किसान यूनियन (एकता आजाद) के कार्यकर्ताओं को पुलिस प्रशासन ने भारी बैरिकेडिंग लगाकर रास्ते में ही रोक दिया और उन्हें हिरासत में ले लिया गया। इस कार्रवाई के कारण कार्यक्रम स्थल के आसपास का माहौल गरमा गया और किसान संगठन व पुलिस प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारतीय किसान यूनियन (एकता आजाद) के कार्यकर्ता और किसान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा आयोजित ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम में शिरकत करने वाले थे। इन किसानों का उद्देश्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री से सीधे संवाद स्थापित करना और अपने लंबित मुद्दों तथा मांगों को उनके समक्ष रखना था। हालांकि, सुरक्षा और कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए पुलिस प्रशासन ने पहले से ही कार्यक्रम स्थल की ओर जाने वाले मार्गों पर कड़ी बैरिकेडिंग कर रखी थी। जैसे ही किसानों का दल निर्धारित रास्ते से कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़ने लगा, पुलिस बल ने उन्हें घेर लिया और आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद पुलिस ने एहतियातन कार्रवाई करते हुए सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया ताकि कार्यक्रम में किसी प्रकार की बाधा या अप्रिय घटना न हो सके।

इस घटनाक्रम के पीछे एक विशिष्ट प्रशासनिक मामला भी सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिरासत में लिए गए कुछ किसानों और कार्यकर्ताओं का संबंध चोरी हुए ट्रैक्टर-ट्रॉली के एक मामले से भी जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ये व्यक्ति बॉर्डर पर चोरी हुई ट्रैक्टर-ट्रॉली का हिसाब मांगने के सिलसिले में भी अधिकारियों से मिलना चाहते थे। यह मामला स्थानीय स्तर पर काफी संवेदनशील माना जा रहा है और किसान संगठन इसे अपनी प्रमुख मांगों में शामिल करते आए हैं। पुलिस प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई को इस संदर्भ में भी देखा जा रहा है, क्योंकि ‘लोक मिलनी’ जैसे जनसंपर्क कार्यक्रमों में इस तरह के विषयों पर तीखी प्रतिक्रिया या विरोध प्रदर्शन की आशंका बनी रहती है।

गांव फत्ता मालोका में हुई इस घटना ने सरदूलगढ़ हल्के में राजनीतिक और सामाजिक तनाव को स्पष्ट रूप से उजागर किया है। मुख्यमंत्री की ‘लोक मिलनी’ पहल का मूल उद्देश्य आम जनता और सरकार के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है, लेकिन इस कार्यक्रम से पूर्व ही किसानों की हिरासत ने इस पहल की व्यावहारिक चुनौतियों को रेखांकित किया है। भारतीय किसान यूनियन (एकता आजाद) प्रदेश में किसानों के मुद्दों को लेकर मुखर रही है और संगठन समय-समय पर सरकार से जवाबदेही की मांग करता रहा है। ऐसे में, जब संगठन के सदस्यों को ही कार्यक्रम में पहुंचने से रोका गया, तो स्वाभाविक रूप से संगठन और उसके समर्थकों में रोष व्याप्त हो गया।

पुलिस प्रशासन का पक्ष अभी तक विस्तार से सार्वजनिक नहीं हुआ है, लेकिन आमतौर पर ऐसे कार्यक्रमों में सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाता है। पुलिस का मानना होता है कि पूर्व नियोजित विरोध प्रदर्शन या नारेबाजी से कार्यक्रम का शांतिपूर्ण संचालन बाधित हो सकता है और अन्य आम नागरिकों को असुविधा हो सकती है। इसलिए, संभावित अव्यवस्था को रोकने के लिए एहतियातन कदम उठाए जाते हैं। फत्ता मालोका में भी पुलिस ने इसी तर्क के आधार पर बैरिकेडिंग की और किसानों को हिरासत में लिया। हालांकि, किसान संगठनों का मत है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखने का अधिकार मौलिक है और उसे रोका जाना उचित नहीं है।

मानसा जिला प्रशासन के लिए यह घटना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक परीक्षा है। एक ओर मुख्यमंत्री का जनसंपर्क अभियान सुचारू रूप से चलाना है, वहीं दूसरी ओर किसानों की वैध शिकायतों और असंतोष को संबोधित करना भी आवश्यक है। चोरी हुई ट्रैक्टर-ट्रॉली का हिसाब मांगने वाला मुद्दा यदि वास्तव में इस टकराव का केंद्र बिंदु है, तो यह दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर कानून व्यवस्था और संपत्ति सुरक्षा से जुड़े मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं। किसानों की हिरासत ने अस्थायी रूप से स्थिति को शांत तो कर दिया होगा, लेकिन मूल समस्याओं का समाधान न होने पर भविष्य में ऐसे टकराव की पुनरावृत्ति की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

फिलहाल, हिरासत में लिए गए भारतीय किसान यूनियन (एकता आजाद) के कार्यकर्ताओं की स्थिति और उन पर आगे की कार्रवाई के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। साथ ही, यह भी पुष्टि नहीं हो पाई है कि क्या मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को इस टकराव की जानकारी दी गई है या ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम निर्धारित समय पर शांतिपूर्वक संपन्न हुआ या नहीं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय सूत्रों के आधार पर ही इस घटनाक्रम की पुष्टि की जा रही है। आगामी अपडेट और अधिकारियों की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है, जिससे स्थिति की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।