Mon, 05 Oct 202611:07 PM
Mon, Oct 5, 2026Updated 11:07 PM IST
होम › पंजाब

बठिंडा में परगट सिंह के पीपीसीसी अध्यक्ष बनने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बांटे लड्डू, लेकिन सिटी प्रेसिडेंट का ऑफिस मिला बंद; गुटबाजी की चिंगारी फिर सुलगने के संकेत

WhatsAppFacebookX

बठिंडा। पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीपीसीसी) के नए अध्यक्ष के रूप में परगट सिंह की नियुक्ति के बाद बठिंडा जिले में पार्टी के भीतर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। एक तरफ जहां कांग्रेस के विभिन्न गुटों और कार्यकर्ताओं ने इस नियुक्ति पर भारी उत्साह दिखाते हुए जश्न मनाया, वहीं दूसरी तरफ शहर में पार्टी के सिटी प्रेसिडेंट का कार्यालय बंद मिलने से आंतरिक खींचतान और गुटबाजी की पुरानी तस्वीरें एक बार फिर सामने आ गई हैं। यह घटनाक्रम सोमवार को उस समय सामने आया जब परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस की कमान सौंपे जाने की औपचारिक घोषणा हुई।

परगट सिंह के पीपीसीसी अध्यक्ष बनाए जाने की खबर जैसे ही बठिंडा पहुंची, कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। पार्टी के विभिन्न गुटों से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर अपनी खुशी का इजहार किया। इस मौके पर ढोल-नगाड़ों की थाप पर जश्न मनाया गया। कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाईं और विशेष रूप से लड्डू बांटकर इस नियुक्ति का स्वागत किया। बधाई देने का यह सिलसिला देर तक चलता रहा। हालांकि, सूत्रों के अनुसार जश्न मनाने वाले इन गुटों में वही धड़े शामिल थे जो पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर अपने-अपने वर्चस्व को लेकर सक्रिय रहे हैं। परगट सिंह की ताजपोशी को इन गुटों ने अपनी राजनीतिक जीत के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।

लेकिन इस जश्न के बीच एक और घटनाक्रम ने कांग्रेस की आंतरिक राजनीति की असलियत को बेनकाब कर दिया। जब पार्टी कार्यकर्ता और नेता जश्न मना रहे थे, उसी दौरान बठिंडा शहर के कांग्रेस सिटी प्रेसिडेंट का कार्यालय बंद पाया गया। यह स्थिति पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी किचकिच की ओर स्पष्ट इशारा करती है। कार्यालय का बंद होना इस बात का प्रतीक माना जा रहा है कि प्रदेश स्तर पर नेतृत्व परिवर्तन की खुशी के बावजूद, जमीनी स्तर पर संगठनात्मक तालमेल की कमी और गुटों के बीच का टकराव अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। सिटी प्रेसिडेंट के कार्यालय का बंद मिलना उन कार्यकर्ताओं के लिए निराशाजनक रहा जो नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद संगठन में नई ऊर्जा और सक्रियता की उम्मीद लगाए बैठे थे।

बठिंडा कांग्रेस की राजनीति में गुटबाजी कोई नई बात नहीं है। पिछले कई वर्षों से पार्टी के भीतर विभिन्न गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई चलती रही है। परगट सिंह के पीपीसीसी अध्यक्ष बनने से पहले भी बठिंडा में कांग्रेस की आंतरिक राजनीति काफी उथल-पुथल भरी रही है। अब नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद यह देखा जाना बाकी है कि क्या वे बठिंडा सहित पूरे पंजाब में पार्टी के बिखरे हुए गुटों को एकजुट कर पाएंगे या फिर मौजूदा हालात और अधिक जटिल होंगे। लड्डू बांटकर बधाई देने वाले गुटों के बीच आपसी समन्वय की कमी और सिटी प्रेसिडेंट कार्यालय का बंद रहना इस बात की पुष्टि करता है कि संगठनात्मक चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी राज्य में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का बदलना हमेशा जिला और शहर स्तर पर सत्ता के समीकरणों को प्रभावित करता है। बठिंडा में भी परगट सिंह की नियुक्ति के बाद यह माना जा रहा है कि जिला और शहर स्तर पर पार्टी के पदाधिकारियों में फेरबदल हो सकता है। यही कारण है कि विभिन्न गुट अभी से अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने और नए प्रदेश नेतृत्व के करीब पहुंचने की होड़ में लग गए हैं। जश्न के दौरान लड्डू बांटना और ढोल-नगाड़े बजाना इसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसके जरिए कार्यकर्ता नए अध्यक्ष को अपनी वफादारी का संदेश देना चाहते हैं।

हालांकि, सिटी प्रेसिडेंट के कार्यालय का बंद मिलना इस बात का संकेत है कि सभी गुट इस नियुक्ति से पूरी तरह संतुष्ट या संगठनात्मक रूप से तैयार नहीं हैं। कार्यालय बंद होने के पीछे के ठोस कारणों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इसे पार्टी के भीतर चल रही अनदेखी और असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है। अगर नया प्रदेश नेतृत्व समय रहते इन मुद्दों का समाधान नहीं करता है, तो आने वाले दिनों में बठिंडा में कांग्रेस की आंतरिक खींचतान और तेज हो सकती है।

फिलहाल, बठिंडा कांग्रेस में परगट सिंह के पीपीसीसी अध्यक्ष बनने के बाद का माहौल उत्सव और अनिश्चितता दोनों से भरा हुआ है। एक तरफ ढोल-नगाड़ों की गूंज और लड्डुओं की मिठास है, तो दूसरी तरफ बंद पड़े कार्यालय के ताले और गुटों के बीच की खाई है। पार्टी के आम कार्यकर्ताओं की नजर अब इस बात पर टिकी है कि नया प्रदेश नेतृत्व बठिंडा में संगठन को मजबूत करने और गुटबाजी को खत्म करने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है। आने वाले दिनों में परगट सिंह द्वारा बठिंडा का दौरा किए जाने और स्थानीय नेताओं के साथ बैठकें करने की संभावना जताई जा रही है, जिसके बाद ही पार्टी की आंतरिक राजनीति की वास्तविक दिशा स्पष्ट हो सकेगी।