तरनतारन: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और लैंड पूलिंग नीति के विरोध में भाकियू एकता उगराहां का डीसी कार्यालय के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन

तरनतारन। पंजाब के तरनतारन जिले में भारतीय किसान यूनियन (एकता) उगराहां ने सोमवार को उपायुक्त कार्यालय के बाहर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार रोष प्रदर्शन और धरना दिया। संगठन के कार्यकर्ताओं और किसानों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर डीसी कार्यालय के बाहर नारेबाजी की और सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना गुस्सा व्यक्त किया। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते के विरोध, लैंड पूलिंग पॉलिसी को रद्द करने, किसानों को उनकी जमीनों के मालिकाना हक वापस देने और किसानों तथा मजदूरों की पूर्ण कर्जमाफी जैसी अहम मांगों को लेकर आयोजित किया गया था।
भाकियू एकता उगराहां के इस धरना-प्रदर्शन में तरनतारन और आसपास के क्षेत्रों से भारी संख्या में किसानों और मजदूरों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर पकड़ रखे थे, जिन पर सरकार विरोधी नारे और अपनी मांगें लिखी हुई थीं। संगठन ने साफ किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। डीसी कार्यालय के बाहर लगाए गए इस धरने के दौरान किसान नेताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें किसानों और मेहनतकश वर्ग के हितों की अनदेखी कर रही हैं, जिसके खिलाफ सड़कों पर उतरना मजबूरी बन गई है।
प्रदर्शन का सबसे प्रमुख मुद्दा भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता रहा। भाकियू एकता उगराहां ने इस समझौते का कड़ा विरोध करते हुए चेतावनी दी कि यदि यह समझौता लागू होता है तो देश के किसानों और घरेलू अर्थव्यवस्था पर इसका बेहद गंभीर और नकारात्मक असर पड़ेगा। संगठन का कहना है कि मुक्त व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में खुली छूट मिल जाएगी, जिससे देश के छोटे और सीमांत किसानों की खेती-बाड़ी पूरी तरह से बर्बाद हो सकती है। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार कॉर्पोरेट घरानों और विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए भारतीय किसानों की बलि चढ़ाने की तैयारी कर रही है, जिसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने मांग की कि भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को तुरंत वापस लिया जाए और किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने पंजाब में लागू लैंड पूलिंग पॉलिसी को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग उठाई। भाकियू एकता उगराहां ने कहा कि लैंड पूलिंग नीति के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीनों को हड़पने की साजिश रची जा रही है। संगठन का स्पष्ट मत है कि यह नीति किसानों को उनकी पुश्तैनी जमीनों से बेदखल करने का एक जरिया है। उन्होंने मांग की कि इस नीति को पूरी तरह से खत्म किया जाए ताकि किसानों की जमीनें सुरक्षित रह सकें। किसानों ने कहा कि विकास के नाम पर खेती योग्य भूमि का अधिग्रहण करना किसानों के साथ नाइंसाफी है और वे अपनी जमीनों की रक्षा के लिए हर स्तर पर लड़ने को तैयार हैं।
जमीनों के मालिकाना हक को लेकर भी संगठन ने आवाज बुलंद की। भाकियू एकता उगराहां ने मांग की कि जिन किसानों की जमीनें विभिन्न सरकारी योजनाओं या नीतियों के तहत उनसे ली गई हैं या जिन पर उनका अधिकार छीना गया है, उन्हें तुरंत किसानों को वापस किया जाए। संगठन ने जोर देकर कहा कि किसानों को उनकी जमीनों का पूर्ण मालिकाना हक बिना किसी शर्त के लौटाया जाना चाहिए, क्योंकि जमीन ही किसान की आजीविका और उसके अस्तित्व का आधार है।
धरना-प्रदर्शन के दौरान किसानों के साथ-साथ मजदूर वर्ग की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया। भाकियू एकता उगराहां ने किसानों और मजदूरों की पूर्ण कर्जमाफी की मांग की। संगठन ने कहा कि बढ़ती महंगाई, खेती की बढ़ती लागत और कम होते मुनाफे के कारण किसान और मजदूर भारी कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। कई बार कर्ज न चुका पाने के कारण किसान आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह बिना किसी भेदभाव के सभी किसानों और मजदूरों का पूरा कर्ज माफ करे, ताकि उन्हें आर्थिक रूप से राहत मिल सके और वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।
भाकियू एकता उगराहां ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी इन मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया और उचित समय के भीतर समाधान नहीं निकाला गया, तो संगठन अपने संघर्ष को और अधिक तेज करेगा। किसान नेताओं ने ऐलान किया कि आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर आंदोलन किए जाएंगे और सरकार को किसानों व मजदूरों की ताकत का अहसास कराया जाएगा। सोमवार को तरनतारन उपायुक्त कार्यालय के बाहर हुए इस जोरदार प्रदर्शन से प्रशासनिक अधिकारियों के सामने किसानों की मांगें रखी गईं। हालांकि, प्रशासन की ओर से इस संबंध में क्या जवाब दिया गया या कोई आश्वासन मिला या नहीं, इसकी जानकारी स्रोत सामग्री में उपलब्ध नहीं है। संगठन ने अपनी मांगों पर अड़े रहने और संघर्ष जारी रखने का निर्णय लिया है।

