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Mon, Oct 5, 2026Updated 11:08 PM IST
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CEC ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग: RMPI और CPI(ML) लिबरेशन 7 अक्टूबर को तरनतारन में करेंगे विरोध प्रदर्शन

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तरनतारन। वंदे भारत न्यूज़। पंजाब के तरनतारन जिले में आगामी सात अक्टूबर को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। रिवोल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (RMPI) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन, जिसे संक्षेप में CPI(ML) लिबरेशन के नाम से जाना जाता है, ने संयुक्त रूप से तरनतारन जिला मुख्यालय पर एक बड़े विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। इन दोनों वामपंथी दलों द्वारा आयोजित किए जा रहे इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य देश के वर्तमान चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से तुरंत बर्खास्त करने और इसके साथ ही उन्हें गिरफ्तार करने की मांग को लेकर केंद्र सरकार तथा निर्वाचन आयोग पर दबाव बनाना है।

इस संयुक्त विरोध प्रदर्शन की जानकारी देते हुए पार्टी के राज्य सेक्रेटेरिएट सदस्य दर्शन नाहर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सात अक्टूबर को तरनतारन जिला मुख्यालय पर यह विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। दर्शन नाहर ने अपनी बात रखते हुए चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार की तत्काल बर्खास्तगी की मांग को बेहद गंभीरता से उठाया है। उन्होंने यह भी मांग की है कि बर्खास्तगी के बाद ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार भी किया जाना चाहिए। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, CEC ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करने या उनकी गिरफ्तारी की मांग के पीछे के विशिष्ट कारणों या किसी विशेष घटनाक्रम का विस्तृत उल्लेख अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। यह अनिश्चितता बरकरार है कि आखिर किस आधार पर या किन परिस्थितियों में दोनों पार्टियों ने चुनाव आयोग के सर्वोच्च पद पर बैठे अधिकारी के खिलाफ इतना कड़ा रुख अपनाया है।

रिवोल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (RMPI) और CPI(ML) लिबरेशन जैसे वामपंथी संगठनों का एक साथ सड़कों पर उतरना और निर्वाचन आयोग जैसे संवैधानिक संस्था के प्रमुख के खिलाफ सीधी कार्रवाई की मांग करना, पंजाब की राजनीति में एक नई हलचल पैदा करने वाला कदम माना जा रहा है। भारत में निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था है, जिसका मुख्य कार्य देश में निष्पक्ष, स्वतंत्र और शांतिपूर्ण चुनाव कराना होता है। चीफ इलेक्शन कमिश्नर इस संस्था का नेतृत्व करते हैं। ऐसे में किसी राजनीतिक दल द्वारा सीधे तौर पर CEC की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग करना एक अत्यंत असामान्य और गंभीर राजनीतिक घटनाक्रम है।

तरनतारन जिला मुख्यालय पर होने वाले इस प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं में तैयारियां शुरू हो गई हैं। राज्य सेक्रेटेरिएट सदस्य दर्शन नाहर के बयान से यह स्पष्ट होता है कि पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह से आक्रामक मूड में है और वे अपने कार्यकर्ताओं को इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जुटा रहे हैं। RMPI और CPI(ML) लिबरेशन ने हमेशा से ही जनहित और लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए निर्वाचन आयोग जैसी संस्थाओं का पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी होना अनिवार्य है।

हालांकि, मूल स्रोत में इस बात की कोई पुष्टि नहीं है कि क्या इस विरोध प्रदर्शन में अन्य विपक्षी दल या किसान संगठन भी शामिल होंगे। फिलहाल यह प्रदर्शन केवल RMPI और CPI(ML) लिबरेशन के बैनर तले ही आयोजित किया जा रहा है। इसके अलावा, चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार या केंद्रीय निर्वाचन आयोग की ओर से इन आरोपों या बर्खास्तगी की मांग पर कोई प्रतिक्रिया दी गई है या नहीं, इसकी भी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या भविष्य में निर्वाचन आयोग या संबंधित सरकारी एजेंसियां इस मांग पर कोई स्पष्टीकरण जारी करती हैं।

सात अक्टूबर को तरनतारन जिला मुख्यालय पर होने वाले इस विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल की क्या भूमिका रहेगी, इसे लेकर भी अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। आम तौर पर ऐसे राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों के दौरान जिला प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए पहले से ही तैयारियां शुरू कर देता है, ताकि कानून व्यवस्था की कोई समस्या उत्पन्न न हो।

पंजाब के तरनतारन जिले की बात करें तो यह क्षेत्र अपनी विशिष्ट राजनीतिक और सामाजिक पहचान के लिए जाना जाता है। यहां वामपंथी और किसान आंदोलनों की एक लंबी परंपरा रही है। RMPI और CPI(ML) लिबरेशन जैसे संगठनों का इस क्षेत्र में सक्रिय होना और निर्वाचन आयोग के सर्वोच्च अधिकारी के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलना, स्थानीय राजनीति में एक नया आयाम जोड़ता है। दर्शन नाहर ने जिस प्रकार से CEC ज्ञानेश कुमार की तत्काल बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग को दोहराया है, उससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है।

कुल मिलाकर, सात अक्टूबर को तरनतारन में होने वाला यह विरोध प्रदर्शन राजनीतिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चूंकि इस मामले में कई तथ्य अभी स्पष्ट नहीं हैं, इसलिए मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें अब इस प्रदर्शन पर टिकी हुई हैं कि आखिरकार ये दोनों पार्टियां अपने दावों को समर्थन देने के लिए क्या ठोस आधार पेश करेंगी और इस विरोध का व्यापक स्तर पर क्या प्रभाव पड़ेगा। वंदे भारत न्यूज़ इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और जैसे ही इस संबंध में कोई नई जानकारी या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आएगी, उसे तत्काल प्रकाशित किया जाएगा।