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Tue, Oct 6, 2026Updated 12:12 AM IST
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धमतरी: होली के अगले दिन युवक की हत्या के मामले में आरोपी को उम्रकैद, 1 साल 4 महीने 14 दिन में आया फैसला

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धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कुरूद क्षेत्र में होली पर्व के ठीक अगले दिन हुई एक युवक की हत्या के मामले में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने इस हत्याकांड के आरोपी चेतन साहू को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। यह मामला कुरूद थाना क्षेत्र के मड़ेली गांव से जुड़ा है, जहां 15 मार्च 2025 को भाठापारा गौठान के पास हुए विवाद के दौरान वारदात को अंजाम दिया गया था। न्यायालय द्वारा घटना के मात्र 1 साल 4 महीने और 14 दिन के भीतर ही अंतिम निर्णय सुना दिया गया, जिसे स्थानीय स्तर पर त्वरित न्यायिक प्रक्रिया का उदाहरण माना जा रहा है।

अभियोजन पक्ष और पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, यह पूरा मामला होली उत्सव के बाद उत्पन्न हुए विवाद से संबंधित है। 15 मार्च 2025 को जब क्षेत्र में होली का त्योहार समाप्त हो चुका था, उसी दौरान मड़ेली गांव निवासी गजेन्द्र साहू, जिन्हें बिट्टू के नाम से भी जाना जाता था, और आरोपी चेतन साहू के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। यह विवाद भाठापारा गौठान के समीप हुआ। देखते ही देखते मौखिक बहस हिंसक रूप ले चुकी थी। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में प्रस्तुत तथ्यों में बताया कि विवाद बढ़ने पर आरोपी चेतन साहू ने लकड़ी के बत्ते से गजेन्द्र साहू उर्फ बिट्टू के सिर पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। सिर पर लगी इस गंभीर चोट के कारण पीड़ित की मौके पर ही मृत्यु हो गई थी या उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हुई, यह स्पष्ट रूप से मेडिकल रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के माध्यम से न्यायालय के समक्ष स्थापित किया गया।

इस हत्याकांड की सूचना मिलने पर कुरूद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मामला दर्ज किया था। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या का अपराध पंजीबद्ध कर आरोपी चेतन साहू को गिरफ्तार किया। विवेचना अधिकारी ने घटनास्थल से लकड़ी का बत्ता जब्त किया और गवाहों के कथन दर्ज किए। चूंकि यह वारदात होली के अगले दिन हुई थी, इसलिए क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ था। पुलिस ने यह सुनिश्चित किया कि कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने न पाए और साथ ही जांच प्रक्रिया को समय सीमा में पूर्ण किया जाए। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई।

न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से यह सिद्ध करने का प्रयास किया गया कि आरोपी ने पूर्व नियोजित तरीके से या आकस्मिक विवाद में आवेश में आकर घातक हथियार का उपयोग किया, जिसका सीधा परिणाम पीड़ित की मृत्यु के रूप में सामने आया। बचाव पक्ष की ओर से भी अपनी दलीलें रखी गईं, लेकिन न्यायालय ने सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और फोरेंसिक रिपोर्ट्स का सूक्ष्म अवलोकन किया। न्यायाधीश ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने आरोपी की अपराधिक जिम्मेदारी को संदेह से परे साबित कर दिया है। लकड़ी के बत्ते से सिर पर किए गए हमले को न्यायालय ने जानलेवा और हत्या की श्रेणी में आने वाला कृत्य माना। सबूतों की मजबूती और गवाहों की विश्वसनीयता के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराया।

सजा के बिंदु पर विचार करते हुए न्यायालय ने अपराध की गंभीरता और समाज पर इसके प्रभाव को ध्यान में रखा। होली जैसे पर्व के तुरंत बाद हुई इस वारदात ने सामाजिक सद्भाव को भी प्रभावित किया था। न्यायालय ने तय किया कि ऐसे जघन्य अपराध के लिए कठोर दंड आवश्यक है ताकि समाज में कानून का भय बना रहे और पीड़ित परिवार को न्याय की अनुभूति हो सके। इसी क्रम में आरोपी चेतन साहू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह सजा उसके शेष जीवन तक के लिए होगी।

इस मामले की सबसे उल्लेखनीय विशेषता न्यायिक प्रक्रिया की गति है। 15 मार्च 2025 को हुई इस वारदात पर न्यायालय ने 1 साल 4 महीने और 14 दिन के भीतर ही अंतिम फैसला सुरक्षित रखते हुए सजा घोषित कर दी। भारतीय न्यायिक प्रणाली में जहां अक्सर हत्या के मामलों में वर्षों तक सुनवाई चलती है, वहीं धमतरी जिला न्यायालय द्वारा इतने कम समय में गुणवत्तापूर्ण विचारण और निर्णय देना एक सराहनीय पहल है। यह त्वरित न्याय न केवल पीड़ित परिवार के लिए राहत की बात है, बल्कि यह कुरूद और धमतरी क्षेत्र के लोगों के लिए न्यायपालिका में विश्वास को भी मजबूत करता है।

फैसला सुनाए जाने के बाद कुरूद क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन सतर्क रहा। पीड़ित परिवार ने न्यायालय के इस निर्णय को स्वीकार किया है और इसे न्याय की जीत बताया है। वहीं, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि त्वरित विचारण और स्पष्ट सबूतों के आधार पर दी गई यह सजा अन्य आपराधिक मामलों में भी नजीर पेश कर सकती है। धमतरी पुलिस और अभियोजन टीम की कार्यकुशलता तथा न्यायालय की प्रतिबद्धता ने यह सुनिश्चित किया कि होली के बाद हुए इस दुखद हादसे के दोषी को समय रहते उचित दंड मिल सके। यह मामला अब छत्तीसगढ़ की आपराधिक न्याय प्रणाली में त्वरित न्याय वितरण के एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में दर्ज हो गया है।