मदन राठौड़ का गहलोत पर तीखा प्रहार: कहा- दो बार वोट चोरी करने वाले को सब चोर नजर आते, चाहते तो डोटासरा की नाक नीचे करवा देते

जयपुर। राजस्थान में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए बेहद तीखी टिप्पणी की है। राठौड़ ने गहलोत द्वारा लगाए गए वोट चोरी के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया और कहा कि जो व्यक्ति स्वयं दो बार वोट चोरी कर चुका हो, उसे दुनिया में हर कोई चोर ही नजर आता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि वे चाहते तो प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जुली या अन्य विपक्षी नेताओं की जगह कांग्रेस के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की नाक नीचे करवा सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
मदन राठौड़ ने अपने बयान में अशोक गहलोत पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि गहलोत ने राजस्थान की राजनीति में केवल एक बार नहीं, बल्कि दो बार वोट चोरी की है। उन्होंने इस संदर्भ में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का उल्लेख करते हुए कहा कि गहलोत ने बसपा का पूरा हाथी डकार लिया था। यह टिप्पणी उस ऐतिहासिक घटनाक्रम की ओर इशारा करती है जब वर्ष 2019 में बसपा के छह विधायकों ने कांग्रेस में विलय कर लिया था, जिसके बाद राजस्थान की सियासत में भारी उठापटक हुई थी। राठौड़ ने इसे वोट चोरी का स्पष्ट उदाहरण मानते हुए गहलोत की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाया है। उनका तर्क है कि जिस नेता का अपना इतिहास ऐसे विवादों से घिरा रहा हो, उसके द्वारा दूसरों पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की हेराफेरी के आरोप लगाना नैतिक रूप से उचित नहीं है।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि ‘चोर को सब चोर नजर आते हैं।’ यह मुहावरा उन्होंने गहलोत की वर्तमान मानसिकता और राजनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाने के लिए उपयोग किया। राठौड़ का कहना है कि गहलोत की टिप्पणियां उनकी अपनी असफलताओं और पिछले कृत्यों से ध्यान भटकाने का एक प्रयास मात्र हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी लोकतांत्रिक मूल्यों में पूर्ण विश्वास रखती है और किसी भी प्रकार की अनियमितता के आरोपों को गंभीरता से लेती है, लेकिन जब ये आरोप ऐसे व्यक्ति द्वारा लगाए जाएं जिनका अपना रिकॉर्ड विवादित रहा हो, तो इसकी विश्वसनीयता स्वतः ही संदिग्ध हो जाती है।
इसके साथ ही, मदन राठौड़ ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी या वे स्वयं चाहते तो डोटासरा की नाक नीचे करवा सकते थे। इस कथन के माध्यम से राठौड़ ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई या दबाव बनाने की क्षमता उनके पास है, लेकिन वे जानबूझकर संयम बरत रहे हैं। यह बयान राजस्थान की वर्तमान राजनीतिक स्थिति में बीजेपी की रणनीतिक स्थिति और आत्मविश्वास को भी रेखांकित करता है। राठौड़ ने यह स्पष्ट करने का प्रयास किया कि उनकी पार्टी प्रतिशोध की राजनीति में विश्वास नहीं करती, बल्कि तथ्यों और जनमत के आधार पर काम करती है।
राजस्थान की राजनीति में वोट चोरी और विधायकों की खरीद-फरोख्त जैसे आरोप नए नहीं हैं। पिछले कुछ वर्षों में दोनों प्रमुख पार्टियों ने एक-दूसरे पर ऐसे आरोप कई बार लगाए हैं। मदन राठौड़ का ताजा बयान इसी लंबे चल रहे राजनीतिक शीतयुद्ध की एक नई कड़ी है। गहलोत द्वारा हाल ही में दिए गए बयानों के जवाब में राठौड़ की यह प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसमें उन्होंने न केवल वर्तमान आरोपों का खंडन किया है, बल्कि अतीत के पन्नों को पलटकर गहलोत को उनके ही कर्मों की याद दिलाई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राठौड़ का यह बयान आगामी चुनावी तैयारियों और संगठन को मजबूत करने की कवायद का हिस्सा है। विपक्षी नेताओं पर हमलावर रुख अपनाने के साथ-साथ अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के लिए ऐसे बयानों का महत्वपूर्ण स्थान होता है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से अभी तक राठौड़ के इन विशिष्ट आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। देखना यह होगा कि गहलोत या कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेता इन आरोपों का किस प्रकार जवाब देते हैं और क्या यह बयानबाजी आने वाले दिनों में किसी नए राजनीतिक विवाद को जन्म देती है। फिलहाल, राजस्थान की सियासी फिजा में गर्माहट बनी हुई है और दोनों दलों के बीच शाब्दिक युद्ध जारी रहने के आसार हैं।

