Tue, 06 Oct 202610:12 AM
Tue, Oct 6, 2026Updated 10:12 AM IST
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उदयपुर: पुरोहितों की मादड़ी में अवैध अतिक्रमण से 30 फीट चौड़ी सड़क सिमटी 10 फीट में, स्थानीय निवासियों का पैदल चलना हुआ दूभर

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उदयपुर। राजस्थान के उदयपुर शहर में अवैध अतिक्रमण की समस्या एक बार फिर गंभीर रूप से सामने आई है। शहर के पुरोहितों की मादड़ी क्षेत्र में रोड नंबर चार पर किए गए बेतहाशा और अवैध अतिक्रमण के कारण स्थानीय निवासियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इस मार्ग पर अतिक्रमण का ऐसा मकड़जाल बिछ गया है कि आवागमन पूरी तरह से बाधित हो चुका है। ताजा स्थिति के अनुसार, क्षेत्र में मौजूद करीब तीस फीट चौड़ी सड़क अवैध कब्जों के चलते कई स्थानों पर सिमटकर महज दस फीट की रह गई है। सड़क की चौड़ाई में आई इस भारी कमी के कारण आमजन का इस मार्ग से पैदल निकलना भी बेहद दूभर हो गया है, जिससे लोगों को रोजमर्रा के जीवन में भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

वानदे भारत न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, उदयपुर के इस वार्ड में अतिक्रमणकारियों ने सार्वजनिक सड़क पर इस कदर कब्जा जमा लिया है कि यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। मूल रूप से तीस फीट चौड़ी बनाई गई यह सड़क अब कई हिस्सों में दस फीट तक सीमित हो चुकी है। सड़क के दोनों ओर हुए इन अवैध निर्माणों और अतिक्रमण के कारण वाहनों का आना-जाना लगभग असंभव हो गया है। यदि कोई छोटा वाहन इस रास्ते से गुजरने का प्रयास करता भी है, तो उसे भारी जद्दोजहद करनी पड़ती है। वहीं, दोपहिया वाहन चालकों और पैदल यात्रियों के लिए यह मार्ग किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है। संकरी होती सड़क के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी लगातार बना हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों में भय और असंतोष का माहौल व्याप्त है।

अतिक्रमण के कारण उत्पन्न हुई इस समस्या से केवल वाहन चालक ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के स्थानीय निवासी भी सर्वाधिक प्रभावित हैं। पुरोहितों की मादड़ी रोड नंबर चार के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि सड़क पर हुए इस अवैध कब्जे ने उनका जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। घर से बाहर निकलना, बच्चों का स्कूल जाना, बुजुर्गों का अस्पताल पहुंचना और दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बाजार जाना—ये सभी कार्य अब कठिन होते जा रहे हैं। सड़क सिमटने से पैदल चलने वालों को भी सुरक्षित रास्ता नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि दस फीट की बची हुई जगह पर भी अतिक्रमणकारियों द्वारा सामान रखे जाने या अन्य प्रकार के कब्जे होने से राहगीरों के लिए गुजरने लायक पर्याप्त स्थान नहीं बचता।

इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू आपातकालीन सेवाओं की पहुंच को लेकर है। यदि किसी स्थानीय निवासी को अचानक स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो जाए या क्षेत्र में आग लगने जैसी कोई दुर्घटना घटित हो जाए, तो एंबुलेंस या दमकल की गाड़ियों का इस संकरी सड़क से होकर गुजरना लगभग नामुमकिन है। तीस फीट की सड़क को दस फीट में सिमट जाने देने वाली इस स्थिति ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और शहरी नियोजन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिकों का मानना है कि समय रहते यदि अतिक्रमण हटाकर सड़क को उसकी मूल चौड़ाई में बहाल नहीं किया गया, तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना या हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होगा।

उदयपुर जैसे ऐतिहासिक और तेजी से विकसित हो रहे शहर में नगर निगम और प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाओ अभियान समय-समय पर चलाए जाते रहे हैं, लेकिन पुरोहितों की मादड़ी रोड नंबर चार पर अतिक्रमण का जो मकड़जाल फैला है, वह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि इस विशिष्ट वार्ड में नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई है। अवैध कब्जों के कारण सार्वजनिक संपत्ति और सड़कों का अतिक्रमण न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह आम जनता के अधिकारों का भी सीधा हनन है। स्थानीय निवासी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि जब तक प्रशासनिक स्तर पर सख्त और ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनकी समस्याएं यथावत बनी रहेंगी।

क्षेत्र के जागरूक नागरिकों की मांग है कि नगर निगम और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को इस समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए। उनका कहना है कि पुरोहितों की मादड़ी रोड नंबर चार पर किए गए सभी अवैध अतिक्रमणों को चिह्नित कर तत्काल हटाया जाए, ताकि सड़क को उसकी वास्तविक तीस फीट की चौड़ाई में पुनः बहाल किया जा सके। इसके साथ ही, भविष्य में इस मार्ग पर दोबारा अतिक्रमण न हो सके, इसके लिए नियमित निगरानी और सख्त कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करने की भी जरूरत है। फिलहाल, स्थानीय निवासियों को उम्मीद है कि मीडिया और प्रशासन के संज्ञान में यह मामला आने के बाद जल्द ही उनके वार्ड में राहत मिलेगी और वे बिना किसी भय और असुविधा के अपने मार्ग पर स्वतंत्र रूप से आवागमन कर सकेंगे। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक इस विशिष्ट मामले में कोई आधिकारिक बयान या कार्रवाई की सूचना सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।