डूंगरपुर की मोरन नदी के संरक्षण का मुद्दा दिल्ली में गूंजा: कमलेश शास्त्री ने केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात कर जल संरक्षण के अनुभव साझा किए

नई दिल्ली। राजस्थान के डूंगरपुर जिले से होकर बहने वाली मोरन नदी के संरक्षण और उसके पुनर्जीवन का महत्वपूर्ण मुद्दा अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक पहुंच गया है। डूंगरपुर के प्रसिद्ध रामकथा वाचक और समाजसेवी कमलेश भाई शास्त्री ने नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल से विशेष मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने मोरन नदी के संरक्षण, जल संचयन और पर्यावरण संवर्धन को लेकर किए जा रहे निरंतर कार्यों तथा अपने व्यापक अनुभवों को विस्तार से साझा किया। यह मुलाकात राष्ट्रीय स्तर पर नदी संरक्षण के अभियानों को और अधिक मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस मुलाकात का मुख्य अवसर नई दिल्ली में नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा द्वारा आयोजित एक विशेष संवाद कार्यक्रम था। इस संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य देश भर में नदियों की स्वच्छता, उनके संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन को लेकर चल रहे विभिन्न जन आंदोलनों और व्यक्तिगत प्रयासों पर चर्चा करना था। इसी कार्यक्रम के दौरान कमलेश भाई शास्त्री ने मोरन नदी के संरक्षण और उसके पुनर्जीवन की प्रेरणादायक गाथा को विस्तार से साझा किया। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों और प्रतिनिधियों को बताया कि किस प्रकार डूंगरपुर क्षेत्र में स्थानीय लोगों को जोड़कर नदी को सूखने से बचाने और उसमें बारहमासी जल प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिषन यानी नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा भारत सरकार की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य देश की नदियों को प्रदूषण मुक्त करना और उनके पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करना है। हालांकि इस मिशन का नाम गंगा नदी से जुड़ा है, लेकिन इसके तहत देश की अन्य छोटी-बड़ी नदियों और सहायक जल स्रोतों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दिल्ली में आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए जल संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ताओं, समाजसेवियों और विशेषज्ञों ने अपने-अपने क्षेत्रों में किए गए कार्यों की जानकारी दी। इसी कड़ी में डूंगरपुर की मोरन नदी के संदर्भ में कमलेश शास्त्री द्वारा प्रस्तुत किए गए अनुभवों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।
कमलेश भाई शास्त्री डूंगरपुर क्षेत्र में एक रामकथा वाचक के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। वे पिछले लंबे समय से धार्मिक प्रवचनों के माध्यम से समाज को जोड़ने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, जल संचयन और नदियों के पुनर्जीवन जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों पर भी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। उनकी मान्यता है कि धर्म, आस्था और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़कर ही समाज में बड़ा और स्थायी बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल के समक्ष स्पष्ट रूप से रखा कि किस प्रकार स्थानीय जनभागीदारी और धार्मिक आस्था को आधार बनाकर मोरन नदी के किनारे वृक्षारोपण, जल संचयन संरचनाओं के निर्माण और नदी की अविरल धारा को बनाए रखने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल से हुई इस विशेष मुलाकात को डूंगरपुर के जल संरक्षण अभियान के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। कमलेश शास्त्री ने मंत्री जी को मोरन नदी की वर्तमान स्थिति, उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और भविष्य में नदी के पुनर्जीवन के लिए बनाई गई विस्तृत योजनाओं के बारे में पूरी जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि नदी के संरक्षण के लिए स्थानीय ग्रामीणों, युवाओं और महिलाओं को किस तरह से संगठित किया गया है और उन्हें जल संरक्षण के प्रति कैसे जागरूक किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री ने डूंगरपुर से आए इस जन आंदोलन और कमलेश शास्त्री के इन निस्वार्थ प्रयासों की सराहना की तथा जल संरक्षण के इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया।
डूंगरपुर जिला राजस्थान के दक्षिणी भाग में स्थित है, जो मुख्य रूप से अपने पहाड़ी और ऊबड़-खाबड़ भौगोलिक स्वरूप के लिए जाना जाता है। इस क्षेत्र में पानी की उपलब्धता हमेशा से एक गंभीर चुनौती रही है। ऐसे में मोरन नदी का संरक्षण न केवल पर्यावरणीय दृष्टिकोण से बल्कि स्थानीय निवासियों की आजीविका, कृषि कार्यों और पेयजल आपूर्ति की दृष्टि से भी अत्यंत आवश्यक है। मोरन नदी इस पूरे क्षेत्र की जीवन रेखा मानी जाती है। यदि इस नदी का उचित संरक्षण और पुनर्जीवन नहीं किया गया, तो भविष्य में डूंगरपुर और उसके आसपास के इलाकों में जल संकट और अधिक गहरा सकता है। कमलेश शास्त्री ने केंद्रीय मंत्री को इसी संभावित संकट और स्थानीय परिस्थितियों की गंभीरता से अवगत कराया।
नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा द्वारा आयोजित इस संवाद कार्यक्रम ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि नदियों के संरक्षण का कार्य केवल सरकारी नीतियों या विभागों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसके लिए आम जनता, समाजसेवियों और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। कमलेश भाई शास्त्री द्वारा दिल्ली के इस मंच पर डूंगरपुर की मोरन नदी की गाथा प्रस्तुत करना इस बात का प्रमाण है कि जमीनी स्तर पर किए जा रहे प्रयासों को अब राष्ट्रीय स्तर पर भी उचित पहचान और सम्मान मिल रहा है।
इस मुलाकात और संवाद कार्यक्रम के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि मोरन नदी के पुनर्जीवन और संरक्षण के कार्यों को केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं से जोड़कर और अधिक गति प्रदान की जा सकेगी। कमलेश शास्त्री ने डूंगरपुर लौटकर इस जल संरक्षण अभियान को और अधिक व्यापक बनाने तथा अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने का संकल्प दोहराया है। उनका मानना है कि केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल से हुई यह सकारात्मक चर्चा और नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के मंच पर मिली प्रशंसा से स्थानीय कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों का मनोबल निश्चित रूप से बढ़ेगा, जिससे मोरन नदी को उसकी खोई हुई अविरल धारा और प्राचीन वैभव वापस दिलाने के प्रयासों में नई ऊर्जा का संचार होगा।

