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Tue, Oct 6, 2026Updated 11:26 AM IST
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सीकर: श्रीमाधोपुर रोडवेज के पूर्व चीफ मैनेजर को 40 हजार की रिश्वत मामले में 4 साल का कठोर कारावास, एसीबी कोर्ट ने सुनाया फैसला

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सीकर। राजस्थान के सीकर जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण और सख्त फैसला सामने आया है। सीकर की विशेष न्यायालय (एसीबी कोर्ट) ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दर्ज किए गए एक पुराने रिश्वत प्रकरण में श्रीमाधोपुर रोडवेज डिपो के पूर्व चीफ मैनेजर को दोषी करार देते हुए चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी अधिकारी पर पचास हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

मामले की पूरी जानकारी के अनुसार, यह प्रकरण चालीस हजार रुपये की रिश्वत लेने से संबंधित है। एसीबी कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई पूरी करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सार्वजनिक किया गया है। अदालत ने श्रीमाधोपुर रोडवेज के पूर्व चीफ मैनेजर प्रदीप सिंह को दोषी पाया। उल्लेखनीय है कि आरोपी प्रदीप सिंह की वर्तमान आयु बहत्तर वर्ष है। इतनी उम्र होने के बावजूद अदालत ने भ्रष्टाचार के इस गंभीर अपराध में किसी प्रकार की रियायत नहीं बरती और उन्हें चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाने का निर्णय लिया। इसके साथ ही कोर्ट ने उन पर पचास हजार रुपये का आर्थिक दंड भी अधिरोपित किया है।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने अपने कार्यकाल के दौरान प्रदीप सिंह को चालीस हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। एसीबी की ओर से इस मामले में विस्तृत जांच की गई थी। जांच पूरी होने के बाद एसीबी ने अपनी तरफ से मजबूत साक्ष्य और गवाहों के बयानों के आधार पर सीकर की विशेष अदालत में आरोप पत्र प्रस्तुत किया था। एसीबी के अधिकारियों ने अदालत में यह साबित करने का पूरा प्रयास किया कि पूर्व चीफ मैनेजर ने अपने सरकारी पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध तरीके से धन प्राप्त किया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों, प्रस्तुत किए गए दस्तावेजी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का गहनता से परीक्षण किया। लंबी सुनवाई के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ अपना मामला संदेह से परे साबित कर दिया है, जिसके बाद यह सजा सुनाई गई।

परिवहन विभाग में चीफ मैनेजर का पद अत्यंत संवेदनशील और जिम्मेदारी वाला माना जाता है। रोडवेज डिपो के चीफ मैनेजर के रूप में प्रदीप सिंह पर बसों के संचालन, कर्मचारियों के प्रबंधन, यात्री सुविधाओं और विभागीय राजस्व से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी होती थी। ऐसे में एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा रिश्वत लेना न केवल विभागीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह आम जनता के विश्वास को भी ठेस पहुंचाने वाला कृत्य है। परिवहन विभाग सीधे तौर पर आम नागरिकों की सेवाओं से जुड़ा हुआ है। जब इस तरह के विभागों के उच्च अधिकारी ही भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाते हैं, तो इसका असर पूरी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर पड़ता है।

इस ऐतिहासिक फैसले को लेकर एसीबी के अधिकारियों और कर्मचारियों में संतोष व्यक्त किया जा रहा है। एसीबी का स्पष्ट मानना है कि इस तरह के कड़े फैसलों से अन्य सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों में भ्रष्टाचार के प्रति एक सख्त संदेश जाएगा। विभाग के सूत्रों के अनुसार, एसीबी लगातार प्रदेश भर में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चला रही है और रिश्वतखोरी की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई कर रही है। सीकर कोर्ट का यह फैसला एसीबी की उसी मुहिम का एक हिस्सा है, जो यह दर्शाता है कि कानून अपना काम कर रहा है और कोई भी अधिकारी चाहे वह सेवानिवृत्त हो चुका हो या उसकी उम्र कितनी भी अधिक क्यों न हो, भ्रष्टाचार करने पर उसे सजा मिलेगी।

बहत्तर वर्षीय प्रदीप सिंह को चार साल के कठोर कारावास और पचास हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाए जाने के बाद अब उनके पास उच्च न्यायालय में इस फैसले के खिलाफ अपील करने का कानूनी विकल्प मौजूद है। हालांकि, ट्रायल कोर्ट का यह फैसला अभियोजन पक्ष यानी एसीबी की मजबूत पैरवी और सबूतों की पुख्ता कड़ी की जीत के रूप में देखा जा रहा है। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर अदालत द्वारा अतिरिक्त कार्रवाई की भी संभावना रहती है, जो कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।

राजस्थान में भ्रष्टाचार के मामलों में विशेष अदालतों द्वारा सुनाए जाने वाले फैसलों पर समाज की निगाहें हमेशा टिकी रहती हैं। सीकर एसीबी कोर्ट का यह ताजा फैसला राज्य के परिवहन विभाग और अन्य सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले अधिकारियों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है। जानकारों का कहना है कि जब तक भ्रष्टाचार के मामलों में दोषियों को समय पर और कड़ी सजा नहीं मिलेगी, तब तक सरकारी तंत्र में पारदर्शिता लाना एक चुनौती बना रहेगा। श्रीमाधोपुर रोडवेज के पूर्व चीफ मैनेजर को दी गई यह सजा इस बात का प्रमाण है कि न्यायपालिका भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है।

अदालत के इस फैसले के बाद सीकर जिले में इस मामले की काफी चर्चा हो रही है। लोगों का मानना है कि सरकारी सेवाओं में आम जनता को बिना रिश्वत दिए काम होना चाहिए और जो अधिकारी इस नियम का उल्लंघन करते हैं, उन्हें कानून के कठघरे में खड़ा होना ही चाहिए। एसीबी कोर्ट के इस निर्णय ने एक बार फिर यह स्थापित किया है कि कानून के समक्ष सभी समान हैं और भ्रष्टाचार जैसे जघन्य अपराध में उम्र या पूर्व पद का कोई विशेष संरक्षण प्राप्त नहीं है।