नालंदा में बेरोजगार युवकों को निशाना बना रहे साइबर ठग: विदेश और निजी कंपनियों में नौकरी का देते हैं लालच, मोबाइल भी कर लेते हैं हैक

नालंदा। बिहार के नालंदा जिले में रोजगार की तलाश कर रहे बेरोजगार युवकों को साइबर अपराधियों ने अपना प्रमुख निशाना बना लिया है। नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले ये साइबर फ्रॉड युवाओं को विदेशों और प्रतिष्ठित निजी कंपनियों में आकर्षक वेतन वाली नौकरी का लालच देकर उनसे ठगी कर रहे हैं। इस गंभीर समस्या को देखते हुए नालंदा के साइबर डीएसपी ऋषभ आनंद ने इस पूरे आपराधिक नेटवर्क और ठगी के तौर-तरीकों का विस्तृत खुलासा किया है। उन्होंने आम जनता और विशेष रूप से युवाओं को सतर्क रहने की कड़ी सलाह दी है।
साइबर डीएसपी ऋषभ आनंद ने बताया कि जिले में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के साथ धोखाधड़ी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। साइबर ठगों का एक सुनियोजित नेटवर्क सक्रिय है जो बेरोजगारी का फायदा उठाकर युवाओं को अपने जाल में फंसा रहा है। इन अपराधियों द्वारा अपनाया जाने वाला तरीका काफी शातिराना है। सबसे पहले ये ठग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप, टेलीग्राम या अन्य माध्यमों से युवाओं तक पहुंचते हैं। इसके बाद वे उन्हें विदेशों में या देश की बड़ी निजी कंपनियों में अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा देते हैं। आकर्षक वेतन और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर जब युवा इनके झांसे में आ जाते हैं, तो ठगी का खेल शुरू हो जाता है।
डीएसपी ऋषभ आनंद ने स्पष्ट किया कि नौकरी का लालच देकर ये साइबर अपराधी पीड़ितों से विभिन्न प्रकार के शुल्क की मांग करते हैं। रजिस्ट्रेशन चार्ज, डॉक्यूमेंटेशन फीस, वीजा प्रोसेसिंग शुल्क, मेडिकल टेस्ट के नाम पर पैसे या फिर सिक्योरिटी डिपॉजिट के बहाने युवाओं के बैंक खातों से रुपये निकलवा लिए जाते हैं। कई बार युवाओं को ऑनलाइन लिंक भेजे जाते हैं, जिन्हें क्लिक करते ही उनका मोबाइल फोन हैक हो जाता है। मोबाइल हैक होने के बाद ठगों को पीड़ित के फोन में मौजूद सभी संवेदनशील जानकारी, बैंकिंग एप्लीकेशन, ओटीपी और अन्य व्यक्तिगत डेटा तक सीधी पहुंच मिल जाती है। इसके बाद वे पीड़ित के बैंक खाते खाली कर देते हैं।
नालंदा पुलिस के साइबर सेल ने इस बात पर जोर दिया है कि यह कोई छोटी-मोटी घटना नहीं है, बल्कि एक संगठित नेटवर्क है जो विशेष रूप से उन युवाओं को टारगेट कर रहा है जो रोजगार की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं। बेरोजगारी की स्थिति में जब किसी युवा को अचानक विदेश या बड़ी कंपनी में नौकरी का प्रस्ताव मिलता है, तो वह उत्साह में आकर बिना पूरी जांच-पड़ताल किए ठगों की बातों में आ जाता है। यही कारण है कि ऐसे मामलों में युवा वर्ग सबसे अधिक शिकार हो रहा है।
साइबर डीएसपी ऋषभ आनंद ने आम जनता और युवाओं से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति या संदिग्ध लिंक पर भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति फोन, मैसेज या सोशल मीडिया के जरिए बिना किसी औपचारिक इंटरव्यू या वैध प्रक्रिया के सीधे नौकरी देने का दावा करता है, तो उसे तुरंत संदिग्ध मानें। किसी भी प्रकार की नौकरी के लिए ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने से पहले संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और दस्तावेजों की पूरी तरह से पुष्टि कर लें। उन्होंने कहा कि असली कंपनियां नौकरी देने के लिए उम्मीदवारों से कभी भी पहले पैसे नहीं मांगती हैं।
पुलिस अधिकारी ने यह भी चेतावनी दी कि यदि किसी युवा के साथ इस प्रकार की ठगी होती है, तो उसे तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए या राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए। समय रहते शिकायत दर्ज कराने से ठगी गए पैसों को वापस पाने की संभावना बढ़ जाती है और पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिलती है। नालंदा जिले की पुलिस इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने और ठगों को पकड़ने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है।
नालंदा जैसे जिलों में जहां रोजगार के अवसर सीमित हैं, वहां साइबर ठगों के लिए बेरोजगार युवा सबसे आसान शिकार बन जाते हैं। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वे इस प्रकार के साइबर अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहे हैं। डीएसपी ऋषभ आनंद ने लोगों से आग्रह किया है कि वे अपने परिवार और समाज के अन्य सदस्यों को भी इस ठगी के नए तरीकों के बारे में जानकारी दें, ताकि कोई भी युवा इन साइबर अपराधियों का शिकार न हो सके। सतर्कता ही इस प्रकार के साइबर फ्रॉड से बचने का एकमात्र और सबसे कारगर उपाय है।

