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Tue, Oct 6, 2026Updated 10:13 AM IST
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मंदसौर में अफीम नीति जल्द घोषित करने की मांग: कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने जिला अफीम अधिकारी को सौंपा ज्ञापन, 50 हजार रुपये प्रति किलो भाव तय करने की उठाई मांग

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मंदसौर। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में सोमवार को कांग्रेस पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला अफीम अधिकारी से मुलाकात कर अफीम नीति को लेकर अपनी मांगें रखीं। प्रदेश कांग्रेस सचिव परशुराम सिसोदिया के नेतृत्व में गए इस प्रतिनिधिमंडल ने जिला अफीम अधिकारी अतनु चटर्जी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से नारकोटिक्स कमिश्नर से यह मांग की गई है कि अफीम नीति को जल्द से जल्द घोषित किया जाए और अफीम उत्पादक किसानों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाए। प्रतिनिधिमंडल ने अफीम के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी भाव को 50 हजार रुपये प्रति किलो किए जाने की भी पुरजोर मांग उठाई है।

मंदसौर जिला मध्य प्रदेश में अफीम उत्पादन के लिए ऐतिहासिक रूप से जाना जाता है। यहां के बड़ी संख्या में किसान अफीम की खेती पर निर्भर हैं और उनकी आजीविका का मुख्य साधन यही फसल है। ऐसे में हर वर्ष अफीम नीति की घोषणा और उसके तहत तय होने वाले भाव को लेकर किसानों में स्वाभाविक रूप से चिंता और उत्सुकता बनी रहती है। सोमवार को कांग्रेस नेताओं ने इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए प्रशासनिक अधिकारियों तक किसानों की बात पहुंचाने का प्रयास किया।

प्रदेश कांग्रेस सचिव परशुराम सिसोदिया के नेतृत्व में जिला अफीम अधिकारी अतनु चटर्जी से मिलने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अफीम नीति में देरी से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि नारकोटिक्स कमिश्नर द्वारा अफीम नीति बिना किसी और विलंब के तत्काल घोषित की जानी चाहिए। नीति समय पर घोषित होने से किसानों को अपनी खेती की योजना बनाने और तैयारियों को व्यवस्थित करने में मदद मिलती है। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में अफीम किसान कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिन्हें नीति के माध्यम से ही हल किया जा सकता है।

ज्ञापन में सबसे महत्वपूर्ण मांग अफीम के भाव को लेकर की गई है। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने जिला अफीम अधिकारी अतनु चटर्जी को दिए गए ज्ञापन में कहा है कि अफीम का भाव 50 हजार रुपये प्रति किलो होना चाहिए। उनका कहना था कि बढ़ती हुई महंगाई, खाद-बीज और अन्य कृषि इनपुट्स की बढ़ती लागत को देखते हुए किसानों को उनकी मेहनत का उचित और वाजिब दाम मिलना बेहद जरूरी हो गया है। यदि भाव में पर्याप्त वृद्धि नहीं की जाती है, तो अफीम उत्पादक किसानों के सामने आर्थिक संकट गहरा सकता है। इसलिए 50 हजार रुपये प्रति किलो का भाव तय किया जाना किसानों के व्यापक हित में होगा।

उल्लेखनीय है कि मंदसौर और इसके आसपास के क्षेत्रों में अफीम की खेती एक अत्यंत संवेदनशील और नियंत्रित विषय है, जो केंद्र सरकार की नीतियों और नारकोटिक्स विभाग के सीधे दिशा-निर्देशों के तहत संचालित होता है। स्थानीय स्तर पर जिला अफीम अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करते हैं। किसानों को अफीम की खेती के लिए विशेष लाइसेंस दिया जाता है और फसल तैयार होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसकी निकासी की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया में अफीम नीति और उसमें तय किए गए भाव की भूमिका सबसे अहम होती है, क्योंकि यही तय करता है कि किसानों को उनके उत्पादन का कितना प्रतिफल मिलेगा।

सोमवार को सौंपे गए इस ज्ञापन के माध्यम से कांग्रेस पार्टी ने अफीम किसानों के मुद्दे को एक बार फिर प्रशासनिक स्तर पर मुखरता से उठाने का काम किया है। प्रतिनिधिमंडल ने जिला अफीम अधिकारी अतनु चटर्जी से अनुरोध किया है कि वे किसानों की इन मांगों और समस्याओं को नारकोटिक्स कमिश्नर तथा संबंधित उच्च अधिकारियों तक प्राथमिकता के साथ पहुंचाएं, ताकि अफीम नीति जल्द घोषित हो सके और किसानों को राहत मिल सके।

अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि नारकोटिक्स कमिश्नर की ओर से इस वर्ष की अफीम नीति की आधिकारिक घोषणा कब तक की जाएगी या ज्ञापन में उठाई गई मांगों पर प्रशासन की तरफ से क्या ठोस कार्रवाई होगी। हालांकि, कांग्रेस के इस प्रतिनिधिमंडल की पहल से मंदसौर जिले के अफीम उत्पादक किसानों के बीच अपनी मांगों को लेकर एक नई उम्मीद जागी है। किसानों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि नारकोटिक्स कमिश्नर अफीम नीति कब घोषित करते हैं और उसमें अफीम का भाव कितना तय किया जाता है। वंदे भारत न्यूज़ की रिपोर्ट।