Tue, 06 Oct 202610:12 AM
Tue, Oct 6, 2026Updated 10:12 AM IST
होम › बिहार

पवन सिंह और ज्योति सिंह तलाक मामला: बलिया कोर्ट में पेश नहीं हुए भोजपुरी अभिनेता, पत्नी ने लगाया पावर-पोजिशन के दुरुपयोग का आरोप

WhatsAppFacebookX

वन्दे भारत न्यूज़ डेस्क। भोजपुरी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता और गायक पवन सिंह तथा उनकी पत्नी ज्योति सिंह के बीच चल रहे तलाक के मामले में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की अदालत में इस मामले की सुनवाई हो रही है। पांच अक्टूबर को निर्धारित सुनवाई के दौरान पवन सिंह को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होना था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। उनकी गैरहाजिरी को लेकर ज्योति सिंह ने कड़ी आपत्ति जताई है और उन पर अपने पावर और पोजिशन का फायदा उठाने का आरोप लगाया है।

बलिया कोर्ट में चल रहे इस तलाक के मुकदमे में पांच अक्टूबर की तारीख बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। अदालत ने पवन सिंह को इस दिन पेश होने का निर्देश दिया था। हालांकि, तय समय पर भोजपुरी अभिनेता अदालत नहीं पहुंचे। स्रोत के अनुसार, पवन सिंह की ओर से बार-बार बुलाए जाने के बावजूद उनके कोर्ट में हाजिर न होने से मामले में देरी हो रही है। ज्योति सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया में स्पष्ट रूप से कहा कि पवन सिंह बार-बार बुलाने पर भी अदालत में नहीं आते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इतने लंबे वैवाहिक संबंध के बाद भी पवन सिंह का पर्सनल नंबर तक उनके पास नहीं है, जिससे उनका सीधे तौर पर संपर्क करना संभव नहीं हो पा रहा है।

ज्योति सिंह ने मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए आरोप लगाया कि पवन सिंह अपनी ताकत और रुतबे का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका कहना है कि पावर और पोजिशन के सहारे वे कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित करने या उसमें देरी करने का प्रयास कर रहे हैं। ज्योति सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि एक पत्नी होने के नाते उनके पास पवन सिंह का व्यक्तिगत फोन नंबर तक उपलब्ध नहीं है, जो इस बात को दर्शाता है कि उनके बीच संवाद के रास्ते पूरी तरह से बंद हो चुके हैं। यह स्थिति तलाक की कानूनी कार्यवाही को और अधिक जटिल बना रही है।

भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में पवन सिंह एक बड़ा नाम हैं। उनकी लोकप्रियता और प्रशंसकों की संख्या बहुत बड़ी है। ऐसे में उनके निजी जीवन से जुड़े विवाद अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। पवन सिंह और ज्योति सिंह के बीच का वैवाहिक विवाद काफी समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। दोनों के बीच मतभेद इतने बढ़ गए कि मामला अदालत की शरण में पहुंचा और तलाक की याचिका दायर कर दी गई। बलिया की अदालत में यह मामला विचाराधीन है और नियमित रूप से सुनवाई हो रही है।

कानूनी जानकारों के अनुसार, जब किसी पक्ष को अदालत द्वारा व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया जाता है और वह बिना किसी ठोस कारण के अनुपस्थित रहता है, तो अदालत उसके खिलाफ सख्त रुख अपना सकती है। ऐसी स्थिति में अदालत जुर्माना लगाने या अन्य कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार रखती है। हालांकि, पांच अक्टूबर की सुनवाई में पवन सिंह की गैरहाजिरी पर अदालत ने क्या विशेष टिप्पणी की या कोई जुर्माना लगाया, इस बारे में उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है।

ज्योति सिंह की ओर से उठाए गए बिंदुओं पर गौर करें तो उन्होंने मुख्य रूप से तीन बातें कहीं हैं। पहली, पवन सिंह का बार-बार बुलाने पर भी अदालत में न आना। दूसरी, उनका अपने पावर और पोजिशन का फायदा उठाना। तीसरी, उनके पास पवन सिंह का पर्सनल नंबर न होना। ये तीनों बातें मिलकर इस ओर इशारा करती हैं कि ज्योति सिंह खुद को इस कानूनी लड़ाई में असहाय महसूस कर रही हैं और उन्हें लगता है कि पवन सिंह की सामाजिक व आर्थिक हैसियत के कारण उन्हें न्याय पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

यह मामला केवल दो व्यक्तियों के बीच का निजी विवाद नहीं रह गया है, बल्कि भोजपुरी मनोरंजन जगत और आम जनता की नजरों में भी यह एक चर्चित मुद्दा बन चुका है। पवन सिंह के प्रशंसक और आलोचक दोनों ही इस मामले की हर अपडेट पर गहरी नजर रखे हुए हैं। अदालत में पेश न होने की घटना ने इस विवाद को और अधिक तूल दे दिया है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पवन सिंह की तरफ से पांच अक्टूबर को अदालत में न पहुंचने के पीछे के कारणों पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि उनकी ओर से अदालत में कोई आवेदन दिया गया था या नहीं। ज्योति सिंह ने जो भी आरोप लगाए हैं, वे उनके अपने बयान पर आधारित हैं। पवन सिंह या उनके कानूनी प्रतिनिधियों ने अभी तक इन विशिष्ट आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से साझा नहीं की है।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बलिया की अदालत इस मामले में अगली सुनवाई कब करेगी और क्या पवन सिंह अगली तारीख पर अदालत में हाजिर होंगे। यदि वे फिर से अनुपस्थित रहते हैं, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत द्वारा कड़े कदम उठाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल, यह पूरा मामला बलिया कोर्ट के अधीन है और कानूनी प्रक्रिया अपने निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ रही है। वन्दे भारत न्यूज़ इस मामले की हर नई अपडेट पर नजर बनाए हुए है।