धार में ‘ऑन रेंट गरबा पार्टनर’ पोस्टर पर हिंदू संगठनों का विरोध, SP को सौंपा ज्ञापन; जांच और कार्रवाई की मांग

मध्य प्रदेश के धार जिले में नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान आयोजित होने वाले गरबा और निजी इवेंट कार्यक्रमों को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। निजी इवेंट आयोजनों के प्रचार-प्रसार के लिए लगाए गए पोस्टरों में ‘ऑन रेंट गरबा पार्टनर’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर हिंदू समाज और विभिन्न हिंदू संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। इस मामले को लेकर सोमवार रात हिंदू संगठनों और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने पुलिस अधीक्षक (SP) को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें इस प्रकार के विज्ञापनों की तत्काल जांच करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, धार जिले में नवरात्रि के अवसर पर होने वाले गरबा और अन्य निजी सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रचार के लिए कुछ पोस्टर और विज्ञापन जारी किए गए थे। इन प्रचार सामग्रियों में ‘ऑन रेंट गरबा पार्टनर’ वाक्यांश का उपयोग किया गया था। जैसे ही यह विज्ञापन और पोस्टर लोगों के संज्ञान में आए, वैसे ही हिंदू समाज में भारी रोष व्याप्त हो गया। हिंदू संगठनों का स्पष्ट मत है कि गरबा केवल एक साधारण मनोरंजन या नृत्य नहीं है, बल्कि यह माता अंबा की उपासना और हिंदू धर्म की गहरी आस्था से जुड़ा एक पवित्र सांस्कृतिक एवं धार्मिक अनुष्ठान है। ऐसे में गरबा के लिए ‘रेंट पार्टनर’ जैसे शब्दों का प्रयोग करना सीधे तौर पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने और गरबा की सांस्कृतिक गरिमा को ठेस पहुंचाने जैसा है।
इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सोमवार रात हिंदू संगठनों और बजरंग दल के प्रतिनिधिमंडल ने धार जिले के पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पुलिस अधीक्षक को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में संगठनों की ओर से स्पष्ट रूप से कहा गया है कि नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाले गरबा और निजी इवेंट्स में धार्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा को हर हाल में बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। संगठनों ने मांग की है कि जो भी व्यक्ति या समूह इस प्रकार के आपत्तिजनक विज्ञापन और पोस्टर जारी करने के पीछे हैं, उनकी पहचान कर उनके विरुद्ध तुरंत वैधानिक कार्रवाई की जाए।
बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन से यह भी आग्रह किया है कि भविष्य में किसी भी धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन के प्रचार-प्रसार में इस तरह के शब्दों का उपयोग न हो सके, इसके लिए प्रशासन को पहले से ही सतर्क रहना चाहिए और उचित दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए। उनका कहना है कि धार्मिक आयोजनों को व्यावसायिक रूप देकर या उन्हें किराये की सेवाओं से जोड़कर प्रस्तुत करना समाज में स्वीकार्य नहीं है। यदि ऐसे मामलों पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो इससे समाज के विभिन्न वर्गों की भावनाएं आहत होंगी और शांति व्यवस्था बिगड़ने का खतरा उत्पन्न हो सकता है।
ज्ञापन सौंपे जाने के दौरान मौजूद हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों ने यह भी रेखांकित किया कि नवरात्रि का त्योहार पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। गरबा विशेष रूप से मां दुर्गा की आराधना का एक पारंपरिक माध्यम है, जिसे पीढ़ियों से धार्मिक नियमों और आस्था के साथ किया जाता रहा है। इसलिए, किसी भी निजी इवेंट मैनेजमेंट कंपनी या आयोजक द्वारा इसे मात्र एक व्यावसायिक गतिविधि के रूप में प्रचारित करना और उसमें ‘ऑन रेंट पार्टनर’ जैसी भाषा का प्रयोग करना धार्मिक मूल्यों का खुला अपमान है।
वहीं, इस मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से अभी तक कोई औपचारिक बयान या कार्रवाई की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा नहीं की गई है। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने हिंदू संगठनों के प्रतिनिधिमंडल से ज्ञापन प्राप्त किया है और उन्हें आश्वस्त किया है कि मामले की जांच की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, पुलिस अब यह पता लगाने में जुट गई है कि ये आपत्तिजनक पोस्टर और विज्ञापन किसके द्वारा डिजाइन, प्रिंट और वितरित किए गए हैं, ताकि जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज की जा सके।
धार जिले में गरबा पोस्टर को लेकर उठा यह विवाद अब चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय स्तर पर लोग भी इस बात पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं कि धार्मिक आयोजनों की पवित्रता को बनाए रखने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं। देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन इस ज्ञापन के आधार पर आगे क्या कार्रवाई करता है और नवरात्रि के शेष दिनों में इस प्रकार के विवादों को रोकने के लिए क्या पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं। फिलहाल, हिंदू संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस मामले में प्रशासन की हर गतिविधि पर नजर रखेंगे और धार्मिक गरिमा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे।

