Tue, 06 Oct 202610:12 AM
Tue, Oct 6, 2026Updated 10:12 AM IST
होम › मध्य प्रदेश

80 वर्ष की आयु में 930 किलोमीटर पैदल चलेंगे दिग्विजय सिंह: उज्जैन से अयोध्या तक निकालेंगे ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’, बोले- आज भी 50 साल जैसा महसूस करता हूं

WhatsAppFacebookX

मध्य प्रदेश के उज्जैन से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एक बड़ी पदयात्रा की शुरुआत करने जा रहे हैं। यह यात्रा 20 अक्टूबर से शुरू होगी और मध्य प्रदेश के उज्जैन से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक जाएगी। इस पदयात्रा का नाम ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ रखा गया है। 80 वर्ष की आयु में लगभग 930 किलोमीटर की यह पैदल यात्रा राजनीतिक और धार्मिक दोनों दृष्टियों से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दिग्विजय सिंह ने अपनी शारीरिक क्षमता को लेकर कहा है कि वह आज भी खुद को 50 वर्ष के युवा जैसा महसूस करते हैं और इस लंबी यात्रा को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस यात्रा की घोषणा के दौरान अपने दावे स्पष्ट किए हैं। उन्होंने कहा कि आज देश में कई लोग सनातन धर्म की बात कर रहे हैं, लेकिन वास्तविक सनातन धर्म के मूल्यों और सिद्धांतों पर चलने की जरूरत है। उनकी इस ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ का मुख्य उद्देश्य यही संदेश जनता तक पहुंचाना बताया जा रहा है। कांग्रेस नेता ने उज्जैन से अयोध्या तक की इस पैदल यात्रा के माध्यम से सीधे तौर पर आम लोगों से जुड़ने और अपनी बात रखने की योजना बनाई है।

इस पदयात्रा का राजनीतिक संदर्भ भी बेहद अहम है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए फंड के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर इस मामले में विवादित आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि राम मंदिर के नाम पर आम श्रद्धालुओं से जो चंदा और धनराशि जुटाई गई थी, उसके उपयोग और प्रबंधन में पारदर्शिता होनी चाहिए। इसी मुद्दे को व्यापक स्तर पर जनता के बीच ले जाने के लिए उन्होंने उज्जैन से अयोध्या तक की इस लंबी पदयात्रा का मार्ग चुना है।

उज्जैन शहर हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है और महाकालेश्वर मंदिर के लिए विश्व भर में जाना जाता है। ऐसे में किसी भी धार्मिक या राजनीतिक यात्रा की शुरुआत उज्जैन से करना अपने आप में एक बड़ा प्रतीकात्मक संदेश माना जाता है। वहीं, यात्रा का समापन अयोध्या में होगा, जहां भगवान राम का भव्य मंदिर निर्मित है। इन दोनों अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक नगरों को जोड़ने वाली यह 930 किलोमीटर की यात्रा कई राज्यों और जिलों से होकर गुजरेगी। इस दौरान दिग्विजय सिंह रास्ते में पड़ने वाले गांवों, कस्बों और शहरों में लोगों से संवाद करेंगे।

दिग्विजय सिंह की आयु 80 वर्ष हो चुकी है, लेकिन उनके हौसले और ऊर्जा में कोई कमी नहीं दिखती। उन्होंने खुद दावा किया है कि वह आज भी 50 साल के व्यक्ति जैसा महसूस करते हैं। इतनी लंबी दूरी पैदल तय करना किसी भी व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता, खासकर जब उम्र 80 के पार हो। हालांकि, दिग्विजय सिंह अपने राजनीतिक जीवन में हमेशा से ही अनोखे और साहसिक कदम उठाने के लिए जाने जाते रहे हैं। उनकी यह पदयात्रा भी उसी कड़ी का एक हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें वह शारीरिक चुनौतियों को स्वीकार करते हुए अपने राजनीतिक और वैचारिक एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं।

कांग्रेस पार्टी के लिए भी यह यात्रा एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। पार्टी के वरिष्ठ नेता द्वारा सीधे तौर पर सनातन धर्म, राम मंदिर फंड और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा भारतीय जनता पार्टी को लेकर उठाए गए सवाल आगामी समय में राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकते हैं। दिग्विजय सिंह ने जो दावा किया है कि आज लोग सनातन धर्म की बात तो कर रहे हैं, लेकिन उसकी वास्तविक भावना को समझने की आवश्यकता है, यह बयान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नई बहस छेड़ सकता है।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस 930 किलोमीटर की यात्रा को पूरा करने में उन्हें कितने दिन का समय लगेगा। इसके अलावा, यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भागीदारी और रास्ते में होने वाले कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा के बारे में अभी अतिरिक्त जानकारी सामने आनी बाकी है। यह भी देखना होगा कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से राम मंदिर फंड के उपयोग संबंधी आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी जाती है।

कुल मिलाकर, 20 अक्टूबर से शुरू होने वाली दिग्विजय सिंह की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है। 80 वर्ष की आयु में 930 किलोमीटर पैदल चलने का उनका यह फैसला और राम मंदिर फंड को लेकर उठाए गए सवाल आने वाले दिनों में सुर्खियों में रहेंगे। उज्जैन से अयोध्या तक का यह सफर केवल एक भौगोलिक दूरी नहीं, बल्कि एक राजनीतिक और वैचारिक संघर्ष का प्रतीक बनने जा रहा है।