Tue, 06 Oct 202610:12 AM
Tue, Oct 6, 2026Updated 10:12 AM IST
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भोपाल मेट्रो विवाद: शाही कब्रिस्तान पर निर्माण को लेकर कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने जताई नाराजगी, अधिकारियों से कहा- बाहर निकलो वरना बदतमीजी कर लूंगा

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भोपाल में मेट्रो रेल परियोजना के ऑरेंज लाइन फेज-2 के निर्माण कार्य को लेकर उत्पन्न विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा घटनाक्रम में भोपाल उत्तर से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने शाही कब्रिस्तान स्थित निर्माण स्थल पर पहुंचकर मेट्रो और पुलिस अधिकारियों के प्रति तीखी नाराजगी व्यक्त की है। इस दौरान विधायक ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे तुरंत स्थल से बाहर निकलें, अन्यथा वे बदतमीजी करने पर मजबूर हो जाएंगे। यह टिप्पणी उस समय सामने आई जब विधायक ने मौके पर उपस्थित अधिकारियों से स्पष्ट किया कि उक्त भूमि शाही कब्रिस्तान की संपत्ति है और बिना पूर्व अनुमति के यहां किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य स्वीकार्य नहीं है।

सूत्रों के अनुसार, यह पूरा प्रकरण भोपाल मेट्रो की ऑरेंज लाइन के दूसरे चरण के रूट से जुड़ा हुआ है। विधायक आतिफ अकील ने लगातार इस बात पर आपत्ति जताई है कि मेट्रो का प्रस्तावित मार्ग शाही कब्रिस्तान की भूमि से होकर गुजर रहा है। उनका कहना है कि यह क्षेत्र धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का है तथा इसे कब्रिस्तान की निजी संपत्ति माना जाता है। विधायक ने आरोप लगाया कि प्रशासन और मेट्रो प्रबंधन ने इस संवेदनशील स्थल पर कार्य शुरू करने से पहले संबंधित ट्रस्ट या प्रबंध समिति से कोई औपचारिक अनुमति नहीं ली है। उनके अनुसार, बिना वैध स्वीकृति और स्थानीय हितधारकों की सहमति के किया जा रहा यह कार्य न केवल अवैध है बल्कि यह सामुदायिक भावनाओं को भी आहत करता है।

घटनास्थल पर विधायक और अधिकारियों के बीच हुई तीखी नोकझोंक ने एक बार फिर मेट्रो परियोजना के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं को उजागर किया है। विधायक द्वारा ‘बदतमीजी’ शब्द का प्रयोग उनके असंतोष की तीव्रता को दर्शाता है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए स्पष्ट कर दिया कि यदि वे बिना उचित दस्तावेजों और अनुमति के कार्यस्थल पर बने रहते हैं, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। विधायक का तर्क है कि जब तक कब्रिस्तान प्रबंधन से लिखित सहमति नहीं प्राप्त हो जाती, तब तक मशीनों और कर्मचारियों को हटा लिया जाना चाहिए। उन्होंने पुलिस प्रशासन से भी अपेक्षा की कि वे मेट्रो अधिकारियों को समझाएं कि निजी और धार्मिक संपत्ति पर जबरन कब्जा करना कानूनन और नैतिक रूप से उचित नहीं है।

भोपाल मेट्रो की ऑरेंज लाइन फेज-2 शहर की परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना मानी जा रही है, लेकिन शाही कब्रिस्तान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से इसके रूट को लेकर उत्पन्न विवाद ने काम की गति को प्रभावित किया है। अतीत में भी इस स्थान पर निर्माण कार्यों को लेकर स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जा चुके हैं। विधायक आतिफ अकील ने पहले भी कई मंचों से यह मुद्दा उठाया है और प्रशासन से समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन उन्हें ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की गरिमा तथा कानूनी प्रक्रियाओं का सम्मान करते हुए ही किया जाना चाहिए। यदि रूट में संशोधन संभव नहीं है, तो कम से कम पारदर्शी बातचीत और उचित मुआवजे या पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए, जिसका अभी तक अभाव दिख रहा है।

इस मामले में मेट्रो प्रबंधन और पुलिस प्रशासन की ओर से अभी तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, विधायक की टिप्पणियों और मौके पर हुए घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि दोनों पक्षों के बीच संवादहीनता की स्थिति बनी हुई है। प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि मेट्रो का रूट तकनीकी अध्ययनों और शहरी योजनाओं के आधार पर तय किया गया है, लेकिन विधायक और स्थानीय निवासी इसे कब्रिस्तान की सीमाओं का अतिक्रमण मान रहे हैं। इस मतभेद को सुलझाने के लिए उच्च स्तरीय हस्तक्षेप की आवश्यकता महसूस की जा रही है, क्योंकि निर्माण कार्य में देरी से न केवल परियोजना की लागत बढ़ेगी, बल्कि आम जनता को मिलने वाली सुविधा में भी विलंब होगा।

यह विवाद केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह शहरी विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को भी रेखांकित करता है। भोपाल जैसे ऐतिहासिक शहर में जहां पुराने कब्रिस्तान, इमारतें और धार्मिक स्थल शहरी फैलाव के बीच स्थित हैं, वहां बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए मार्ग प्रशस्त करना हमेशा जटिल रहा है। विधायक आतिफ अकील द्वारा उठाया गया यह मुद्दा इसी जटिलता का ताजा उदाहरण है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन और मेट्रो प्रबंधन इस गतिरोध को बातचीत के जरिए सुलझा पाते हैं या फिर यह विवाद कानूनी और राजनीतिक दबावों के कारण और अधिक तूल पकड़ता है। फिलहाल, शाही कब्रिस्तान पर चल रहे निर्माण कार्य को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और सभी पक्षों की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।