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Tue, Oct 6, 2026Updated 11:27 AM IST
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गोरखपुर स्कूली बच्ची रेप और हत्या मामला: प्रिंसिपल की गवाही पूरी, CCTV फुटेज कोर्ट में साबित; सिपाही पर है आरोप

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गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में हुई स्कूली बच्ची की अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के सनसनीखेज मामले में ट्रायल कोर्ट में अहम प्रगति हुई है। इस जघन्य अपराध के मुकदमे की सुनवाई के दौरान स्कूल की प्रिंसिपल की गवाही पूरी हो गई है। प्रिंसिपल ने अदालत के समक्ष अपना बयान दर्ज कराते हुए स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की पुष्टि की है। यह फुटेज इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है, जिसने अभियोजन पक्ष की दलीलों को मजबूती प्रदान की है। इस मामले में एक सिपाही पर मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने और फिर उसकी हत्या कर देने का गंभीर आरोप है।

इस मामले की सुनवाई गोरखपुर की संबंधित अदालत में चल रही है। अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में सबूतों को पेश करने की कड़ी में स्कूल की प्रिंसिपल को गवाह के रूप में पेश किया गया था। प्रिंसिपल ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से पुष्टि की कि उन्होंने स्कूल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुए फुटेज विवेचक अधिकारी को उपलब्ध कराए थे। यह फुटेज घटनाक्रम और बच्ची की आवाजाही को समझने में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। प्रिंसिपल द्वारा दी गई इस गवाही के आधार पर अभियोजन पक्ष ने इन सीसीटीवी फुटेज को अदालत में ठोस सबूत के तौर पर पेश किया और उन्हें साबित करने की दिशा में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की।

आपको बता दें कि यह मामला गोरखपुर के लिए किसी सदमे से कम नहीं था, जब एक स्कूली बच्ची के साथ इतनी बर्बरता सामने आई थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस जघन्य वारदात को अंजाम देने का आरोप एक सिपाही पर लगा है। आरोपी सिपाही पर पहले बच्ची का अपहरण करने, उसके बाद उसके साथ दुष्कर्म करने और अंततः उसकी निर्मम हत्या कर देने का संगीन आरोप है। पुलिस विभाग से जुड़े व्यक्ति पर इस तरह के अपराध के आरोप लगने से पूरे क्षेत्र में भारी रोष व्याप्त हो गया था और लोगों ने न्याय की मांग की थी।

इस मुकदमे की विवेचना के दौरान जांच अधिकारी (विवेचक) ने तकनीकी साक्ष्यों को जुटाने पर विशेष ध्यान दिया था। स्कूल का सीसीटीवी फुटेज उन्हीं तकनीकी साक्ष्यों में से एक था। विवेचक ने जब मामले की जांच शुरू की, तो स्कूल प्रबंधन से संपर्क किया गया। इसी क्रम में स्कूल की प्रिंसिपल ने सहयोग करते हुए सीसीटीवी फुटेज की कॉपी विवेचक को सौंपी थी। अब जब यह मामला ट्रायल के चरण में है, तो इन फुटेज की प्रामाणिकता को कोर्ट के समक्ष स्थापित करना अभियोजन के लिए अनिवार्य था। प्रिंसिपल की गवाही ने इसी कड़ी को जोड़ने का काम किया है। उन्होंने अदालत को बताया कि ये फुटेज उनके स्कूल के ही हैं और उन्होंने ही इन्हें जांच अधिकारी को दिए थे, जिससे इस साक्ष्य की विश्वसनीयता पर कोई संदेह नहीं रह गया।

भारतीय न्यायिक प्रणाली में किसी भी आपराधिक मुकदमे में गवाहों का बयान और साक्ष्यों की श्रृंखला (चेन ऑफ कस्टडी) को साबित करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यदि कोई साक्ष्य, जैसे कि सीसीटीवी फुटेज, कोर्ट में पेश किया जाता है, तो यह सिद्ध करना जरूरी होता है कि वह फुटेज कहां से आया, किसने रिकॉर्ड किया और जांच एजेंसी तक कैसे पहुंचा। प्रिंसिपल की गवाही ने इसी चेन ऑफ कस्टडी को कोर्ट के समक्ष स्पष्ट और पुख्ता किया है। अभियोजन पक्ष ने इस गवाही के जरिए यह स्थापित करने का प्रयास किया है कि आरोपी सिपाही के खिलाफ जो सबूत पेश किए जा रहे हैं, वे पूरी तरह से वैध और प्रामाणिक हैं।

गोरखपुर की अदालत में इस मामले की सुनवाई नियमित रूप से हो रही है। बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष दोनों अपनी-अपनी दलीलें और सबूत पेश कर रहे हैं। प्रिंसिपल की गवाही पूरी होने के बाद अब अभियोजन पक्ष की ओर से अन्य गवाहों को भी अदालत में पेश किया जाना बाकी है। इस मामले में कई अन्य साक्ष्य भी शामिल हो सकते हैं, जिनमें फॉरेंसिक रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य चश्मदीदों या परिजनों के बयान शामिल हैं।

यह मामला इसलिए भी अत्यंत संवेदनशील है क्योंकि पीड़िता एक स्कूली बच्ची थी और मुख्य आरोपी एक सिपाही बताया जा रहा है, जिस पर समाज की रक्षा की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में पुलिस प्रशासन और न्यायपालिका दोनों पर यह जिम्मेदारी है कि इस मामले की सुनवाई तेजी से हो और दोषी को कड़ी से कड़ी सजा मिले। पीड़ित परिवार को न्याय मिले, इसके लिए अभियोजन पक्ष द्वारा हर संभव कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं। सीसीटीवी फुटेज का कोर्ट में साबित होना इसी दिशा में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

फिलहाल, गोरखपुर की अदालत में इस मुकदमे की सुनवाई जारी है। प्रिंसिपल की गवाही पूरी होने और सीसीटीवी फुटेज के सबूत के तौर पर स्थापित होने के बाद, इस बात की उम्मीद जताई जा रही है कि ट्रायल तेजी से आगे बढ़ेगा। वंदे भारत न्यूज़ इस संवेदनशील मामले की सुनवाई पर लगातार नजर रखे हुए है और अदालत में होने वाली हर अहम कार्यवाही की ताजा जानकारी पाठकों तक पहुंचाता रहेगा। आगामी सुनवाइयों में और क्या-क्या साक्ष्य पेश होते हैं तथा अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।