आम आदमी पार्टी का वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर बड़ा आरोप, लखनऊ में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन

लखनऊ। आम आदमी पार्टी (AAP) ने देश भर की मतदाता सूचियों से करोड़ों मतदाताओं के नाम कथित तौर पर हटाए जाने के गंभीर आरोपों को लेकर अपना आंदोलन और तेज करने का ऐलान किया है। पार्टी ने इस पूरे मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए लखनऊ में एक बड़ा प्रदर्शन करने की योजना बनाई है। आप के प्रदेश प्रवक्ता सीएम चौहान ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि आगामी 9 अक्टूबर को राजधानी लखनऊ में पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों द्वारा एक विशाल प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें मतदाता सूची में हुई कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज बुलंद की जाएगी।
आम आदमी पार्टी की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार, देश की विभिन्न मतदाता सूचियों से लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम बिना किसी ठोस कारण या उचित प्रक्रिया के हटा दिए गए हैं। पार्टी का कहना है कि यह कोई साधारण तकनीकी खामी या सामान्य प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश है। आप नेताओं ने आरोप लगाया है कि जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, उनमें बड़ी संख्या में ऐसे नागरिक शामिल हैं जो नियमित रूप से मतदान करते रहे हैं और जिनके पास वैध पहचान पत्र मौजूद हैं। पार्टी ने इस बात पर गहरा आक्षेप जताया है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और अद्यतन (अपडेट) की प्रक्रिया में पूरी तरह से पारदर्शिता का अभाव रहा है, जिसके चलते लाखों-करोड़ों योग्य मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।
इस पूरे विवाद को लेकर आम आदमी पार्टी ने सीधे तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी प्रवक्ता सीएम चौहान ने कहा कि चुनाव आयोग जैसे सर्वोच्च और स्वतंत्र संवैधानिक संस्थान की जिम्मेदारी निष्पक्ष, पारदर्शी और सटीक चुनाव कराना है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाना चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है। आप का मानना है कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद पर बने रहेंगे, तब तक मतदाताओं के बीच चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर संदेह बना रहेगा। इसी आधार पर पार्टी ने उनके तत्काल इस्तीफे की मांग को अपने आंदोलन का मुख्य मुद्दा बनाया है।
आप प्रवक्ता सीएम चौहान ने बताया कि 9 अक्टूबर को लखनऊ में होने वाला यह प्रदर्शन केवल एक औपचारिक विरोध कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि इसे एक बड़े जनआंदोलन के रूप में संगठित किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि इस प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से पार्टी के कार्यकर्ता, पदाधिकारी और आम नागरिक हिस्सा लेंगे। पार्टी का उद्देश्य है कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से प्रभावित हुए लोगों की आवाज को सही मायने में चुनाव आयोग और सरकार तक पहुंचाया जाए। सीएम चौहान ने कहा कि लोकतंत्र में हर वयस्क नागरिक का मतदान का अधिकार संविधान प्रदत्त है और किसी भी स्थिति में इसे छीना नहीं जा सकता। यदि चुनाव आयोग इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाता है, तो पार्टी सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।
आम आदमी पार्टी ने अपनी मांगों को और अधिक स्पष्ट करते हुए कहा है कि जिन 13 करोड़ मतदाताओं के नाम कथित तौर पर वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, उन्हें तुरंत और बिना किसी झंझट के दोबारा सूची में शामिल किया जाना चाहिए। पार्टी ने मांग की है कि मतदाता सूची के सुधार और सत्यापन की पूरी प्रक्रिया को पूर्ण पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक किया जाए, ताकि कोई भी योग्य नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे। इसके अलावा, आप ने यह भी सुझाव दिया है कि भविष्य में ऐसी त्रुटियों या अनियमितताओं को रोकने के लिए मतदाता सूची के रखरखाव की व्यवस्था में व्यापक सुधार किए जाने चाहिए।
उल्लेखनीय है कि मतदाता सूचियों के अद्यतन और उसमें नाम जुड़ने या हटने का मुद्दा समय-समय पर विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा उठाया जाता रहा है। हालांकि, आम आदमी पार्टी द्वारा 13 करोड़ नाम हटाए जाने का जो आंकड़ा पेश किया गया है, वह अत्यंत बड़ा है और इसने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। अभी तक भारत निर्वाचन आयोग की ओर से आम आदमी पार्टी द्वारा लगाए गए इन विशिष्ट आरोपों या 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आंकड़ों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि चुनाव आयोग इस मामले में क्या रुख अपनाएगा या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर कोई टिप्पणी करेगा या नहीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आप का यह आंदोलन आने वाले समय में उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस का एक प्रमुख विषय बन सकता है। लखनऊ में 9 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पार्टी के नेता और कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर लोगों को इस मुद्दे से जोड़ने और जागरूक करने का अभियान चला रहे हैं। आप का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से लोकतांत्रिक मार्ग अपनाकर अपनी बात रखेंगे, लेकिन अपने मुद्दों को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे। अब देखना यह होगा कि 9 अक्टूबर को लखनऊ में होने वाले इस प्रदर्शन का स्वरूप कितना बड़ा होता है और चुनाव आयोग इस पूरे मामले पर क्या रुख अख्तियार करता है।

