नर्मदापुरम मूंग घोटाला: 68 दिन बाद भी फरार मुख्य आरोपी, पुलिस ने घोषित किया इनाम; तीसरे आरोपी ने की थी आत्महत्या

नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में सामने आए लगभग 28.14 करोड़ रुपये के सरकारी मूंग दाल में मिट्टी मिलावट के बहुचर्चित घोटाले में पुलिस को अब तक पूर्ण सफलता नहीं मिल पाई है। इस मामले में नामजद दो प्रमुख आरोपी पिछले 68 दिनों से लगातार फरार चल रहे हैं और पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित करने और जांच को तेजी से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से अब पुलिस प्रशासन द्वारा सूचना देने वालों के लिए इनाम की घोषणा की गई है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब इसी मामले से जुड़े एक तीसरे आरोपी द्वारा पहले ही आत्महत्या कर ली जा चुकी है, जिससे इस घोटाले की गंभीरता और संवेदनशीलता और अधिक बढ़ गई है।
पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, नर्मदापुरम जिले के वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के गोदामों में रखी सरकारी मूंग दाल में बड़े पैमाने पर मिट्टी मिलाए जाने का मामला सामने आया था। प्रारंभिक जांच और जब्ती दस्तावेजों के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि इस घोटाले का कुल मूल्य लगभग 28.14 करोड़ रुपये है। इस वित्तीय अनियमितता और खाद्यान्न में मिलावट के मामले में जिला प्रबंधक और संबंधित वेयरहाउस संचालक को मुख्य आरोपी बनाया गया है। हालांकि, अपराध दर्ज होने और 68 दिन बीत जाने के बाद भी ये दोनों अधिकारी और संचालक पुलिस की पहुंच से दूर हैं। पुलिस टीमों द्वारा लगातार दबिश दी जा रही है और संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है, लेकिन अभी तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
इस घोटाले की सबसे दुखद और चिंताजनक पहलू यह है कि इससे जुड़े एक तीसरे आरोपी ने कुछ समय पहले आत्महत्या कर ली थी। यह घटना इस पूरे प्रकरण की जटिलता और आरोपियों पर मौजूद दबाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। तीसरे आरोपी की मृत्यु ने जहां एक ओर जांच एजेंसी के लिए साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया को चुनौतीपूर्ण बना दिया है, वहीं दूसरी ओर शेष फरार आरोपियों की धरपकड़ को प्राथमिकता देना अनिवार्य कर दिया है। पुलिस प्रशासन का मानना है कि यदि फरार आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार नहीं किया गया तो सबूतों से छेड़छाड़ या अन्य किसी प्रकार की अनहोनी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसलिए, इनाम की घोषणा को जांच में तेजी लाने की रणनीति के तहत देखा जा रहा है।
सरकारी राशन और खाद्यान्न में इस प्रकार का घोटाला न केवल राजकोष को भारी नुकसान पहुंचाता है, बल्कि जनवितरण प्रणाली पर आम नागरिकों के विश्वास को भी ठेस पहुंचाता है। नर्मदापुरम जैसे जिले में जहां गरीब और जरूरतमंद परिवार सरकारी सस्ती गल्ला दुकानों और वेयरहाउसों पर निर्भर हैं, वहां मूंग दाल में मिट्टी मिलाकर उसे खपाने का प्रयास अत्यंत गंभीर अपराध माना जा रहा है। 28 करोड़ से अधिक की इस हेराफेरी में शामिल तत्वों की पहचान करना और उन्हें कानूनी सजा दिलाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पुलिस अधीक्षक और संबंधित थाना प्रभारी ने स्पष्ट किया है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया है और तकनीकी निगरानी के साथ-साथ मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया गया है।
इनाम की घोषणा के संबंध में पुलिस ने अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति के पास फरार जिला प्रबंधक या वेयरहाउस संचालक के ठिकाने, उनकी गतिविधियों या उनके सहयोगियों के बारे में कोई भी विश्वसनीय जानकारी है, तो वह तुरंत पुलिस को अवगत कराएं। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी और सटीक जानकारी के आधार पर आरोपियों की गिरफ्तारी होने पर निर्धारित इनाम राशि प्रदान की जाएगी। पुलिस का कहना है कि जनसहयोग के बिना ऐसे संगठित आर्थिक अपराधों का पर्दाफाश करना कठिन होता है, इसलिए स्थानीय समुदाय से सक्रिय सहयोग की अपेक्षा की जा रही है।
जांच अधिकारियों ने बताया कि फरार आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए जा चुके हैं और उनके बैंक खातों व संपत्तियों की कुर्की की कार्यवाही भी विचाराधीन है। इसके अलावा, उनके मोबाइल लोकेशन, डिजिटल फुटप्रिंट्स और यात्रा इतिहास की निरंतर निगरानी की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि आरोपी राज्य छोड़कर अन्य स्थानों पर शरण ले सकते हैं, जिसके मद्देनजर पड़ोसी जिलों और राज्यों की पुलिस से भी समन्वय स्थापित किया गया है। 68 दिन की देरी को पुलिस अपनी विफलता मानने के बजाय इसे एक जटिल जांच प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है, लेकिन साथ ही यह भी स्वीकार कर रही है कि अब त्वरित कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है।
नर्मदापुरम मूंग घोटाला मध्य प्रदेश में खाद्य सुरक्षा और भंडारण व्यवस्था में खामियों को उजागर करने वाला एक ताजा उदाहरण है। 28.14 करोड़ रुपये की इस वित्तीय क्षति की भरपाई और दोषियों को सलाखों के पीछे पहुंचाना अब पुलिस और प्रशासन के समक्ष एक प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका है। तीसरे आरोपी की आत्महत्या ने इस मामले में मानवीय और नैतिक आयाम भी जोड़ दिए हैं, जिससे जांच एजेंसियों पर जिम्मेदारी और बढ़ गई है। आने वाले दिनों में इनाम की घोषणा और intensified दबिश का क्या असर होता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल, पुलिस सभी संभव संसाधनों का उपयोग करके फरार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में लाने के लिए प्रतिबद्ध है और उम्मीद जताई जा रही है कि शीघ्र ही इस बहुचर्चित घोटाले का पूर्ण खुलासा हो सकेगा।

