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Tue, Oct 6, 2026Updated 1:30 PM IST
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मुजफ्फरपुर पुलिस वेतन घोटाला: 7 करोड़ के फर्जीवाड़े में महिला सिपाही बेबी कुमारी दोषी करार, अकाउंटेंट ने पत्नी और दो सिपाहियों के खातों में भेजी थी रकम

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मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में सामने आए सात करोड़ रुपये के बहुचर्चित पुलिस वेतन घोटाले में विशेष निगरानी कोर्ट-2 ने अपना फैसला सुना दिया है। अदालत ने इस मामले में आरोपित महिला सिपाही बेबी कुमारी को दोषी करार देते हुए उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का आदेश दिया है। विशेष निगरानी कोर्ट-2 के न्यायाधीश सुमन कुमार दिवाकर ने बेबी कुमारी को आय से अधिक संपत्ति रखने और सरकारी राशि में हेरफेर करने से जुड़े गंभीर आरोपों में दोषी पाया है। अब अदालत द्वारा इस मामले में सजा की अवधि तय की जाएगी। यह मामला मुजफ्फरपुर पुलिस विभाग के वेतन भुगतान प्रणाली में हुई बड़ी अनियमितताओं और वित्तीय धोखाधड़ी से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है, जिसने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया था।

इस घोटाले की जांच और अदालती कार्यवाही के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे वित्तीय खेल में एक अकाउंटेंट की अहम भूमिका रही है। जांच में यह बात स्पष्ट रूप से सामने आई कि उक्त अकाउंटेंट ने सरकारी खजाने से गबन की गई भारी रकम को सीधे तौर पर अपनी पत्नी और दो अन्य सिपाहियों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया था। यह राशि लगभग सात करोड़ रुपये बताई जा रही है। सरकारी कर्मचारियों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया में इस तरह की भारी हेराफेरी और फर्जी खातों में राशि भेजने का यह मामला पुलिस विभाग की आंतरिक वित्तीय निगरानी प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

इस मामले की सबसे चर्चित और हैरान करने वाली बात यह रही कि इतनी बड़ी रकम निकालने के लिए किसी जटिल नेटवर्क या कई बैंकों का सहारा नहीं लिया गया, बल्कि जांच में यह पाया गया कि लाखों रुपये की निकासी रोजाना एक ही एटीएम (ATM) मशीन से की जाती थी। प्रतिदिन एक ही एटीएम से लाखों रुपये की निकासी होने का यह क्रम लगातार चलता रहा, फिर भी समय रहते इस अनियमितता की ओर संबंधित बैंक या पुलिस विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान नहीं गया। यह तथ्य इस घोटाले की योजनाबद्ध तरीके से की गई प्लानिंग और सिस्टम की कमियों को उजागर करता है। एक ही एटीएम से रोजाना इतनी बड़ी रकम निकाले जाने के बावजूद इसे रोकने में व्यवस्था पूरी तरह विफल रही।

विशेष निगरानी कोर्ट-2 के न्यायाधीश सुमन कुमार दिवाकर की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों, गवाहों के बयानों और जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों का गहन अध्ययन करने के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने बेबी कुमारी को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने और सरकारी राशि में हेरफेर करने के आरोपों में दोषी ठहराया है। फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद अदालत ने महिला सिपाही को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का निर्देश दिया। हालांकि, अभी तक सजा की अवधि घोषित नहीं की गई है। अदालत अब इस मामले में सुनवाई करते हुए सजा की मात्रा तय करेगी, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

बता दें कि मुजफ्फरपुर पुलिस वेतन घोटाला बिहार के उन बड़े वित्तीय फर्जीवाड़ों में शुमार है जिसमें पुलिस विभाग के ही कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई है। वेतन भुगतान की प्रक्रिया में शामिल अकाउंटेंट द्वारा अपने परिजनों और सहकर्मियों के खातों में सरकारी राशि डायवर्ट करना, यह दर्शाता है कि विभागीय स्तर पर वित्तीय लेनदेन की जांच और ऑडिट में कितनी बड़ी चूक हुई। सात करोड़ रुपये की यह राशि किसी एक दिन में नहीं, बल्कि लंबे समय तक चले इस खेल के जरिए इकट्ठा की गई थी। रोजाना एक ही एटीएम से निकासी का पैटर्न यह साबित करता है कि आरोपियों ने अपने काम को अंजाम देने के लिए एक ही तरीके को बार-बार अपनाया और उन्हें पकड़े जाने का कोई भय नहीं था।

इस मामले में दोषी करार दी गई महिला सिपाही बेबी कुमारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला भी दर्ज था। जब जांच एजेंसियों ने उनकी और उनके करीबियों की संपत्तियों का ब्योरा खंगाला, तो सरकारी वेतन और वास्तविक संपत्ति के बीच भारी अंतर पाया गया। यही कारण है कि अदालत ने सरकारी राशि में हेरफेर के साथ-साथ आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोपों को भी सही माना और उन्हें दोषी करार दिया।

अब इस ऐतिहासिक फैसले के बाद पुलिस विभाग और प्रशासनिक महकमे में यह चर्चा तेज हो गई है कि अदालत दोषी पाई गई महिला सिपाही और इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों को क्या सजा देगी। सजा की अवधि तय होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस प्रकार के वित्तीय अपराधों को लेकर न्यायपालिका का रुख कितना सख्त है। मुजफ्फरपुर के इस वेतन घोटाले ने एक बार फिर सरकारी विभागों में आंतरिक वित्तीय नियंत्रण और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। विशेष निगरानी कोर्ट-2 का यह फैसला उन सभी के लिए एक संदेश है जो सरकारी खजाने में सेंध लगाने का प्रयास करते हैं। अदालत के इस निर्णय के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया और सजा की घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।