अयोध्या में दुर्गा पूजा से ठीक पहले मूर्तिकार उत्तम पाल फरार, 110 से अधिक समितियों से एडवांस लेने के बाद प्रतिमाएं अधूरी

अयोध्या। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में नवरात्रि और दुर्गा पूजा के पावन पर्व के आरंभ होने से ठीक पूर्व शहर की धार्मिक एवं सामाजिक व्यवस्था में एक गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शहर की 110 से अधिक दुर्गा पूजा समितियों ने आरोप लगाया है कि मूर्तिकार उत्तम पाल ने प्रतिमा निर्माण के लिए उनसे लाखों रुपये की एडवांस राशि प्राप्त करने के बाद कार्य बीच में ही छोड़ दिया है और वर्तमान में वे फरार हैं। इस घटनाक्रम के कारण सैकड़ों पूजा स्थलों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं अधूरी अवस्था में पड़ी हुई हैं, जिससे त्योहार की तैयारियों में भारी बाधा पहुंची है और समितियों के सदस्यों तथा श्रद्धालुओं में तीव्र निराशा व आक्रोश व्याप्त है।
यह मामला अयोध्या नगर क्षेत्र की विभिन्न पूजा समितियों से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने समय पर प्रतिमाएं स्थापित करने हेतु मूर्तिकार उत्तम पाल पर विश्वास जताया था। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, उत्तम पाल ने बड़ी संख्या में समितियों से अनुबंध किया था और प्रतिमा निर्माण कार्य शुरू करने के नाम पर उनसे पूर्व भुगतान के रूप में महत्वपूर्ण धनराशि ली थी। यह एडवांस राशि कई समितियों के लिए काफी बड़ी थी, क्योंकि दुर्गा पूजा जैसे आयोजनों में मिट्टी, सामग्री, शिल्पकारों की मजदूरी और अन्य खर्चों के लिए पहले से ही बजट का आवंटन किया जाता है। हालांकि, जब प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने का समय निकट आया, तो मूर्तिकार ने कार्य पूरा नहीं किया और संपर्क से बाहर हो गए। अब जब त्योहार सिर पर है, तो समितियों के पास न तो पूरी प्रतिमाएं हैं और न ही उन्हें दिए गए एडवांस का कोई हिसाब या वापसी की उम्मीद दिखाई दे रही है।
प्रभावित पूजा समितियों का कहना है कि उन्होंने उत्तम पाल पर इसलिए भरोसा किया था क्योंकि वे अयोध्या क्षेत्र में मूर्ति निर्माण कार्य से जुड़े रहे हैं और पूर्व में भी कुछ कार्यों में उनकी भागीदारी रही थी। ऐसे में समितियों को यह आशंका नहीं थी कि इतनी बड़ी संख्या में ऑर्डर लेकर एडवांस लेने के बाद मूर्तिकार फरार हो जाएगा। कई समितियों ने बताया कि उन्होंने मूर्तिकार को बार-बार संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनका कोई प्रत्युत्तर नहीं मिला। कार्यस्थल पर जाकर देखने पर पता चला कि प्रतिमाएं केवल प्राथमिक ढांचे तक ही सीमित हैं और उन पर विस्तृत कलात्मक कार्य, रंग-रोगन व अलंकरण शेष है। दुर्गा पूजा में प्रतिमा की पूर्णता का विशेष धार्मिक महत्व होता है, इसलिए अधूरी प्रतिमाओं के साथ पूजा संपन्न करना न केवल कठिन है, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था से भी जुड़ा संवेदनशील विषय है।
इस संकट के मद्देनजर प्रभावित समितियां अब वैकल्पिक व्यवस्थाओं की तलाश में जुटी हुई हैं। कुछ समितियों ने अन्य मूर्तिकारों से संपर्क साधा है ताकि शेष बचे समय में किसी प्रकार प्रतिमाओं को पूरा किया जा सके या नई प्रतिमाओं की व्यवस्था की जा सके। हालांकि, त्योहार के इतने निकट होने के कारण कुशल मूर्तिकारों की उपलब्धता सीमित है और जो उपलब्ध हैं, उनकी मांगें भी अधिक हैं। इसके अतिरिक्त, जिन समितियों ने पहले ही बड़ी एडवांस राशि दे दी है, उनके पास पुनः नई प्रतिमाओं के लिए पर्याप्त धनराशि जुटाने में भी कठिनाई हो रही है। कई छोटी समितियों के लिए यह स्थिति आर्थिक रूप से अत्यंत दबाव वाली है, क्योंकि उनके पास सीमित संसाधन हैं और एडवांस की हानि ने उनके बजट को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
अयोध्या में दुर्गा पूजा का आयोजन ऐतिहासिक व सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां प्रतिवर्ष सैकड़ों पंडाल स्थापित होते हैं और लाखों श्रद्धालु दर्शनार्थ पहुंचते हैं। ऐसे में मूर्तिकार के फरार होने की यह घटना केवल कुछ समितियों तक सीमित न रहकर समग्र आयोजन की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है। समितियों का कहना है कि यदि मूर्तिकार ने जानबूझकर इतनी बड़ी संख्या में समितियों से एडवांस लिया और फिर कार्य नहीं किया, तो यह केवल अनुबंध का उल्लंघन नहीं, बल्कि एक संगठित धोखाधड़ी का मामला हो सकता है। प्रभावित पक्षों ने इस संबंध में उचित कार्रवाई की मांग की है ताकि दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कदम उठाए जाएं और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
वहीं, दूसरी ओर, स्थानीय प्रशासन और पुलिस से भी अपेक्षा की जा रही है कि वे इस मामले में त्वरित संज्ञान लें। समितियों ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने जो एडवांस राशि दी है, वह उनकी कमाई और चंदे से जुटाई गई जनता की गाढ़ी कमाई है। यदि मूर्तिकार उत्तम पाल के विरुद्ध ठोस जांच नहीं होती और राशि की वसूली या क्षतिपूर्ति का मार्ग स्पष्ट नहीं होता, तो इससे न केवल वर्तमान त्योहार प्रभावित होगा, बल्कि आगामी वर्षों में भी पूजा समितियों और कारीगरों के बीच विश्वास का संकट गहरा सकता है। फिलहाल, अयोध्या की 110 से अधिक समितियां इस अनिश्चितता के बीच दुर्गा पूजा को सफल बनाने हेतु सभी संभव प्रयास कर रही हैं, लेकिन मूर्तिकार के फरार होने से उत्पन्न हुई यह स्थिति उनके लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

