सऊदी अरब में जल्द तैनात होगी पाकिस्तान और तुर्किये की सेना, हूती विद्रोहियों के खिलाफ मक्का गठबंधन की आपात बैठक में हुआ बड़ा फैसला

रियाद। पाकिस्तान और तुर्किये जल्द ही अपनी सेना सऊदी अरब में तैनात करने जा रहे हैं। यह अहम फैसला सोमवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में आयोजित मक्का गठबंधन की एक आपात बैठक में लिया गया है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों के खिलाफ संयुक्त रणनीति तैयार करना और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाना था। इस बैठक में तीनों देशों ने हूती विद्रोहियों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए एक साथ आने और सैन्य सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।
मक्का गठबंधन की इस आपात बैठक में पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के शीर्ष सैन्य एवं रक्षा अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में इस बात पर गंभीरता से चर्चा हुई कि हूती विद्रोहियों की गतिविधियों ने न केवल यमन बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर दिया है। ऐसे में तीनों देशों ने मिलकर इस चुनौती का सामना करने का निर्णय लिया है। पाकिस्तान और तुर्किये की सेनाओं की सऊदी अरब में तैनाती को इस दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है। हालांकि, इस तैनाती की सटीक समयसीमा, सैनिकों की संख्या या उनके संचालन के दायरे को लेकर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
इस सैन्य तैनाती के फैसले को इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मात्र पिछले महीने ही पाकिस्तान ने सऊदी अरब की मदद से इनकार कर दिया था। उस समय पाकिस्तान द्वारा सऊदी अरब को सीधी सैन्य मदद देने से मना किए जाने के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर कुछ तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। लेकिन अब रियाद में हुई इस आपात बैठक के बाद पाकिस्तान का रुख बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान ने अब हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब का साथ देने और अपनी सेना भेजने पर सहमति व्यक्त कर दी है। यह बदलाव दर्शाता है कि क्षेत्रीय सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए इस्लामाबाद ने अपने रणनीतिक रुख में संशोधन किया है।
गौरतलब है कि यमन में हूती विद्रोहियों का संकट पिछले कई वर्षों से बना हुआ है। ये विद्रोही लगातार सऊदी अरब और उसके सहयोगी देशों के लिए सुरक्षा चुनौतियां पैदा करते रहे हैं। हूती विद्रोहियों द्वारा किए जाने वाले हमलों, विशेषकर मिसाइल और ड्रोन हमलों ने सऊदी अरब की सीमाओं और उसके महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को बार-बार निशाना बनाया है। इन हमलों के कारण सऊदी अरब को अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता महसूस हो रही थी। इसी पृष्ठभूमि में मक्का गठबंधन की यह आपात बैठक बुलाई गई, ताकि हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक ठोस और संयुक्त कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की जा सके।
तुर्किये का इस गठबंधन में शामिल होना और सऊदी अरब में सेना तैनात करने पर सहमत होना भी मध्य पूर्व की भू-राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। तुर्किये और सऊदी अरब के बीच पिछले कुछ समय से संबंधों में सुधार का दौर चल रहा है। दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय रिश्तों को सामान्य करने और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। अब हूती विद्रोहियों के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनाने का फैसला इन दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का एक स्पष्ट संकेत है। तुर्किये की सैन्य क्षमता और क्षेत्रीय अनुभव को देखते हुए, उसकी भागीदारी इस गठबंधन को और अधिक मजबूती प्रदान करेगी।
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच ऐतिहासिक रूप से गहरे धार्मिक, आर्थिक और रक्षा संबंध रहे हैं। पाकिस्तानी सेना ने अतीत में भी सऊदी अरब की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और दोनों देशों के बीच नियमित रूप से संयुक्त सैन्य अभ्यास होते रहे हैं। पिछले महीने मदद से इनकार करने के बावजूद, पाकिस्तान का अब इस गठबंधन में वापसी करना और सैन्य तैनाती पर सहमत होना यह साबित करता है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी अभी भी बरकरार है। पाकिस्तान के लिए सऊदी अरब के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना आर्थिक और कूटनीतिक दोनों दृष्टिकोणों से अत्यंत जरूरी है।
मक्का गठबंधन की इस बैठक के बाद तीनों देशों के बीच सैन्य समन्वय को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, इस पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं। हूती विद्रोहियों की ओर से इस नए सैन्य गठबंधन और विदेशी सेनाओं की तैनाती पर कैसी प्रतिक्रिया आती है, यह भी देखा जाना बाकी है। फिलहाल, रियाद में ली गई इस बैठक के फैसलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब हूती विद्रोहियों के खतरे को लेकर पूरी तरह से गंभीर हैं और वे इससे निपटने के लिए हर संभव सैन्य विकल्प पर काम कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम से यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में खाड़ी क्षेत्र और यमन में सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों में तेजी आ सकती है।

