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Tue, Oct 6, 2026Updated 2:53 PM IST
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ग्वालियर: वर्क फ्रॉम होम के नाम पर महिला से 8.55 लाख की ठगी, रिकवरी का झांसा देकर दूसरे गिरोह ने ऐंठे 50 हजार

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ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में साइबर अपराधियों ने एक महिला को दोहरे जाल में फंसाकर भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। ताजा मामला सामने आया है जिसमें पहले एक गिरोह ने महिला को ‘वर्क फ्रॉम होम’ यानी घर बैठे ऑनलाइन टास्क पूरा करने का लालच देकर 8.55 लाख रुपए की ठगी को अंजाम दिया। इसके बाद जब पीड़ित महिला ने अपने ठगे गए पैसों को वापस पाने के लिए इंटरनेट पर मदद तलाशनी शुरू की, तो एक अन्य गिरोह ने उसे अपने चंगुल में फंसा लिया। इस दूसरे गिरोह ने खुद को साइबर एक्सपर्ट और वकील बताते हुए रकम की रिकवरी कराने का झांसा दिया और महिला से 50 हजार रुपए और ऐंठ लिए। इस तरह महिला को कुल मिलाकर 9 लाख रुपए से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा। यह घटना बढ़ते साइबर अपराधों और ठगी के बाद होने वाले फर्जी रिकवरी स्कैम की गंभीरता को दर्शाती है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्वालियर निवासी पीड़ित महिला को कुछ समय पहले सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए एक संदेश प्राप्त हुआ था। इस संदेश में उन्हें घर बैठे आसान ऑनलाइन टास्क पूरा करके अच्छी कमाई करने का प्रस्ताव दिया गया था। ‘वर्क फ्रॉम होम’ का यह प्रस्ताव महिला को आकर्षक लगा और उन्होंने इसमें अपनी रुचि दिखाई। ठगों ने महिला का विश्वास जीतने के लिए शुरुआत में कुछ छोटे टास्क दिए और उन्हें उसका भुगतान भी किया, जिससे महिला पूरी तरह से उनके जाल में फंस गई।

विश्वास जीतने के बाद ठगों ने बड़ी रकम कमाने का लालच देते हुए महिला से विभिन्न खातों में निवेश या पेमेंट करने को कहा। ठगों ने महिला को अलग-अलग चरणों में कई बार भुगतान करने के लिए निर्देशित किया। महिला ने ठगों की बातों में आकर कुल 8.55 लाख रुपए उनके बताए गए बैंक खातों या डिजिटल माध्यमों से ट्रांसफर कर दिए। इतनी बड़ी रकम ट्रांसफर करने के बाद जब महिला ने अपने काम का पूरा भुगतान या अपनी मूल राशि वापस मांगी, तो ठगों ने संपर्क करना बंद कर दिया। इसके बाद महिला को अहसास हुआ कि वह ‘वर्क फ्रॉम होम’ के नाम पर चल रहे एक सुनियोजित साइबर फ्रॉड का शिकार हो गई है और उसके 8.55 लाख रुपए डूब चुके हैं।

इतनी बड़ी रकम गंवाने के बाद महिला बेहद परेशान और हताश हो गई। अपनी मेहनत की कमाई वापस पाने की जद्दोजहद में उसने इंटरनेट सर्च इंजन गूगल पर यह खोजना शुरू किया कि साइबर ठगी में गई रकम को कैसे वापस लाया जा सकता है। गूगल पर सर्च करने के दौरान उसे कुछ ऐसे लोगों के नंबर या वेबसाइट मिलीं, जो खुद को साइबर ठगी से बचाव और रिकवरी का विशेषज्ञ बताते थे। महिला ने बिना किसी पुष्टि के उन नंबरों पर संपर्क किया।

दूसरी तरफ मौजूद शातिर ठगों ने महिला की मजबूरी और हताशा का पूरा फायदा उठाया। इस दूसरे गिरोह के सदस्यों ने खुद को साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ (साइबर एक्सपर्ट) और कानूनी मदद देने वाला वकील बताया। उन्होंने महिला को भरोसा दिलाया कि उनकी टीम के पास ऐसी तकनीक और कानूनी तरीके हैं जिनके जरिए ठगों द्वारा उड़ाए गए 8.55 लाख रुपए को वापस ट्रैक करके उसके बैंक खाते में रिकवर किया जा सकता है। ठगों ने महिला को यह भी झांसा दिया कि इस काम में उन्हें पुलिस या साइबर सेल की मदद लेने की जरूरत नहीं है और वे गुप्त रूप से उसकी रकम वापस दिलवा देंगे।

रकम वापस मिलने की उम्मीद में महिला ने इन फर्जी साइबर एक्सपर्ट्स और वकीलों की हर बात मान ली। दूसरे गिरोह ने रिकवरी प्रक्रिया शुरू करने के नाम पर प्रोसेसिंग फीस, सर्वर चार्ज, या कानूनी शुल्क जैसे विभिन्न बहाने बनाकर महिला से अतिरिक्त पैसे की मांग की। महिला ने अपने बाकी बचे पैसे में से 50 हजार रुपए इन तथाकथित एक्सपर्ट्स को ट्रांसफर कर दिए। 50 हजार रुपए लेने के बाद यह दूसरा गिरोह भी गायब हो गया। न तो महिला की 8.55 लाख की रकम वापस आई और न ही ये फर्जी एक्सपर्ट दोबारा संपर्क में आए। जब दोनों तरफ से कोई जवाब नहीं मिला, तब जाकर महिला को समझ आया कि वह एक के बाद एक दो अलग-अलग गिरोहों की ठगी का शिकार हो चुकी है।

यह मामला साइबर ठगी के क्षेत्र में सक्रिय एक नए और खतरनाक चलन को उजागर करता है जिसे ‘रिकवरी स्कैम’ कहा जाता है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जब कोई व्यक्ति ऑनलाइन ठगी का शिकार होता है, तो वह घबराहट में इंटरनेट पर तुरंत समाधान खोजने लगता है। ठगों के गिरोह इसी मनोविज्ञान का फायदा उठाते हैं। वे गूगल पर फर्जी विज्ञापन या वेबसाइटें बनाकर रखते हैं, जिनमें ‘साइबर क्राइम रिकवरी’, ‘हैक्ड अकाउंट रिकवरी’ या ‘लॉस्ट मनी रिकवरी’ जैसे कीवर्ड होते हैं। ये गिरोह अक्सर पहले ठगी करने वाले गिरोह से अलग होते हैं, लेकिन कभी-कभी ये दोनों आपस में जुड़े भी हो सकते हैं।

पुलिस और साइबर सेल के अधिकारी लगातार आम जनता से अपील करते हैं कि यदि किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी होती है, तो गूगल पर मौजूद अनजान नंबरों या फर्जी एक्सपर्ट्स पर कतई भरोसा न करें। भारत सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा, cybercrime.gov.in पोर्टल पर जाकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराना ही एकमात्र सुरक्षित और कानूनी विकल्प है। कोई भी प्राइवेट व्यक्ति, वकील या एक्सपर्ट सीधे बैंक खातों से पैसा रिकवर करने का दावा करता है, तो वह ठग ही होता है।

ग्वालियर की इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि साइबर अपराधी कितने शातिर तरीके से काम कर रहे हैं। ‘वर्क फ्रॉम होम’ के नाम पर टास्क देने वाले फ्रॉड आजकल सबसे ज्यादा प्रचलित हैं, जिनमें व्हाट्सएप या टेलीग्राम के जरिए लोगों को जोड़कर यूट्यूब वीडियो लाइक करने, होटल बुकिंग करने या प्रोडक्ट रेटिंग देने जैसे काम बताए जाते हैं। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसे किसी भी लुभावने प्रस्ताव से बचें और बिना सत्यापन के किसी भी अनजान खाते में पैसे ट्रांसफर न करें। पीड़ित महिला की शिकायत के आधार पर अब स्थानीय पुलिस और साइबर सेल द्वारा मामले की जांच की जा रही है ताकि दोनों गिरोहों का पता लगाया जा सके।