पंजाब पुलिस के पूर्व DIG हरचरण सिंह भुल्लर रिश्वत मामले में CBI ने कोर्ट में पेश किया विजिटर रिकॉर्ड, बचाव पक्ष ने की मुलाकात से इनकार

मोहाली। पंजाब पुलिस के निलंबित उप महानिरीक्षक (DIG) हरचरण सिंह भुल्लर से जुड़े आठ लाख रुपये के रिश्वत मामले में सोमवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अदालत में एक अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश किया। सीबीआई ने मोहाली के सेक्टर-74 स्थित भुल्लर के कैंप ऑफिस का विजिटर एंट्री रिकॉर्ड कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया है। इस रिकॉर्ड में शिकायतकर्ता के उक्त कार्यालय में पहुंचने की एंट्री दर्ज पाई गई है। हालांकि, बचाव पक्ष ने इस दावे का विरोध करते हुए कहा है कि शिकायतकर्ता और पूर्व डीआईजी भुल्लर के बीच कोई मुलाकात नहीं हुई थी। यह मामला मोहाली की विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई के लिए चल रहा है, जहां दोनों पक्षों के बीच दस्तावेजों की वैधता और तथ्यों को लेकर तीखी बहस देखने को मिली।
इस मामले की पृष्ठभूमि पर गौर करें तो पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी रहे हरचरण सिंह भुल्लर पर आठ लाख रुपये की रिश्वत लेने का गंभीर आरोप है। इसी आरोप के आधार पर केंद्रीय जांच ब्यूरो ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान ही भुल्लर को उनके पद से निलंबित कर दिया गया था। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से जो विजिटर रिकॉर्ड पेश किया गया, उसे अभियोजन पक्ष अपनी जांच का एक ठोस सबूत मान रहा है। सीबीआई का तर्क है कि यह रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि शिकायतकर्ता व्यक्ति उस दिन पूर्व डीआईजी के सेक्टर-74 स्थित कैंप ऑफिस में गया था और उसकी एंट्री कार्यालय के आधिकारिक रजिस्टर में दर्ज की गई थी।
सीबीआई द्वारा पेश किए गए इस दस्तावेज को मामले में एक निर्णायक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। अभियोजन पक्ष का कहना है कि विजिटर रिकॉर्ड एक सरकारी दस्तावेज होता है, जिसे किसी भी सरकारी कार्यालय में आने-जाने वाले लोगों की निगरानी और सुरक्षा के उद्देश्य से रखा जाता है। ऐसे में, इस रिकॉर्ड में शिकायतकर्ता का नाम और उसकी एंट्री दर्ज होना यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि दोनों पक्षों के बीच आमना-सामना हुआ था। सीबीआई ने अदालत से अनुरोध किया कि इस दस्तावेज को साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जाए, क्योंकि यह रिश्वत मांगे जाने या दिए जाने की घटना के समय शिकायतकर्ता की उपस्थिति की पुष्टि करता है।
दूसरी ओर, हरचरण सिंह भुल्लर के बचाव पक्ष के वकीलों ने सीबीआई द्वारा पेश किए गए इस विजिटर रिकॉर्ड पर सवाल उठाए हैं। बचाव पक्ष ने अदालत में स्पष्ट रूप से दावा किया कि शिकायतकर्ता और पूर्व डीआईजी भुल्लर के बीच कोई मुलाकात नहीं हुई थी। बचाव पक्ष का तर्क है कि केवल विजिटर रजिस्टर में किसी नाम का दर्ज हो जाना यह सिद्ध नहीं करता कि उस व्यक्ति की वास्तव में संबंधित अधिकारी से कोई बातचीत हुई या कोई लेन-देन हुआ। उन्होंने संभावना जताई कि शिकायतकर्ता कार्यालय परिसर में आया होगा, लेकिन उसकी भुल्लर से कोई सीधी मुलाकात नहीं हुई। बचाव पक्ष ने इस दस्तावेज को भ्रामक बताते हुए इसके आधार पर बनाए जा रहे अभियोजन के पूरे ताने-बाने को चुनौती दी है।
मोहाली के सेक्टर-74 में स्थित यह कैंप ऑफिस उस समय हरचरण सिंह भुल्लर द्वारा इस्तेमाल किया जाता था, जब वे पंजाब पुलिस में उप महानिरीक्षक के पद पर तैनात थे। पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के पास अक्सर अपने मुख्य कार्यालय के अलावा ऐसे कैंप ऑफिस होते हैं, जहां से वे दैनिक कार्यवाही और जनता से जुड़े मामलों का निपटारा करते हैं। इसी कैंप ऑफिस में रिश्वत के लेन-देन की घटना होने का आरोप है, जिसके बाद सीबीआई ने कार्रवाई करते हुए भुल्लर के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आठ लाख रुपये की रिश्वत का यह मामला पंजाब पुलिस विभाग के भीतर भी चर्चा का विषय रहा है, क्योंकि एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पर इस तरह के भ्रष्टाचार के आरोप लगना विभाग की छवि के लिए चिंताजनक माना गया था।
सोमवार को हुई इस सुनवाई ने मामले में कई नए पहलुओं को सामने ला दिया है। एक तरफ सीबीआई अपने साक्ष्यों को मजबूत करने के लिए सरकारी रिकॉर्ड का सहारा ले रही है, वहीं दूसरी तरफ बचाव पक्ष उन साक्ष्यों की व्याख्या पर आपत्ति जता रहा है। अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अब इस बात पर फैसला होना बाकी है कि विजिटर रिकॉर्ड को कितनी प्रामाणिकता दी जाएगी और क्या यह रिकॉर्ड भुल्लर के खिलाफ लगे रिश्वत के आरोपों को साबित करने में पूरी तरह कारगर सिद्ध होगा या नहीं।
गौरतलब है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत ऐसे मामलों की जांच करती है जिनमें लोक सेवकों पर रिश्वत लेने या मांगने के आरोप होते हैं। इस मामले में भी सीबीआई ने तकनीकी साक्ष्यों और दस्तावेजी सबूतों को इकट्ठा करने के बाद ही अदालत में अपना पक्ष रखा है। पूर्व डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर फिलहाल निलंबित हैं और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ यह आपराधिक मामला भी चल रहा है। अदालत में इस मामले की अगली सुनवाई में और साक्ष्य पेश किए जाने की संभावना है, जिसके बाद इस रिश्वत मामले की दिशा अधिक स्पष्ट हो सकेगी। वंदे भारत न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला पंजाब पुलिस के उच्च अधिकारियों में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कानूनी परीक्षण बन गया है।

