Tue, 06 Oct 20262:50 PM
Tue, Oct 6, 2026Updated 2:50 PM IST
होम › उत्तर प्रदेश

अयोध्या: जमीन विवाद में मारपीट और जातिसूचक गाली के मामले में 532 दिन बाद कोर्ट के आदेश पर चौकी प्रभारी सहित तीन पर एफआईआर

WhatsAppFacebookX

अयोध्या। उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में एक संवेदनशील भूमि विवाद से जुड़े मामले में न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। इनायतनगर थाना क्षेत्र के सिकिया गांव में जमीन पर निर्माण का विरोध करने को लेकर हुई मारपीट, जातिसूचक शब्दों का प्रयोग और धमकी देने के आरोप में घटना के 532 दिन बाद एफआईआर दर्ज की गई है। यह प्राथमिकी पीड़ित पक्ष द्वारा न्यायालय में गुहार लगाने के बाद कोर्ट के स्पष्ट आदेश पर दर्ज की गई है। इस पूरे मामले में सबसे अधिक चर्चा का विषय यह है कि जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, उनमें उस समय के हैरिंग्टनगंज चौकी प्रभारी वीरेंद्र कुमार पाल का नाम भी शामिल है। पुलिस अधिकारी पर ही इस तरह के गंभीर आरोप लगने और कोर्ट के आदेश पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होने से स्थानीय स्तर पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला अयोध्या जिले के इनायतनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सिकिया गांव से जुड़ा हुआ है। सिकिया गांव में एक जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवादित जमीन पर जब एक पक्ष द्वारा निर्माण कार्य कराया जाने लगा, तो दूसरे पक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया। जमीन पर निर्माण के इसी विरोध को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई, जिसके बाद स्थिति ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि विरोध करने वाले पक्ष के साथ मारपीट की गई। इसके अलावा, पीड़ित पक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके साथ जातिसूचक गालियों का इस्तेमाल किया गया और उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई।

इस घटना के तुरंत बाद पीड़ित पक्ष ने न्याय पाने के लिए स्थानीय पुलिस से संपर्क किया था। हालांकि, आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और न ही पीड़ित की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई। पीड़ित पक्ष का कहना है कि उन्होंने कई बार थाने के चक्कर लगाए, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई न होते देख और न्याय की उम्मीद में पीड़ित पक्ष ने अंततः न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। पीड़ित ने कोर्ट में आवेदन देकर बताया कि किस प्रकार उनके साथ मारपीट की गई, जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर अपमानित किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई, जबकि पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई संज्ञान नहीं लिया।

पीड़ित पक्ष की याचिका और प्रस्तुत तथ्यों पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया। कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने बिना किसी ठोस कारण के प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार किया, जो उचित नहीं था। न्यायालय ने अपने आदेश में इनायतनगर थाना पुलिस को निर्देश दिया कि वह इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करे। कोर्ट के इस आदेश के बाद, घटना के पूरे 532 दिन बीत जाने के बाद, इनायतनगर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। यह अवधि दर्शाती है कि पीड़ित पक्ष को न्याय के लिए कितना लंबा संघर्ष करना पड़ा और प्रशासनिक स्तर पर उनकी शिकायत कितने समय तक अनसुनी रही।

इस मामले में दर्ज की गई एफआईआर में कुल तीन लोगों को आरोपी बनाया गया है। इन तीनों आरोपियों में सबसे प्रमुख नाम तत्कालीन हैरिंग्टनगंज चौकी प्रभारी वीरेंद्र कुमार पाल का है। चौकी प्रभारी जैसे जिम्मेदार पुलिस पद पर रहते हुए किसी नागरिक के साथ मारपीट, जातिसूचक गाली-गलौज और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगना पुलिस विभाग के लिए भी शर्मनाक स्थिति पैदा करता है। आम तौर पर पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों का दायित्व कानून व्यवस्था बनाए रखना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है, लेकिन इस मामले में एक पुलिस अधिकारी पर ही आपराधिक और सामाजिक अपराध से जुड़े आरोप लगे हैं। अन्य दो आरोपियों की पहचान और उनकी भूमिका की जांच अब पुलिस द्वारा की जाएगी।

इस पूरे प्रकरण में जातिसूचक गाली देने का आरोप विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। भारत में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत किसी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर अपमानित करना या गाली देना एक गैर-जमानती और अत्यंत गंभीर अपराध माना जाता है। ऐसे मामलों में पुलिस को त्वरित और सख्त कार्रवाई करने का निर्देश होता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो आरोपियों के खिलाफ इस विशेष अधिनियम के तहत भी कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

अयोध्या जिले के सिकिया गांव में हुई यह घटना और उसके बाद 532 दिनों तक पुलिस की निष्क्रियता स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। न्यायालय के आदेश के बाद एफआईआर तो दर्ज हो गई है, लेकिन अब पीड़ित पक्ष और स्थानीय लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस इस मामले में कितनी निष्पक्षता और तेजी से जांच आगे बढ़ाती है। चूंकि इस मामले में एक तत्कालीन पुलिस अधिकारी स्वयं आरोपी हैं, इसलिए यह भी देखना होगा कि क्या जांच किसी उच्च अधिकारी या स्वतंत्र एजेंसी को सौंपी जाती है ताकि पीड़ित को पूर्ण न्याय मिल सके। फिलहाल, इनायतनगर थाना पुलिस ने कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया है और आगे की विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।