Tue, 06 Oct 20263:40 PM
Tue, Oct 6, 2026Updated 3:40 PM IST
होम › मध्य प्रदेश

विदिशा जिला अस्पताल में नसबंदी के बाद 31 वर्षीय महिला की मौत, परिजनों ने तीन इंजेक्शन लगाने और इलाज में लापरवाही का लगाया गंभीर आरोप

WhatsAppFacebookX

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले से एक बेहद दुखद और गंभीर मामला सामने आया है। विदिशा के जिला अस्पताल में नसबंदी (स्टरलाइजेशन) ऑपरेशन कराने के बाद 31 वर्षीय एक महिला की मौत हो गई है। मृतक महिला की पहचान संगीता लोधी के रूप में हुई है। इस घटना के बाद से जिला अस्पताल में हड़कंप मचा हुआ है और परिजनों ने चिकित्सकों तथा अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में भारी लापरवाही बरतने का गंभीर आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि नसबंदी ऑपरेशन के कुछ ही घंटों बाद जब महिला को पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई, तो उसे राहत देने के लिए लगातार तीन इंजेक्शन लगाए गए, जिसके बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ गई और अंततः उसकी मौत हो गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, संगीता लोधी नसबंदी कराने के उद्देश्य से विदिशा जिला अस्पताल पहुंची थीं। 31 वर्षीय संगीता का अस्पताल में निर्धारित प्रक्रिया के तहत नसबंदी का ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के तुरंत बाद शुरू में सब कुछ सामान्य प्रतीत हो रहा था, लेकिन ऑपरेशन के कुछ ही घंटों बाद संगीता ने अपने पेट में असहनीय और तेज दर्द होने की शिकायत अस्पताल के स्टाफ से की। परिजनों ने बताया कि दर्द की शिकायत के बाद महिला की जांच करने या उसके दर्द के वास्तविक कारण का सटीक पता लगाने के बजाय अस्पताल कर्मियों द्वारा उसे लगातार तीन इंजेक्शन दे दिए गए।

परिवार वालों का आरोप है कि इन तीन इंजेक्शनों के लगने के बाद संगीता लोधी की तबीयत अचानक और तेजी से बिगड़ने लगी। उसकी स्थिति इतनी अधिक गंभीर हो गई कि उसे संभालना मुश्किल हो गया। इसके बाद भी, परिजनों का दावा है कि समय पर उचित और बेहतर चिकित्सा उपचार नहीं मिल सका, जिसके चलते संगीता ने दम तोड़ दिया। इस पूरी घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजन बार-बार यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर नसबंदी जैसे सामान्य ऑपरेशन के बाद पेट दर्द की शिकायत पर बिना ठोस जांच के सीधे तीन इंजेक्शन क्यों लगाए गए? क्या ये इंजेक्शन महिला की मौत का मुख्य कारण बने?

परिजनों ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि जिला अस्पताल के डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ ने संगीता लोधी के इलाज में घोर लापरवाही बरती है। उनका कहना है कि अगर पेट दर्द की शिकायत के बाद महिला की सही तरीके से जांच की जाती और समय रहते उचित चिकित्सीय कदम उठाए जाते, तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। परिजनों ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि दोषी चिकित्सकों और कर्मचारियों की पहचान की जा सके। साथ ही, उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसा दुख न सहना पड़े।

विदिशा जिला अस्पताल में हुई इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप की स्थिति है। नसबंदी के बाद महिला की मौत का मामला बेहद संवेदनशील माना जाता है। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में जांच के आदेश दिए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, जांच किस स्तर पर होगी और इसके लिए किस अधिकारी या समिति को जिम्मेदारी सौंपी गई है, इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक और विस्तृत पुष्टि नहीं हो पाई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से इस संबंध में विस्तृत बयान की प्रतीक्षा की जा रही है।

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि नसबंदी सरकार के परिवार नियोजन कार्यक्रम का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है और राज्य भर के सरकारी अस्पतालों में इसे नियमित रूप से किया जाता है। ऐसे में जिला अस्पताल जैसी प्रमुख स्वास्थ्य सुविधा में इस प्रकार की घटना का होना न केवल चिकित्सा प्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि आम जनता में सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता भी पैदा करता है। मरीजों और उनके तीमारदारों का सरकारी अस्पतालों पर जो भरोसा होता है, ऐसी घटनाएं उस विश्वास को गहराई से ठेस पहुंचाती हैं।

फिलहाल, विदिशा जिला अस्पताल में नसबंदी के बाद 31 वर्षीय संगीता लोधी की मौत का यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर अब यह बड़ी जिम्मेदारी है कि वे इस मामले की पारदर्शी तरीके से जांच करें। परिजनों के आरोपों में कितनी सच्चाई है, तीन इंजेक्शन कौन से थे और उन्हें किस आधार पर दिया गया, तथा ऑपरेशन के बाद की देखभाल में क्या कमियां रहीं, इन सभी पहलुओं की गहन जांच की जानी जरूरी है। वंदे भारत न्यूज़ इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और जांच रिपोर्ट आने पर या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी होने पर इस खबर को विस्तार से अपडेट किया जाएगा।