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Tue, Oct 6, 2026Updated 3:40 PM IST
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देवास: नीलगाय के तीन बच्चों पर आवारा कुत्तों का हमला, दो को उठा ले गए; किसान ने घायल शावक को बचाया

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मध्य प्रदेश के देवास जिले में वन्यजीवों की सुरक्षा और आवारा पशुओं के बढ़ते खतरे से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। देवास के मेंडकीचक गांव में सुपर कॉरिडोर के समीप स्थित एक खेत में नीलगाय के तीन छोटे बच्चों पर आवारा कुत्तों के एक झुंड ने जानलेवा हमला कर दिया। इस हिंसक घटना में कुत्तों ने नीलगाय के दो बच्चों को अपने जबड़ों में दबोचकर अज्ञात स्थान पर ले गए, जबकि तीसरा बच्चा बुरी तरह घायल हो गया। स्थानीय किसान विष्णु प्रकाश की त्वरित सूझबूझ और साहसिक हस्तक्षेप के कारण तीसरे घायल शावक की जान बच पाई। इस घटना ने क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना मेंडकीचक गांव के उस इलाके में हुई जो सुपर कॉरिडोर के पास स्थित है। यह क्षेत्र वन्यजीवों की आवाजाही का मार्ग माना जाता है, लेकिन यहां आवारा कुत्तों का आतंक भी समय-समय पर देखने को मिलता रहा है। घटना के समय नीलगाय के तीन शावक खेत में मौजूद थे, तभी आवारा कुत्तों के एक समूह ने उन पर अचानक धावा बोल दिया। कुत्तों ने बिना किसी भय के इन नन्हे वन्यजीवों को निशाना बनाया। हमला इतना तीव्र और व्यवस्थित था कि कुछ ही क्षणों में दो शावकों को कुत्ते उठाकर ले जाने में सफल रहे। ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुत्तों द्वारा ले जाए गए दोनों बच्चों का अभी तक कोई पता नहीं चल सका है और उनके जीवित होने की संभावनाएं कम बताई जा रही हैं।

इस दर्दनाक मंजर के बीच किसान विष्णु प्रकाश ने असाधारण मानवीय संवेदना और साहस का परिचय दिया। जब कुत्ते तीसरे शावक पर हमला कर रहे थे और उसे गहरा घाव पहुंचा चुके थे, तब विष्णु प्रकाश ने अपनी जान की परवाह किए बिना बीच-बचाव किया। उन्होंने समय रहते कुत्तों को खदेड़ा और घायल अवस्था में पड़े नीलगाय के बच्चे को सुरक्षित निकाला। रिपोर्टों के मुताबिक, बचाए गए शावक के पैर में कुत्तों के काटने से गहरा घाव हुआ है। किसान के इस त्वरित कार्य ने न केवल एक बेजुबान जीवन को बचाया, बल्कि स्थानीय समुदाय में वन्यजीवों के प्रति सहानुभूति और संरक्षण की भावना को भी रेखांकित किया। यदि किसान समय पर नहीं पहुंचते, तो तीनों ही शावकों की मौत हो सकती थी।

घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी ली। वन विभाग ने इस संबंध में अपडेट जारी करते हुए घटना की पुष्टि की है। हालांकि, कुत्तों द्वारा ले जाए गए दो शावकों के बारे में विभाग की ओर से अभी तक कोई ठोस जानकारी या बरामदगी की पुष्टि नहीं की गई है। वन विभाग द्वारा घायल शावक के उपचार और उसके पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है। सुपर कॉरिडोर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस प्रकार की घटनाएं वन विभाग के लिए भी एक चुनौती हैं, क्योंकि ऐसे क्षेत्रों में वन्यजीवों और मानवीय गतिविधियों के बीच टकराव की संभावनाएं हमेशा बनी रहती हैं।

यह घटना देवास और आसपास के क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को भी उजागर करती है। सुपर कॉरिडोर के पास खुले खेतों और वन्य क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के झुंड का जमावड़ा वन्यजीवों, विशेषकर छोटे और असहाय शावकों के लिए घातक सिद्ध हो रहा है। नीलगाय पहले से ही कई क्षेत्रों में किसानों के लिए फसल नुकसान का कारण मानी जाती है, लेकिन उनके शावकों पर इस प्रकार के हमले पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन और वन्यजीव सुरक्षा में खामियों की ओर इशारा करते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सुपर कॉरिडोर के पास आवारा कुत्तों की संख्या में वृद्धि हुई है और वे अब वन्यजीवों को अपना शिकार बनाने में संकोच नहीं कर रहे हैं।

वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के समक्ष अब यह चुनौती है कि सुपर कॉरिडोर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के नियंत्रण और वन्यजीवों की सुरक्षा के बीच कैसे संतुलन स्थापित किया जाए। किसान विष्णु प्रकाश द्वारा दिखाई गई सजगता अनुकरणीय है, लेकिन केवल व्यक्तिगत प्रयासों से वन्यजीवों की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों में स्थानीय समुदाय की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है, साथ ही यह भी कि सरकारी तंत्र को ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा उपायों को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। फिलहाल, बचाए गए शावक के स्वास्थ्य लाभ की कामना की जा रही है, जबकि लापता दो शावकों के संबंध में अनिश्चितता बनी हुई है।