मोतिहारी: महिला की संदिग्ध मौत से पहले का CCTV वीडियो आया सामने, हाथ-पैर बांधकर मारपीट करते दिखे पड़ोसी; 20 दिन बाद दर्ज हुई FIR

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में एक महिला की संदिग्ध मौत के मामले में नए तथ्य सामने आए हैं। 16 सितंबर 2026 को अपने घर में फंदे से लटकी मिली महिला की मौत को लेकर अब सीसीटीवी फुटेज प्राप्त हुआ है, जिसमें मौत से पूर्व उसकी बेरहमी से पिटाई किए जाने के दृश्य कैद हैं। इस वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि महिला के हाथ-पैर रस्सी से बांधे गए थे और एक पुरुष सहित दो महिलाएं उसके साथ मारपीट कर रही थीं। यह घटनाक्रम महिला की मौत की गुत्थी सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, क्योंकि प्रारंभिक तौर पर इसे आत्महत्या माना जा रहा था, लेकिन अब हत्या की आशंका बलवती हो गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक घटना मोतिहारी शहर क्षेत्र की है। 16 सितंबर 2026 को जब महिला का शव उसके ही आवास में फंदे से लटका पाया गया था, तो स्थानीय स्तर पर इसे आत्महत्या का मामला समझा गया था। हालांकि, घटना के ठीक 20 दिन बाद सामने आए इस वीडियो फुटेज ने मामले को पूरी तरह से बदल दिया है। वीडियो में दिख रहा दृश्य अत्यंत विचलित करने वाला है और यह स्पष्ट करता है कि महिला की मौत से पहले उसके साथ हिंसक व्यवहार किया गया था। आरोपियों द्वारा महिला को रस्सी से बांधकर रखना और फिर उस पर हमला करना यह दर्शाता है कि यह कोई सामान्य विवाद नहीं, बल्कि एक सुनियोजित या अत्यधिक क्रूर कृत्य था।
इस मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू पुलिस कार्रवाई में देरी का है। घटना 16 सितंबर को हुई थी, लेकिन प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने में पूरे 20 दिन का समय लगा। रिपोर्टों के मुताबिक, मृतका के भाई ने काफी मशक्कत और वीडियो साक्ष्य सामने आने के बाद ही थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। आमतौर पर ऐसी गंभीर घटनाओं में त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है, लेकिन तीन सप्ताह तक एफआईआर दर्ज न होना कई सवाल खड़े करता है। क्या यह देरी सबूत मिटाने या दबाव बनाने के प्रयासों का परिणाम थी, या फिर पुलिस की ओर से प्रारंभिक जांच में लापरवाही बरती गई, यह जांच का विषय है। पीड़ित परिवार को न्याय पाने के लिए इतनी लंबी प्रतीक्षा क्यों करनी पड़ी, इस पर भी प्रशासनिक उत्तरदायित्व तय होने की आवश्यकता है।
वीडियो फुटेज में जो व्यक्ति और दो महिलाएं मारपीट करते हुए दिखाई दे रहे हैं, उनकी पहचान को लेकर पुलिस जांच जारी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ये सभी मृतका के पड़ोसी बताए जा रहे हैं। यदि यह पुष्टि हो जाती है कि आरोपी पड़ोसी ही हैं, तो यह मामला आपसी रंजिश या किसी पुराने विवाद से जुड़ा हो सकता है। अक्सर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भूमि विवाद, पारिवारिक कलह या व्यक्तिगत दुश्मनी ऐसे अपराधों का कारण बनते हैं। फिलहाल, पुलिस ने वीडियो को जब्त कर लिया है और इसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि फुटेज छेड़छाड़ रहित है और इसे अदालत में वैध सबूत के रूप में पेश किया जा सके।
मोतिहारी पुलिस ने अब इस मामले में धाराओं को बदलकर हत्या और सबूत मिटाने संबंधी संगीन अपराधों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सीसीटीवी फुटेज एक ठोस सबूत है जो बचाव पक्ष के इस दावे को खारिज कर सकता है कि महिला ने स्वयं अपनी जीवनलीला समाप्त की थी। जब किसी व्यक्ति के हाथ-पैर बंधे हों और उसकी पिटाई की जा रही हो, तो उसके बाद उसी व्यक्ति का फंदे से लटकना स्वाभाविक मौत या आत्महत्या नहीं मानी जा सकती। यह दृश्य सीधे तौर पर हत्या या हत्या के लिए उकसाने और यातना देने की ओर इंगित करता है।
बिहार में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के बढ़ते ग्राफ के बीच मोतिहारी की यह घटना चिंताजनक है। खासकर तब जब आरोपी जान-पहचान वाले या पड़ोसी हों, तो महिलाओं की सुरक्षा को लेकर समाज में व्याप्त खामोशी और डर का माहौल भी उजागर होता है। 20 दिन तक एफआईआर दर्ज न होना इस बात का संकेत है कि पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाया गया होगा या उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा नहीं था। अब जबकि वीडियो सार्वजनिक हो चुका है और मीडिया की नजर इस मामले पर है, प्रशासन पर निष्पक्ष और तेज जांच का दबाव बढ़ गया है।
पुलिस अधीक्षक और संबंधित थानाध्यक्ष से यह अपेक्षा की जा रही है कि वे न केवल नामजद आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित करें, बल्कि यह भी स्पष्ट करें कि एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी के लिए कौन जिम्मेदार है। वीडियो फुटेज की मौजूदगी ने इस मामले को संवेदनशील बना दिया है। यदि जांच में पाया जाता है कि पुलिसकर्मी या कोई अन्य व्यक्ति इस देरी में शामिल था, तो उनके खिलाफ भी विभागीय और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल, पूरा मोतिहारी जिला इस मामले में न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है और वीडियो साक्ष्य ने उम्मीद जगाई है कि दोषियों को सजा मिलेगी।

