Tue, 06 Oct 20264:26 PM
Tue, Oct 6, 2026Updated 4:26 PM IST
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धार जनसुनवाई में 8 गांवों के किसानों ने नर्मदा लिंक से डैम और जलस्रोत भरने की मांग रखी, रबी फसल को लेकर चिंता जताई

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धार। मध्य प्रदेश के धार जिले में सोमवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान क्षेत्र के आठ गांवों के किसानों ने प्रशासन के समक्ष एक महत्वपूर्ण मांग रखी है। किसानों ने नर्मदा लिंक परियोजना के जरिए क्षेत्र के धामणकुंड और वलकुंडा डैम सहित अन्य जलस्रोतों को भरने की मांग की है। इस वर्ष मानसून के दौरान बारिश की स्थिति पिछले साल की तुलना में काफी कम रही है, जिसके चलते खेतों और जलस्रोतों में पानी की भारी कमी देखी जा रही है। किसानों ने प्रशासन के सामने यह चिंता व्यक्त की है कि यदि समय रहते जलस्रोतों में पानी नहीं पहुंचाया गया, तो आगामी रबी फसल गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।

जनसुनवाई में पहुंचे किसानों ने अधिकारियों को बताया कि इस साल बारिश सामान्य से कम होने के कारण खेतों में नमी नहीं बची है। धामणकुंड और वलकुंडा डैम, जो क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं, उनमें जलस्तर चिंताजनक रूप से नीचे चला गया है। इन दोनों डैमों पर निर्भर आठ गांवों के किसानों का कहना है कि यदि नर्मदा लिंक से पानी नहीं छोड़ा गया, तो रबी सीजन में बुवाई करना लगभग असंभव हो जाएगा। किसानों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष वर्षा बहुत कम हुई है, जिसका सीधा असर भूजल स्तर और सतही जलस्रोतों पर पड़ा है।

रबी फसल मुख्य रूप से गेहूं, चना, मसूर और सरसो जैसी फसलों के लिए जानी जाती है, जिनकी बुवाई अक्टूबर से नवंबर के बीच शुरू होती है। किसानों ने जनसुनवाई में चिंता जताई कि खेतों में पर्याप्त नमी न होने और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध न होने की स्थिति में वे रबी फसल की बुवाई कैसे कर पाएंगे। उन्होंने बताया कि जलस्रोत सूखने की कगार पर हैं और कुओं तथा तालाबों में भी पानी नहीं बचा है। ऐसे में नर्मदा लिंक से पानी लाना ही एकमात्र विकल्प बचा है, ताकि धामणकुंड और वलकुंडा डैम को भरा जा सके और किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल सके।

धार जिला मुख्यालय पर नियमित रूप से आयोजित होने वाली जनसुनवाई में ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। इस बार आठ गांवों के किसानों का एक साथ पहुंचकर नर्मदा लिंक से जुड़ी सिंचाई की मांग करना दर्शाता है कि जिले के इस हिस्से में सूखे जैसे हालात बन रहे हैं। किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों से अनुरोध किया है कि उनकी मांग को गंभीरता से लिया जाए और उच्च स्तर पर इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। किसानों ने कहा कि यदि समय रहते नर्मदा लिंक से पानी नहीं दिया गया, तो न केवल फसलें बर्बाद होंगी, बल्कि पशुओं के लिए चारा और पीने के पानी का संकट भी उत्पन्न हो सकता है।

किसानों ने जनसुनवाई के दौरान अपने आवेदन पत्र भी अधिकारियों को सौंपे हैं। इन आवेदनों में धामणकुंड और वलकुंडा डैम की वर्तमान स्थिति का विवरण देते हुए नर्मदा लिंक परियोजना के माध्यम से पानी छोड़ने का अनुरोध किया गया है। किसानों का प्रतिनिधिमंडल इस बात पर जोर दे रहा था कि पिछले साल अच्छी बारिश हुई थी, जिससे डैम और जलस्रोत भरे हुए थे, लेकिन इस साल बारिश की कमी ने स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है। खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं और जलस्रोत तेजी से सूख रहे हैं।

जनसुनवाई में मौजूद अधिकारियों ने किसानों की मांगों को सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि उनके आवेदनों को संबंधित विभागों तक पहुंचाया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि नर्मदा लिंक से पानी छोड़ने का निर्णय तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अधीन होता है, जिसके लिए उच्च स्तर पर अनुमति लेनी होती है। हालांकि, किसानों की ओर से उठाई गई चिंताओं को देखते हुए प्रशासन द्वारा इस मामले में जल्द उचित कदम उठाए जाने की संभावना जताई जा रही है।

धार जिले के ग्रामीण इलाकों में कृषि मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर करती है। जब मानसून कमजोर रहता है, तो किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिंचाई की होती है। नर्मदा लिंक परियोजना को इसी उद्देश्य से बनाया गया था कि सूखाग्रस्त या कम बारिश वाले क्षेत्रों में नर्मदा नदी का पानी पहुंचाकर कृषि को सहारा दिया जा सके। आठ गांवों के किसानों की यह मांग इस बात का प्रमाण है कि वर्तमान में क्षेत्र को इस परियोजना के पानी की कितनी सख्त जरूरत है।

किसानों ने यह भी कहा कि यदि रबी फसल प्रभावित हुई, तो उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर गहरा संकट आएगा। कई किसानों ने पहले ही बीज और खाद की व्यवस्था कर ली है, लेकिन खेतों में पानी न होने के कारण वे बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। जनसुनवाई में किसानों ने प्रशासन से अपील की कि धामणकुंड और वलकुंडा डैम में नर्मदा लिंक का पानी जल्द से जल्द छोड़ा जाए, ताकि क्षेत्र के जलस्रोत रिचार्ज हो सकें और किसान बेखौफ होकर रबी फसल की बुवाई कर सकें। प्रशासन की ओर से इस मांग पर क्या ठोस कार्रवाई होगी, इस पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।