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Tue, Oct 6, 2026Updated 5:29 PM IST
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बड़वानी: नर्सिंग कॉलेज ने 20 छात्राओं के मूल दस्तावेज रोके, कोर्स पूरा होने के 4 महीने बाद भी नहीं लौटाए; विरोध में जलाईं ज्ञापन की प्रतियां

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बड़वानी। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में स्थित बड़वानी इंस्टिट्यूट ऑफ नर्सिंग कॉलेज से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें कॉलेज प्रबंधन पर छात्राओं के मूल शैक्षणिक दस्तावेज रोकने का आरोप लगाया गया है। कॉलेज के जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी (GNM) बैच 2020-21 की 20 से अधिक छात्राओं ने शुक्रवार को कलेक्टर कार्यालय के मुख्य गेट पर धरना-प्रदर्शन किया। इन छात्राओं का आरोप है कि उनका निर्धारित कोर्स पूरा हो चुका है, लेकिन इसके चार महीने बीत जाने के बाद भी कॉलेज प्रबंधन ने उनकी मूल मार्कशीट और अन्य महत्वपूर्ण शैक्षणिक दस्तावेज उन्हें वापस नहीं लौटाए हैं। इसी मांग को लेकर छात्राओं ने अपना विरोध दर्ज कराया और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए ज्ञापन की प्रतियां भी जलाईं।

छात्राओं द्वारा किए गए इस प्रदर्शन के दौरान तनाव का माहौल देखा गया। GNM बैच 2020-21 की इन छात्राओं ने बताया कि उन्होंने अपना कोर्स पूरी तरह से पूरा कर लिया है। नियमानुसार, कोर्स समाप्त होने के बाद संस्थान को छात्रों के मूल दस्तावेज बिना किसी देरी के लौटाने चाहिए। हालांकि, छात्राओं का कहना है कि कोर्स पूरा हुए चार महीने का समय गुजर चुका है, फिर भी बड़वानी इंस्टिट्यूट ऑफ नर्सिंग कॉलेज का प्रबंधन उनके दस्तावेज वापस करने से बच रहा है। जब छात्राओं ने अपने दस्तावेज मांगे, तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, जिसके बाद वे सड़क पर उतरने और प्रशासन से गुहार लगाने के लिए मजबूर हुईं।

शुक्रवार को आयोजित इस धरना-प्रदर्शन में शामिल सभी छात्राएं बड़वानी कलेक्टर कार्यालय के मुख्य गेट पर एकत्र हुईं। उन्होंने अपने हाथों में प्लेकार्ड और अपनी मांगों से संबंधित नारे लिखे हुए थे। छात्राओं ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि कॉलेज प्रबंधन जानबूझकर उनकी मूल मार्कशीट और अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों को रोक कर रखा हुआ है। इन दस्तावेजों के बिना छात्राओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। प्रदर्शन के दौरान अपनी बात को मजबूती से रखने और प्रशासन का ध्यान खींचने के लिए छात्राओं ने ज्ञापन की प्रतियों को आग के हवाले कर दिया। यह कदम उनकी उस निराशा और हताशा को दर्शाता है, जो पिछले कई महीनों से दस्तावेज न मिलने के कारण उनके मन में घर कर गई थी।

मूल शैक्षणिक दस्तावेजों, विशेषकर मार्कशीट का किसी भी छात्र के करियर में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान होता है। नर्सिंग जैसे संवेदनशील और जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में कार्य करने के लिए मूल दस्तावेजों का होना अनिवार्य माना जाता है। GNM (जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी) का कोर्स पूरा करने के बाद ये छात्राएं स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान देने के लिए तैयार होती हैं। लेकिन मूल दस्तावेज न होने के कारण ये 20 से अधिक छात्राएं न तो किसी सरकारी या निजी अस्पताल में नौकरी के लिए आवेदन कर पा रही हैं और न ही उच्च शिक्षा के लिए किसी अन्य संस्थान में प्रवेश ले सकती हैं। चार महीने की इस देरी ने उनके करियर को सीधे तौर पर प्रभावित किया है।

धरना-प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगी। छात्राओं ने कलेक्टर कार्यालय के माध्यम से जिला प्रशासन से अपील की है कि बड़वानी इंस्टिट्यूट ऑफ नर्सिंग कॉलेज के प्रबंधन को तत्काल निर्देश दिए जाएं, ताकि उनकी रोकी गई मूल मार्कशीट और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज बिना किसी शर्त के उन्हें वापस सौंप दिए जाएं। छात्राओं ने यह भी कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से लड़ती रहेंगी और जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, वे पीछे नहीं हटेंगी।

उल्लेखनीय है कि शैक्षणिक संस्थानों द्वारा छात्रों के मूल दस्तावेज रोकने का मुद्दा समय-समय पर देश के विभिन्न हिस्सों में सामने आता रहा है। कई बार संस्थान फीस बकाया या अन्य प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए दस्तावेज रोक लेते हैं, लेकिन इससे छात्रों के करियर पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की वजह से यह मामला हमेशा विवादों में रहता है। बड़वानी के इस मामले में अभी तक कॉलेज प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। यह स्पष्ट नहीं है कि कॉलेज ने किन कारणों से 20 से अधिक छात्राओं के दस्तावेज चार महीने तक रोक रखे हैं।

वहीं, दूसरी ओर जिला प्रशासन के समक्ष अब यह चुनौती है कि वह इस मामले में दोनों पक्षों को सुनकर उचित और त्वरित समाधान निकाले। छात्राओं के भविष्य को देखते हुए प्रशासन पर जल्द कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है। कलेक्टर कार्यालय के बाहर हुए इस प्रदर्शन ने स्थानीय स्तर पर काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का ध्यान अब इस ओर है कि क्या जिला प्रशासन इन छात्राओं की समस्या का समाधान कर पाता है या यह मामला आगे और तूल पकड़ता है। फिलहाल, छात्राएं अपने मूल दस्तावेजों की वापसी की मांग पर अड़ी हुई हैं और प्रशासन से न्याय की उम्मीद लगाए बैठी हैं।