डोल मेले की सांस्कृतिक संध्या में नन्हे मलखमबाजों ने जीता दिल, देशभक्ति गीतों पर गूंजे भारत माता की जय के नारे

राजस्थान के बारां जिले में आयोजित ऐतिहासिक डोल मेले की सांस्कृतिक संध्या इस बार बेहद यादगार और रोमांच से भरपूर रही। मेले के दौरान आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में एक तरफ जहां देशभक्ति गीतों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों के मन को देशप्रेम की भावना से ओतप्रोत कर दिया, वहीं दूसरी ओर सोनी टीवी फेम जवाहर मलखम ग्रुप के नन्हे कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए शानदार मलखंब प्रदर्शन ने सभी का दिल जीत लिया। इस भव्य सांस्कृतिक संध्या के दौरान पूरा माहौल ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष से गूंजता रहा और दर्शक देर रात तक इन प्रस्तुतियों का आनंद लेते रहे।
बारां का डोल मेला क्षेत्र का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पारंपरिक आयोजन है, जिसमें हर वर्ष बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले दर्शक शामिल होते हैं। इस मेले का अपना एक विशेष सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व है। मेले की इस सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ विधि-विधान के साथ गणेश वंदना से किया गया। हिंदू परंपराओं के अनुसार किसी भी शुभ कार्य या सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत भगवान गणेश की स्तुति के बिना अधूरी मानी जाती है। गणेश वंदना की इस प्रस्तुति ने मंच पर एक आध्यात्मिक और पवित्र वातावरण का निर्माण किया, जिसके बाद अन्य कलाकारों की प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत में ही दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी और सभी कलाकारों की प्रस्तुतियों को देखने के लिए उत्साहित थे।
गणेश वंदना के पश्चात मंच पर जाने-माने गायक विक्की भारती ने अपनी प्रस्तुति दी। सिंगर विक्की भारती ने एक से बढ़कर एक देशभक्ति गीत गाकर पूरे माहौल को राष्ट्रप्रेम के रंग में रंग दिया। उनके द्वारा गाए गए देशभक्ति गीतों ने दर्शकों के दिलों में जोश और ऊर्जा का संचार किया। जब मंच से देशभक्ति की धुनें गूंजीं, तो दर्शक दीर्घा में बैठे लोगों ने भी उनका भरपूर साथ दिया। विक्की भारती की आवाज में मौजूद मिठास और देशप्रेम की भावना ने उपस्थित हर व्यक्ति को प्रभावित किया। उनके गीतों के दौरान बीच-बीच में ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे भी लगाए गए, जिससे मेले का पूरा प्रांगण देशभक्ति के उच्च स्वरों से प्रतिध्वनित हो उठा। यह सांस्कृतिक संध्या का वह हिस्सा था जिसने दर्शकों को भावुक भी किया और गर्व से भर भी दिया।
इस सांस्कृतिक संध्या का सबसे मुख्य आकर्षण और चर्चा का केंद्र सोनी टीवी फेम जवाहर मलखम ग्रुप की प्रस्तुति रही। राष्ट्रीय टेलीविजन चैनल सोनी टीवी पर अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके इस प्रतिष्ठित ग्रुप के नन्हे मलखमबाजों ने जब मंच पर प्रवेश किया, तो दर्शकों की उत्सुकता चरम पर थी। मलखंब भारतीय परंपरा का एक अत्यंत कठिन और विशिष्ट खेल है, जिसमें लकड़ी के खंभे या रस्सी पर योग और जिम्नास्टिक की कलाओं का प्रदर्शन किया जाता है। जवाहर मलखम ग्रुप के छोटे-छोटे बच्चों ने अपने अद्भुत संतुलन, शारीरिक लचीलेपन और निडरता से ऐसे-ऐसे करतब दिखाए कि देखने वाले दंग रह गए।
नन्हे मलखमबाजों ने एक के बाद एक कई कठिन मुद्राएं और करतब प्रस्तुत किए। खंभे पर लटकना, हवा में उछलकर पुनः खंभे को पकड़ना और विभिन्न योगासनों का प्रदर्शन करना—इन सभी कलाओं को बच्चों ने जिस सहजता और परिपक्वता के साथ अंजाम दिया, उसने साबित कर दिया कि ये बच्चे किसी बड़े मंच के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सोनी टीवी जैसे राष्ट्रीय मंच पर पहले ही अपनी पहचान बना चुके इस ग्रुप के कलाकारों ने बारां के डोल मेले में भी वैसी ही उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया। उनकी इस शानदार प्रस्तुति के दौरान दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका निरंतर उत्साहवर्धन किया। बच्चों के साहस और कला को देखकर कई दर्शकों ने खुशी और आश्चर्य व्यक्त किया।
डोल मेले की यह सांस्कृतिक संध्या केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, बल्कि इसने समाज में देशभक्ति की भावना को जागृत करने और भारतीय पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने का भी महत्वपूर्ण कार्य किया। मलखंब जैसी पारंपरिक कला आज के आधुनिक दौर में कहीं न कहीं हाशिए पर जा रही है, लेकिन जवाहर मलखम ग्रुप जैसे संगठन और नन्हे कलाकार इसे फिर से लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। मेले में आए बुजुर्गों से लेकर युवाओं और बच्चों तक ने इस कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया।
बारां जिले के लिए डोल मेला हमेशा से एक बड़ा आयोजन रहा है, लेकिन इस बार की सांस्कृतिक संध्या ने इसकी गरिमा और आकर्षण को कई गुना बढ़ा दिया। विक्की भारती के देशभक्ति गीतों और जवाहर मलखम ग्रुप के रोमांचक मलखंब प्रदर्शन के समन्वय ने इस शाम को ऐतिहासिक बना दिया। कार्यक्रम के अंत तक दर्शकों का उत्साह बरकरार रहा और नन्हे मलखमबाजों ने सचमुच में बारां के लोगों का दिल जीत लिया। मेला समिति और आयोजकों द्वारा इस प्रकार के उच्च स्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन से स्थानीय कला और संस्कृति को एक नई दिशा मिलती है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को अपनी विरासत से जुड़ने का अवसर प्राप्त होता है।

