भूपेश बघेल का सरकार पर हमला- वेतन और पेंशन देने के लिए नहीं है पैसा, रिसाली नगर निगम चुनाव की बैठक में बोले- जनता उठ खड़ी हुई तो धनबल-बाहुबल नहीं चलेगा

छत्तीसगढ़ के दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में आगामी रिसाली नगर निगम चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है। इसी क्रम में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शामिल होकर कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया और मौजूदा राज्य सरकार पर तीखे प्रहार किए। बैठक में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्तमान सरकार के पास कर्मचारियों को तनख्वाह बांटने के लिए पैसा नहीं है और बुजुर्गों को पेंशन देने के लिए भी उसके पास धन की भारी कमी है। इसके साथ ही उन्होंने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए यह भी कहा कि यदि जनता सड़कों पर उठ खड़ी होती है, तो किसी भी राजनीतिक दल का धनबल और बाहुबल काम नहीं आएगा।
रिसाली नगर निगम चुनाव छत्तीसगढ़ की स्थानीय राजनीति में एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। इस नगरीय निकाय चुनाव को जीतने के लिए कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी द्वारा आयोजित इस विशेष बैठक का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर चुनावी रणनीति को मजबूत करना, बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को संगठित करना और मतदाताओं तक पार्टी की नीतियों व विचारधारा को प्रभावी ढंग से पहुंचाना था। इस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपस्थिति ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे पूरी निष्ठा, लगन और अनुशासन के साथ चुनावी मैदान में उतरें, क्योंकि रिसाली नगर निगम की यह सीट पार्टी की प्रतिष्ठा से जुड़ी हुई है।
बैठक को संबोधित करते हुए भूपेश बघेल ने राज्य की मौजूदा सरकार की आर्थिक नीतियों और उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की तिजोरी पूरी तरह से खाली हो चुकी है और वह अपने मूलभूत दायित्वों को पूरा करने में भी असफल साबित हो रही है। बघेल ने कहा कि सरकार के पास कर्मचारियों को समय पर वेतन देने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है, जिससे सरकारी कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है। इसके अलावा, उन्होंने पेंशनर्स की समस्याओं का भी जिक्र किया और कहा कि बुजुर्गों को उनका हक यानी पेंशन देने के लिए भी सरकार के पास फंड की कमी है। उनके अनुसार, जब कोई सरकार अपने कर्मचारियों को वेतन और बुजुर्गों को पेंशन देने में सक्षम नहीं रहती, तो उसका विकास का दावा खोखला साबित होता है। उन्होंने इसे सरकार की सबसे बड़ी विफलता करार दिया और कहा कि इस मुद्दे को कांग्रेस हर घर तक पहुंचाएगी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में केवल आर्थिक मुद्दों तक ही बात सीमित नहीं रखी, बल्कि राजनीति में बढ़ते धनबल और बाहुबल के प्रभाव पर भी गहरा प्रहार किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं और आम जनता से आह्वान किया कि वे लोकतंत्र की वास्तविक ताकत को पहचानें। बघेल ने कहा कि अगर जनता एकजुट होकर उठ खड़ी होती है और अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करती है, तो कोई भी धनबल या बाहुबल उसके सामने टिक नहीं सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसमें मतदाताओं की इच्छा ही सर्वोपरि होती है। उनके इस बयान को विपक्षी दलों पर एक सीधा और कड़ा संदेश माना जा रहा है, जो चुनावी प्रक्रियाओं में पैसे और ताकत के गलत इस्तेमाल पर निर्भर होते हैं।
रिसाली नगर निगम चुनाव को लेकर कांग्रेस की ओर से की जा रही तैयारियां इस बात का स्पष्ट संकेत देती हैं कि पार्टी इस चुनाव को हल्के में लेने को तैयार नहीं है। दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में कांग्रेस का ऐतिहासिक रूप से एक मजबूत आधार रहा है और पार्टी इस बार भी अपनी उसी पुरानी साख को बरकरार रखना चाहती है। बैठक में स्थानीय नेताओं और पदाधिकारियों ने भी अपनी-अपनी जिम्मेदारियों को लेकर विस्तृत चर्चा की। कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए कि वे जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनें, खासकर वेतन, पेंशन और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएं।
इस बैठक में भूपेश बघेल द्वारा दिए गए बयानों से यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस आगामी रिसाली नगर निगम चुनाव में सरकार की आर्थिक विफलताओं और जनविरोधी नीतियों को अपना प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने जा रही है। पार्टी का मानना है कि आम जनता वर्तमान व्यवस्था से काफी परेशान है और वह बदलाव के लिए कांग्रेस के साथ खड़ी होगी। कांग्रेस अब इन मुद्दों को लेकर घर-घर अभियान चलाने और जनसंपर्क बढ़ाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है।
आगामी दिनों में रिसाली नगर निगम चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां और तेज होने की पूरी संभावना है। कांग्रेस की इस बैठक और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तीखे बयानों ने स्थानीय राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सत्ताधारी दल इन आरोपों का किस प्रकार जवाब देता है और रिसाली की जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है। चुनावी बिगुल बजते ही सभी पार्टियों की रणनीतियां और स्पष्ट रूप से सामने आएंगी, लेकिन फिलहाल कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए चुनावी मोर्चे पर आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है।

