श्रीगंगानगर मेडिकल कॉलेज में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी को लेकर कलेक्ट्रेट के बाहर विरोध प्रदर्शन, आंदोलन उग्र करने की चेतावनी

श्रीगंगानगर। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में स्थित महाराजा गंगा सिंह मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ चिकित्सकों और अन्य स्टाफ की भारी कमी को लेकर स्थानीय लोगों ने तीखा विरोध प्रदर्शन किया है। मरीजों को समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाने से परेशान आमजन ने कलेक्ट्रेट के बाहर एकत्र होकर अपनी मांगें रखीं और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई। प्रदर्शनकारियों ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि उनकी बात नहीं मानी गई और मेडिकल कॉलेज में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं की गई, तो वे आंदोलन को उग्र रूप देने के लिए बाध्य होंगे।
महाराजा गंगा सिंह मेडिकल कॉलेज श्रीगंगानगर जिले का प्रमुख चिकित्सा संस्थान है, जहां न केवल शहर बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और दूरदराज के गांवों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। लेकिन लंबे समय से इस मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ चिकित्सकों और आवश्यक पैरामेडिकल स्टाफ की कमी बनी हुई है। इस कमी के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों और ओपीडी में आने वाले रोगियों को गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ रहा है। कई बार ऐसा देखा गया है कि मरीजों को सही समय पर विशेषज्ञ की सलाह या जांच नहीं मिल पाती, जिससे उनकी जान को खतरा उत्पन्न हो जाता है।
कलेक्ट्रेट के बाहर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, समाजसेवी और मरीजों के परिजन शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर पकड़ रखे थे, जिन पर मेडिकल कॉलेज में स्टाफ की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग लिखी हुई थी। लोगों का कहना था कि सरकार द्वारा लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करके मेडिकल कॉलेज का निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन वहां मरीजों का इलाज करने के लिए पर्याप्त संख्या में डॉक्टर और स्टाफ उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। यह सीधे तौर पर जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में कई महत्वपूर्ण विभागों में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के पद रिक्त पड़े हुए हैं। इन रिक्त पदों के कारण सामान्य बीमारियों के मरीजों को भी बेहतर इलाज के लिए जिला मुख्यालय से बाहर बीकानेर, जोधपुर या जयपुर जैसे बड़े शहरों में रेफर किया जा रहा है। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए दूसरे शहरों में जाकर इलाज कराना आर्थिक रूप से बेहद बोझिल होता है। ऐसे में कई मरीज समय पर इलाज न मिल पाने के कारण अपनी जान भी गंवा बैठते हैं। लोगों ने मांग की है कि मेडिकल कॉलेज में सभी विभागों के लिए तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की जाए ताकि मरीजों को उनके ही जिले में उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा मिल सके।
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यह विरोध प्रदर्शन केवल एक शुरुआत है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन और राज्य सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की नियुक्ति की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन से आगे बढ़कर उग्र आंदोलन करेंगे। लोगों ने कहा कि वे सड़कों पर उतरकर रास्ता जाम करने और मेडिकल कॉलेज का घेराव करने जैसे कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे, क्योंकि मरीजों की जान से बढ़कर कुछ भी नहीं है।
श्रीगंगानगर जिले की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहां एक सुसज्जित और पूरी तरह से कार्यशील मेडिकल कॉलेज की आवश्यकता हमेशा से रही है। यह जिला राजस्थान के उत्तरी हिस्से में स्थित है और यहां की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। हालांकि, स्टाफ की कमी के कारण महाराजा गंगा सिंह मेडिकल कॉलेज अपनी पूरी क्षमता के अनुसार काम नहीं कर पा रहा है। अस्पताल में मौजूद डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ भी पहले से ही अत्यधिक कार्यभार के तले दबा हुआ है, जिसका सीधा असर मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों ने यह भी मुद्दा उठाया कि मेडिकल कॉलेज में केवल डॉक्टरों की ही नहीं, बल्कि तकनीकी स्टाफ, नर्सिंग स्टाफ और अन्य सहायक कर्मचारियों की भी कमी है। बिना पर्याप्त सपोर्ट स्टाफ के विशेषज्ञ डॉक्टर भी अपना काम कुशलतापूर्वक नहीं कर सकते। इसलिए प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि चिकित्सकों के साथ-साथ अन्य आवश्यक स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया भी तेजी से पूरी की जाए।
फिलहाल, कलेक्ट्रेट के बाहर हुए इस विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर पूरे जिले की नजर टिकी हुई है। आमजन की मांग है कि अधिकारी केवल आश्वासन देने के बजाय जमीनी स्तर पर बदलाव लाएं और मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करें। यदि समय रहते प्रशासन ने इस गंभीर स्वास्थ्य संकट का समाधान नहीं निकाला, तो श्रीगंगानगर में आंदोलन और तेज होने की पूरी संभावना है, जिससे जिले की कानून व्यवस्था और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।

