उज्जैन महाकाल मंदिर में ई-कार्ट सेवा दो दिन से ठप, 42 में से अधिकांश गाड़ियां खराब; वीआईपी श्रद्धालुओं को प्राथमिकता देने का आरोप, बुजुर्ग और दिव्यांग पैदल चलने को मजबूर

उज्जैन। देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में शुमार उज्जैन स्थित बाबा महाकाल के मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शुरू की गई ई-कार्ट सेवा पिछले दो दिन से लगभग पूरी तरह से ठप पड़ी हुई है। इस सेवा के बंद होने से मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं, विशेषकर बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंदिर प्रशासन के बेड़े में कुल 42 ई-कार्ट मौजूद हैं, लेकिन इनमें से कई गाड़ियां खराब हो चुकी हैं। वर्तमान में मात्र पांच ई-कार्ट ही चालू हालत में बताई जा रही हैं, और उन पर भी यह गंभीर आरोप लगाया जा रहा है कि वे आम श्रद्धालुओं के बजाय केवल वीआईपी दर्शनार्थियों की सेवा में लगाई गई हैं।
महाकाल मंदिर में ई-कार्ट सेवा को लेकर जो विवाद सामने आया है, उसने श्रद्धालुओं में असंतोष का माहौल पैदा कर दिया है। वंदे भारत न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सेवा पिछले दो दिनों से प्रभावित है। मंदिर परिसर काफी विशाल है और मुख्य द्वार से गर्भगृह तक की दूरी तय करने में श्रद्धालुओं को खासी मशक्कत करनी पड़ती है। ऐसे में जिन भक्तों ने ई-कार्ट के सहारे दर्शन की योजना बनाई थी, उन्हें अब पैदल ही लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। सबसे अधिक कठिनाई उन बुजुर्ग श्रद्धालुओं और दिव्यांगजनों को हो रही है, जिनके लिए पैदल चलना शारीरिक रूप से अत्यंत कष्टदायक है। ये श्रद्धालु मंदिर प्रशासन से अपनी समस्या का समाधान करने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, महाकाल मंदिर प्रबंधन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा और उनकी परेशानी को कम करने के उद्देश्य से कुल 42 ई-कार्ट का बेड़ा तैयार किया गया था। इन इलेक्ट्रिक कार्ट्स को इसलिए लाया गया था ताकि दूर-दराज से आए भक्त, बीमार लोग, बुजुर्ग और दिव्यांग आसानी से बाबा महाकाल के दरबार में पहुंच सकें। हालांकि, समय के साथ इन गाड़ियों के रखरखाव में कमी के कारण इनमें से एक बड़ी संख्या खराब हो गई है। बताया जा रहा है कि 42 में से अधिकांश ई-कार्ट या तो तकनीकी खराबी का शिकार हैं या फिर उनकी बैटरी और अन्य पुर्जों में गंभीर समस्या आ गई है, जिसके कारण वे परिचालन के योग्य नहीं रह गई हैं। मंदिर प्रशासन की ओर से इन खराब गाड़ियों की मरम्मत या उनके प्रतिस्थापन को लेकर अभी तक कोई ठोस कदम उठाया जाता नहीं दिख रहा है, जिससे सेवा पूरी तरह से चरमरा गई है।
इस पूरे मामले में सबसे विवादित पहलू यह सामने आ रहा है कि जो गिनी-चुनी पांच ई-कार्ट अभी चालू हालत में बची हैं, वे भी आम जनता के लिए उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। श्रद्धालुओं का आरोप है कि इन पांचों गाड़ियों को विशेष रूप से वीआईपी श्रद्धालुओं और रसूखदार लोगों के लिए आरक्षित कर दिया गया है। जब आम भक्त, जिनमें कई ऐसे लोग शामिल हैं जिन्हें चलने-फिरने में गंभीर दिक्कत है, ई-कार्ट की मांग करते हैं, तो उन्हें यह कहकर टाल दिया जाता है कि सभी गाड़ियां खराब हैं या व्यस्त हैं। वहीं दूसरी ओर, वीआईपी दर्शनार्थियों को बिना किसी देरी के इन्हीं चालू गाड़ियों में बैठकर गर्भगृह तक ले जाया जा रहा है। इस दोहरे व्यवहार को लेकर मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं में नाराजगी स्पष्ट रूप से देखी जा रही है।
महाकाल मंदिर में हर दिन देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर का हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसे में यहां आने वाले हर श्रद्धालु के साथ समान व्यवहार किए जाने की अपेक्षा की जाती है। ई-कार्ट सेवा को लेकर उठा यह विवाद मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। आम श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान के दरबार में सभी समान होते हैं, ऐसे में वीआईपी और आम भक्तों के बीच इस प्रकार का भेदभाव उचित नहीं है। बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को पैदल चलने के लिए मजबूर करना उनकी आस्था और शारीरिक क्षमता दोनों के साथ खिलवाड़ माना जा रहा है।
मंदिर प्रशासन की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है। यह भी अनिश्चित है कि खराब पड़ी शेष ई-कार्ट की मरम्मत का कार्य कब तक पूरा किया जाएगा और सेवा को सामान्य रूप से कब बहाल किया जाएगा। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की मांग है कि मंदिर प्रबंधन को तत्काल प्रभाव से इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। खराब गाड़ियों को जल्द से जल्द दुरुस्त करवाया जाए और जो पांच गाड़ियां चालू हैं, उन्हें वीआईपी श्रद्धालुओं के बजाय सबसे पहले बुजुर्गों, दिव्यांगों और जरूरतमंद भक्तों के लिए उपलब्ध कराया जाए। जब तक मंदिर प्रशासन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक बाबा महाकाल के दरबार में आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को इस परेशानी से जूझना पड़ता रहेगा।

