खाद्य अफसरों को संबोधित करते डिप्टी सीएम राजेंद्र कुमार शुक्ल (फाइल फोटो)
विधानसभा के बजट सत्र के दौरान युवाओं में बढ़ती फास्ट फूड की लत और इससे बढ़ रही बीमारियों का मामला सामने आने के बाद सरकार एक्टिव मोड में आ गई है। अब हर जिले में हेल्दी और हाइजेनिक फूड स्ट्रीट की व्यवस्था पर फोकस किया जाएगा। डिप्टी सीएम और लोक स्वास्थ्य
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उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि स्ट्रीट फूड सेलर्स और खाद्य कारोबारियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा के बेहतर तरीकों के बारे में जागरूक किया जाए। जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल करने का प्रयास किया जाए, ताकि वे अपने क्षेत्रों में जन-जागरूकता का प्रसार कर सकें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि हर जिले में हेल्दी और हाइजेनिक फूड स्ट्रीट प्रमाणन के प्रयास किए जाएं। साथ ही अच्छी प्रैक्टिस की जानकारी भी दी जाए। एक माह बाद खाद्य पदार्थों की क्वालिटी में सुधार की समीक्षा कर कार्य योजना का निर्धारण किया जाएगा।
खाद्य गुणवत्ता-स्वच्छता को लेकर की थी समीक्षा
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने खाद्य गुणवत्ता और स्वच्छता बनाए रखने के लिए की जा रही कार्यवाही की पिछले दिनों समीक्षा की है। इस दौरान प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, आयुक्त फूड सेफ्टी संदीप यादव, नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन दिनेश कुमार मौर्य, संयुक्त नियंत्रक माया अवस्थी मौजूद रहे थे। तब मंत्री शुक्ल ने स्ट्रीट फूड विक्रेताओं और खाद्य संस्थानों को सही खाद्य पदार्थों का उपयोग करने और स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित करने को कहा था।
तीन नई संभागीय खाद्य एवं औषधि प्रयोगशालाएं बन रहीं
खाद्य पदार्थों की जांच में तेजी लाने के लिए इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में 3 नई संभागीय खाद्य एवं औषधि प्रयोगशालाओं का निर्माण किया जा रहा है। इंदौर और जबलपुर में मशीनें स्थापित कर मानव संसाधन उपलब्ध कराकर परीक्षण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। ग्वालियर में 60% सिविल कार्य पूरा हो चुका है। भोपाल में हाइटेक माइक्रो बॉयोलॉजी लैब का 80% निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है।
असुरक्षित खाद्य पदार्थों के मामले में आजीवन कारावास तक का है प्रावधान
- संयुक्त नियंत्रक माया अवस्थी ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत खाद्य पदार्थों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है।
- अवमानक खाद्य (सब स्टैंडर्ड) वह होता है जो निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करता लेकिन इससे मानव स्वास्थ्य को कोई खतरा नहीं होता। मिथ्या छाप खाद्य (मिस ब्रांड) वह खाद्य पदार्थ है जिसके संबंध में आवश्यक जानकारी या गुण-दोष लेवल पर सही तरीके से अंकित नहीं किए गए हों।
- असुरक्षित खाद्य (अनसेफ) ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं जिनकी प्रकृति, गुणवत्ता या सामग्री मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है।
- अधिनियम के तहत दो प्रकार के प्रकरण अभियोजित किए जाते हैं। सिविल प्रकरण (धारा 51 से 58 एवं 61, 63) में अवमानक या मिथ्या छाप से संबंधित अपराध या नियमों का उल्लंघन होने पर मामले न्याय निर्णायक अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं।
- आपराधिक प्रकरण (धारा 59, 60, 62, 64, 65) में असुरक्षित खाद्य या बिना लाइसेंस व्यापार से जुड़े मामले प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत होते हैं, जिनमें अधिकतम आजीवन कारावास तक का प्रावधान है।